दो आर्मी नर्सों की चुदाई

(एक पाकिस्तानी कहानी)
लेखक: अंजान


मेरा नाम कैप्टेन नोमान है लेकिन मुझे प्यार से नोमी कहते हैं। मैं असल में रावलपिंडी से हूँ मगर पाकिस्तान आर्मी जॉयन करने के बाद मुखतलिफ जगहों पर पोस्टिंग रही है।

ये उन दिनों की बात है जब मैं जून-२००२ में अपनी छुट्टियों पर था। उन दिनों में पाकिस्तान और इंडिया के बोर्डर पर काफी टेंशन थी और मुझे काफी कम छुट्टी मिली थी। छुट्टियों के दौरान ही अचानक मुझे टेलीग्राम मिला कि मैं जल्द वापिस अपनी यूनिट में रिपोर्ट करूँ। सो जैसा कि मैं उन दिनों में कराची में पोस्टेड था, इसलिये मैंने अपनी बुकिंग खायबर-मेल एक्सप्रेस पर करवायी।

मैं अपनी मुकरर तारीख पर रात एक बजे रावलपिंडी स्टेशन आया और ट्रेन का वेट कर रहा था। तकरीबन आधे घंटे के बाद ट्रेन आयी और मैं अपने थोड़े से सामान के साथ ए-सी स्लीपर क्लास के डिब्बे में जाकर अपना केबिन ढूँढने लगा। मेरी बुकिंग जिस केबिन में हुई थी, उस में चार बर्थ थीं। मुझे नहीं मालूम था कि और तीन लोग मेरे साथ कौन हैं, मगर मैं उन लोगों का इंतज़ार करने लगा।

तकरीबन पंद्रह मिनट के बाद एक फैशनेबल लेडी एक बूढ़े आदमी के साथ अंदर आयी और वो अपनी बर्थ तलाश करने लगे। उसके बाद उस लड़की के फादर ने बताया कि यही है उसकी बर्थ। मैंने उनको सलाम किया और बताया कि मैं कैप्टेन नौमान हूँ और कराची जा रहा हूँ। इस पर उस लड़की के फादर ने मुझे थैंक्स किया और बताया कि ये मेरी बेटी है और ये आर्मी में लेफ्टीनेंट नर्स है और इसने भी कराची जाना है, सो प्लीज़ इसका ख्याल रखना।

मैंने उनसे से कुछ देर बातें की और बताया कि मैं भी रावलपिंडी का हूँ। दरसल उस लड़की का नाम शाज़िया नाज़ था और उनका ताल्लुक अबोटाबाद के गाँव दुमतोर से था। मेरी बातों में उस लड़की ने कोई हिस्सा नहीं लिया मगर उसके फादर बहुत मुतमाईन हो कर नीचे उतर गये। उस के साथ ही गाड़ी रवाना हुई और मैं अपनी बर्थ पर बैठा हुआ था और शाज़िया मेरे सामने वाली बर्थ पर बैठी थी। इतने में गार्ड आया और हमारी टिकटें चेक करके उसने बताया कि इन दूसरे दो बर्थ पर एक फैमली लाहौर से बैठेगी, सो सुबह तक वो दोनों बर्थ खाली जानी थी और सुबह आठ बजे लाहौर से उस पर पैसेंजर्स ने आना था।

अब मैं आप लोगों को उस लड़की की तसील बताता हूँ। वो अबोटाबाद की थी और वहाँ के लोग बहुत खूबसूरत होते हैं। उसकी उम्र तकरीबन चौबीस या पच्चीस साल होगी लेकिन गज़ब की चीज़ थी। बिल्कुल सफेद रंग और चार इंच ऊँची ऐड़ी की सैंडल में उसकी हाईट ५ होगी। एक तो उसने टाइट फिटिंग वाले फैशनेबल कपड़े पहने थे और फिर हल्का सा मेक-अप किया हुआ था जिस में वो बहुत खूबसूरत लग रही थी। उसकी शक्ल टीवी एक्ट्रेस जवेरिया जलिल से काफी मिलती थी। उसकी फिगर ३६-२७-३६ थी मगर टाइट फिटिंग के कपड़ों में उसके बूब्स बहुत ही सैक्सी तरीके बाहर उभरे हुए थे, बल्कि उसके निप्पल तक वाज़िया थे। उसने चिकन की ऑरेंज रंग की कमीज़ पहनी थी और वो इतनी फिटिंग वाली थी कि कमर का बल साफ़ नज़र आ रहा था।

मैं तो बस उस लड़की पर फ़िदा हो गया था और उसकी नाज़ुक सी चूत और जिस्म के बारे में सोचता रहा।

खैर हमारा सफ़र शुरू हुआ और उसने फॉर्मल बातें शुरू कीं जिस में उसने मुझसे मेरे रैंक, पोस्टिंग, सर्विस, फैमली एंड फ्रैंड्स की काफी बातें की। इस बीच मैंने अपने बैग में से रम की बोतल निकाली और उससे इजाज़त माँगी तो वो बोली कि आप चिंता ना करें.... मुझे कोई एतराज़ नहीं है, बल्कि आप बुरा ना मानें तो मैं भी आपके साथ थोड़ी सी शेयर करना चाहुँगी। मुझे उसके खुलेपन पर हैरत हुई पर मैंने उसे भी एक ग्लास में थोड़ी सी रम डाल कर दे दी और हम दोनों बातें करते हुए पीने लगे।

तकरीबन एक घंटे बाद उसने कहा कि उसको नींद आ रही है और अभी वो सोना चाहती है। मैंने उसको कहा कि मुझे तो अभी नींद नहीं आ रही और मैं बैग से एक सैक्सी नावल निकाल कर पढ़ने लगा। उसने मुझे रम के लिये थैंक्स कहा और बाथरूम की तरफ बढ़ गयी। हाई हील सैंडलों में उसकी चाल और हिलती हुई गाँड देख कर मेरी आह निकल गयी। उसने दो पैग रम पिये थे पर उसको देख कर बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगता था। शायद उसे ड्रिंक्स लेने की आदत थी। खैर, वो बाथरूम में घुस कर स्लीपिंग ड्रेस चेंज करने लगी।

बाथरूम से निकल कर आयी तो उसने थोड़े ढीले से कपड़े पहने हुए थे और मेरे सामने वाली बर्थ पर लेट गयी। उसके बाद मैं जब बाथरूम में गया और खुद भी ईज़ी ड्रेस चेंज किया तो मैंने बाथरूम में देखा कि उसके कपड़े लटक रहे हैं और उन में उसकी ब्रा और पैंटी भी मौजूद थी। मैं तो उधर ही उसकी ब्रा और पैंटी को चूमता रहा और उन अंडर-गार्मेंट्स की किस्मत पर रश्क करने लगा। मुझे तो नींद का नाम-ओ-निशान भी नहीं था। मैं तो सिर्फ़ शाज़िया की चूत का सोच-सोच कर बेहाल हो रहा था। वैसे भी आर्मी ऑफिसर्स काफी ख्वार होते हैं और अभी तो एक केबिन में एक सैक्सी अकेली लड़की। वैसे वो भी एक आर्मी ऑफिसर थी.... आर्मी की नर्स और काफी कान्फिडन्ट लड़की थी, इसलिये कोई गलत कदम लेने से पहले सोचना था।

खैर कुछ देर बाद वो आँखें बंद करके मेरी तरफ़ करवट ले कर लेटी रही। मैं पहले ही एक सैक्सी सा नावल पढ़ रहा था और ऊपर से उसकी उठी हुई गाँड और हल्के से गिरेबान से बूब्स बाहर को निकल रहे थे, इसलिये दिमाग और ज़्यादा खराब होने लगा। बड़ी मुश्किल से अपने लंड को काबू किया हुआ था वर्ना दिल तो कर रहा था कि इधर ही इस लड़की का रेप करूँ। लेखक: अंजान

सोचते-सोचते मैंने अपने पैर सामने वाली सीट पर रख दिये, हालांकि पहले भी काफी दफा मैं सामने वाली सीट पर पैर रख चुका था। आहिस्ता-आहिस्ता मैं अपने पैर का अंगूठा उसकी चूत के करीब लेकर गया। मुझे यकीन था कि वो सो चुकी है और वैसे भी ट्रेन में चलते हुए झटके लग रहे थे, सो उसको अभी तक महसूस नहीं हुआ था। मैंने हिम्मत कर के अपना अंगूठा मज़ीद आगे किया और उसकी चूत से आहिस्ता-आहिस्ता मलने लगा।

शाज़िया ने ऐसा ही शो किया कि वो पक्की नींद में है और उसको पता नहीं चल रहा। तकरीबन दस मिनट तक मैं अपना अंगूठा उसकी चूत पर ऊपर से फेरता रहा और जब देखा कि वो अभी तक सोयी हुई है तो मैं हिम्मत करके उठा और उसकी बर्थ के साथ नीचे बैठ कर अपनी हाथ की अंगुली से उसकी चूत को आहिस्ता-आहिस्ता ढूँढने लगा।

मेरा लंड तना हुआ था मगर मैं बहुत ही एहतियात से काम कर रहा था ताकि वो उठ ना जाये मगर मुझे नहीं मालूम था कि वो सोयी ही नहीं है और मेरी अंगुली से उसको मज़ा आ रहा है।

थोड़ी देर बाद मैंने ज़ोर-ज़ोर से अपनी अंगुली उसकी चूत में मलनी शुरू की, और महसूस किया कि उसकी चूत गीली हो रही है और चूत से पानी निकल आया है। तब अचानक उसने करवट बदली। मैंने फ़ौरन हाथ पीछे किया और अपनी सीट पर वापिस बैठ गया, मगर उसने करवट बदली और सीधी लेट गयी। अब उसकी टाँगें कुछ खुली हुई थी और कमीज़ चूत पर से हटी हुई थी जिससे उसकी गीली जगह साफ़ नज़र आ रही थी। मैं तो समझा कि वो उठ गयी है और इसलिये दोबारा सीट पर बैठ कर नावल पढ़ने में मसरूफ हो गया। मगर उसने कोई हर्कत नहीं की और दोबारा ऐसा शो किया कि वो गहरी नींद में है। मैं फिर हिम्मत कर के उसकी बर्थ के साथ नीचे बैठ कर उसकी चूत में दोबारा अंगुली करने लगा। अभी चूँकि वो सीधी लेटी थी और टाँगें भी खुली थीं, इसलिये अंगुली काफी अंदर तक जा रही थी और शाज़िया ने कोई हर्कत नहीं की। मेरा लंड बहुत झटके मार रहा था। मैंने एक हाथ से लंड को काबू किया था जबकि दूसरे हाथ की अंगुली से उसकी चूत में मसाज कर रहा था। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और ये सोच रहा था कि उसकी चूत कितनी नरम है।

कुछ देर अंगुली करते-करते मैंने अंगुली काफी अंदर डाली तो उसने आँखें खोल दीं। मैं डर गया और फौरन पीछे हट कर सीट पर बैठ गया, मगर उस वक्त तो मेरे वारे न्यारे हो गये जब उसने सोते हुए कहा कि रुक क्यों गये हो?

मैंने डरते-डरते उसकी तरफ़ देखा तो वो मुस्कुराने लगी। बस मैं तो फिर शेर बन गया फौरन उठा और डोर को लॉक किया और शाज़िया को उठा कर अपने सीने से लगाया। उसकी काफी तारीफ की, उसके सैक्सी जिस्म की काफी तारीफ की और उसने भी मुझे ज़ोर से पकड़ लिया था।

फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे। वाकय उसके होंठ बहुत ही नरम और गुलाब की तरह थे। मैंने उसके होंठ चूसना शुरू किया। उसके होंठों पर लगी लिपस्टिक पहले खायी और उसके बाद उसके होंठों को एक प्यासे बच्चे की तरह चूसने लगा।

शाज़िया भी किसिंग में बहुत एक्सपर्ट लगती थी। उसने इस तरीके से मेरे होंठ चूसना शुरू किया कि मैं बहुत इंजॉय कर रहा था। उसके बाद हमारी ज़ुबानें एक दूसरे के मुँह में थीं। मैं उसके मुँह का ज़ायका चख रहा था और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। साथ-साथ मेरा हाथ उसके बूब्स पर गया। उसने ब्रा नहीं पहनी थी और उसके निप्पल खड़े थे। मैंने उनको दबाना शुरू किया और इसके बाद उसकी कमीज़ ऊपर की तो मैं खुशी से फूल गया क्योंकि उसके बूब्स छत्तीस साइज़ के गोल-गोल सफेद दूध थे। उसके निप्पल कुछ बड़े मगर इंतहा ही सैक्सी थे। उनका रंग लाईट पिंक था।

मैंने उसके मम्मे दबाना शुरू किया और शाज़िया को भी मज़ा आने लगा। उसके बाद मैंने उसके एक मम्मे को मुँह में लिया और उसको चूसने लगा। मेरी हालत एक भूखे बच्चे की तरह थी। मैंने एक मम्मे को मुँह में लिया था और दूसरे को हाथ से मल रहा था। वो बहुत ही गरम हो रही थी और मैं लगातार उसके मम्मे एक के बाद दूसरे को चूस रहा था। उसने मेरे सिर को अपनी चूचियों के साथ लगा कर रखा था और आँखें बंद की थीं। उसने मेरे जिस्म पर हाथ फेरना शुरू किया और जब उस का हाथ मेरे लंड पर पहुँचा तो फ़ौरन हटा लिया। मैंने उससे पूछा, क्या हुआ?

उसने कहा कि ये बहुत बड़ा है मगर मैंने अपना पायजामा उठा कर उसको अपना लंड दिया। उसने मेरा पौने सात इंच लंबा लंड अपने मुलायम और नाज़ुक हाथों में काबू किया और मैं अभी तक कभी उसके मम्मे चूस रहा था और कभी उसके लिप्स को चूसता।

उसके साथ ही मैं अपना हाथ उसकी चूत पर ले कर गया और वो मुकम्मल गीली हो गयी थी। मैंने उसकी सलवार जिस में इलास्टिक था, उसको उतारा और कमीज़ को मुकम्मल तरीके से ऊपर किया और उसके जिस्म को किस करना शुरू किया।

मैंने उसके एक एक हिस्से को किसिंग करना और चाटना शुरू किया। उसकी गर्दन से होता हुआ उसके प्यारे से पेट पर गया, फिर उसकी चूत की ऊपरी जगह को किस करने और चाटने लगा। बेशक वो बहुत साफ़ सुथरी लड़की थी। उसने ताज़ा-ताज़ा चूत की शेव की थी और उसकी चूत पिंकिश थी। मैंने आज तक काफी ब्लू फिल्में देखी थी मगर कभी किसी लड़की की चूत नहीं चाटी थी सो मैं बहुत बेकरार था कि इसका क्या मज़ा होता है। फिर मैंने उसकी चूत पर किस की और आहिस्ता-आहिस्ता उसकी चूत पर ज़ुबान फेरने लगा। शाज़िया को भी काफी मज़ा आ रहा था और मैंने अखिरकार ज़िंदगी में पहली बार किसी की चूत चाटी।

मुझे बहुत ही मज़ा आया क्योंकि उसकी चूत बहुत साफ़-सुथरी और सुंदर थी सो मैंने काफी देर उसकी चूत चाटने में लगायी। वो बहुत गरम हो गयी थी और टाँगें मार रही थी मगर मैं उसको मुकम्मल मज़ा देना चाहता था। हालांकि मैंने अपने लंड को काबू में किया हुआ था और पहले उसको चोटी पर पहुँचाना चाहता था, चूत चाटते-चाटते वो डिसचार्ज हो गयी और मैंने पहली दफा किसी लड़की का लावा चखा। वो बहुत अच्छा था, पहले ज़रा नमकीन लगा, मगर जब उसकी चूत की हालत देखी तो उस वक्त वो गुलाबी हो रही थी, इसलिये मैंने मुकम्मल तरीके से उसकी चूत को चाटा और उसको फारिग किया।

इस दौरान वो मेरे लंड के साथ खेल रही थी सो मैंने उसको चूसने के लिये कहा। उसने पहले इनकार किया मगर मैंने उसको काफी किस करके प्यार किया और बताया कि इस तरह उसको और मुझे मज़ा आयेगा, सो उसने मेरे लंड को डरते-डरते मुँह में लिया। फिर मैंने उसको बताया कि काटना नहीं बल्कि ज़ुबान से इस लंड को चूसना है। शुरू में तो उसको नहीं आया मगर कुछ देर बाद वो एक एक्सपर्ट लंड-चूसबाज़ की तरह मेरे लंड को चूसने लगी। मेरा लंड मुकम्मल तन चुका था और चूँकि वो पहली बार लंड चूस रही थी इसलिये मैंने उसके मुँह मैं अभी छूटना नहीं चाहा। सो मैंने लंड उसके मुँह से निकाला और उसकी टाँगों के बीच में रखा। उसने कहा कि नोमी! ये मुझे ज़ख्मी कर देगा। मैंने उसको कहा कि मैं कोई जानवर तो नहीं हूँ और तुम को प्यार से चोदूँगा। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा और आहिस्ता-आहिस्ता अंदर डालने लगा। उसकी चूत काफी टाइट थी, मगर वो वर्जिन नहीं थी क्योंकि उसने मुझे बाद में बताया कि उसने अपने एक कज़िन से कईं दफा चुदाई की हुई थी मगर उसने लंड-चुसाई और चूत आज पहली बार चटवायी थी।

खैर मैंने आहिस्ता-आहिस्ता पूरा पौने सात इंच का लंड उसकी चूत में डाल दिया और आहिस्ता-आहिस्ता आगे पीछे करने लगा। उस वक्त वो बर्थ पर लेटी थे और मैंने स्टेंडर्ड तरीके से उसकी टाँगें उठायी हुई थीं और अपना लंड उसकी चूत में डाला हुआ था। शाज़िया की आँखें बंद थीं और वो भरपूर मज़ा ले रही थी। कुछ देर बाद मैं डिसचार्ज होने लगा और मुझे ये डर था कि अगर मैं अंदर डिसचार्ज हो जाऊँगा तो ये प्रेगनेंट हो जायेगी। सो मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसकी पेट पर डिसचार्ज हो गया। मुझे बाहर डिसचार्ज होते हुए काफी तकलीफ हुई मगर मैं उसकी तबाही नहीं करना चाहता था।

जब उसने मुझे बाहर डिसचार्ज होते देखा तो मुझसे पूछा कि लंड बाहर क्यों निकाला है? मैंने यही जवाब दिया कि मैं उसको प्रेगनेंट नहीं करना चाहता और मैं उसकी तबाही भी नहीं करना चाहता। इस पर उसने मुझे सीने से लगा कर बहुत किस किया और मेरी इस बात पर खुश हुई और कहा कि अभी बाहर नहीं डिसचार्ज होना, मैं एक नर्स हूँ, ऑय नो हाऊ टू डील विद इट।

फिर कुछ देर हम इसी तरह सैक्सी बातें करते रहे और मैं उसके साथ ही बर्थ पर लेटा रहा। उसने मेरे लंड को हाथ में लिया हुआ था और मैं उसके बूब्स के साथ खेल रहा था। जब मेरा लंड दोबारा तैयार होने लगा तो मैंने उसको दोबारा चूसने के लिये कहा और खुद उसकी चूत चाटने लगा। मैंने महसूस किया कि शाज़िया को चूत चटवाने में बहुत मज़ा आ रहा है तो हमने सिक्स्टी नाइन की पोज़िशन बनायी और एक दूसरे को चाटते रहे। यहाँ तक कि वो डिसचार्ज हो गयी और मैंने उसकी सारी मनि पी ली। उसके बाद अभी तक वो मेरा लंड चूस रही थी और मुझे बहुत मज़ा आने लगा। जब मैं डिसचार्ज होने के करीब हुआ तो मैंने शाज़िया से कहा कि मैं डिसचार्ज होने वाला हूँ। उसने फौरन मेरा लंड अपने मुँह से निकाल लिया मगर मैंने उसको कहा कि जान ये नुक्सानदेह नहीं है। फिर वो मान गयी और मैं पहली दफा उसके मुँह में डिसचार्ज हुआ। उसने मेरी मनि को मुँह में लिया और फिर कुछ कोशिश करके पी गयी। उसके बाद उसने बताया कि मेरी मनि बहुत मज़ेदार थी और उसने पहली दफा ज़िंदगी में मनि का ज़ायका लिया है।

मैं दो दफा डिसचार्ज हो गया था। फिर हमने कुछ आराम किया और उसके कहने पर एक-एक पैग रम का और पिया। मगर मेरे लंड को आराम नहीं था और कुछ ही देर बाद दोबारा तैयार हो गया। मैंने शाज़िया की चूत को चाटना शुरू किया। वो रम के हल्के से नशे में सो रही थी पर फिर उठ गयी। मैंने कहा कि, जान मेरा फिर दिल कर रहा है! इस दफा मैंने उसको डॉगी स्टाईल में बनाया और उसकी गाँड को किस करता रहा। उसकी गाँड बहुत सैक्सी और गोल थी। मैंने उसके चूतड़ खोल कर उसकी गाँड के सुराख को चेक किया। वो डार्क पिंकिश कलर का था और मैंने उसकी गाँड पर ज़ुबान फेर कर उसके साथ इंजॉय किया।

उसके बाद उसकी चूत में पीछे की तरफ़ से अपना लंड डाला। ये मेरा मनपसंद स्टाईल है और मैंने इस दफा बहुत इंजॉय किया। मैंने बहुत समय लगाया और शाज़िया को पूरा मज़ा दिया। मैंने इस दफा अपना लंड भी बाहर नहीं निकाला और उसकी चूत को अपनी मनि से भर दिया। उसके बाद उसको उलता लिटाया और उसके ऊपर लेटा रहा जब तक मेरा लंड सिकुड़ कर खुद बाहर नहीं आ गया। लेखक: अंजान

उसके बाद वो उठी और अपने सैंडल पहन कर बाथरूम में गयी और साफ़ हुई। वापस आकर उसने अपने पर्स से लोशन निकाला और अपनी चूत और गाँड पर लगाया। उसके बाद उसने पर्फ्यूम निकाल कर अपनी सैक्सी जाँघों पर स्प्रे किया। मैं ये देख कर हैरान हो गया कि वो अपनी चूत और गाँड का बहुत ख्याल करती है। मुझे काफी अच्छा लगा।

फिर मैं भी उठा और बाथरूम में जाकर अपने लंड को धोने लगा और खुद को जन्नत में महसूस कर रहा था। मैं सोच भी नहीं सकता था कि इतनी सैक्सी और खूबसूरत हमसफ़र मिलेगी। उसके बाद, चूँकि अब सुबह हो चुकी थी, इसलिये शाज़िया ने दोबारा अपने कपड़े चेंज किये और लाहौर तकरीबन आने ही वाला था। मुझे ये छः घंटे सफ़र के पता भी नहीं चले और इतना जल्दी लाहौर आ गया। लाहौर स्टेशन पहुँच कर मैंने प्लैटफोर्म का चक्कर लगाया और कुछ फल खरीदे। उसके साथ ही किचन वाले वेटर को नाश्ते का ऑर्डर दिया। वापिस केबिन में आकर मैं शाज़िया के साथ ही सीट पर बैठ गया। मैं उससे तमाम एक्सपीरियंस के बारे में मालूम कर रहा था। मुझे ये सुन कर बहुत खुशी हुई कि मैं बहुत गरम और सैक्सी हूँ और उसने मुकम्मल इंजॉय किया।

उसके बाद अभी हम लोग नाश्ते कर रहे थे कि एक औरत और एक बच्चा हमारे केबिन में आ गये। उस औरत की उम्र पैंतालीस साल होगी और उसके साथ आठ या नौ साल का बच्चा था। मुझे तो सख्त गुस्सा आया कि हमारे मज़े में कोई शामिल हो गया है और अभी मैं इंजॉय नहीं कर सकुँगा मगर जब वो लोग बैठ गये तो बात मैंने ही शुरू कि और शाज़िया को अपनी वाईफ के तौर पर तार्रुफ करवाया और उस औरत को बताया कि हमारी नयी शादी हुई है और अभी हम कराची जा रहे हैं। मुझे ज़्यादा खुशी ये सुन कर हुई कि उस आँटी ने रोहरी स्टेशन जाना था यानी उसके बाद भी मेरे पास कराची तक एक पूरी रात का वक्त था।

खैर ट्रेन दोबारा स्टार्ट हुई और हम लोग नाश्ता खतम कर चुके थे। उसके बाद शाज़िया उस आँटी से फॉर्मल बातें करती रही और हम दोनो एक दूसरे की तरफ़ पैर करके एक ही सीट पर बैठे रहे। कुछ देर बाद मैंने सीट पर टाँगें लंबी कीं और लेट गया जबकि शाज़िया मेरे साथ एक तरफ़ बैठी थी। आँटी का बच्चा ऊपर वाली बर्थ पर चढ़ कर लेट गया और मैं शाज़िया के साथ लेटा रहा। हमने एक चादर अपने ऊपर डाली हुई थी जिससे मेरा जिस्म और शाज़िया का आधा जिस्म छिपा हुआ था। मैंने आँखें बंद कीं और मैं सो गया। उसके बाद पता नहीं कब तक ये दोनों औरतें बातें करती रहीं और उसके बाद शाज़िया भी मेरे साथ लेट गयी।

जैसा कि मैंने पहले ही अकलमंदी कर के आँटी को बताया था कि हम मियाँ बीवी हैं तो उस वक्त ये सब कुछ बुरा नहीं लग रहा था। शाज़िया सोयी नहीं बल्कि मेरा सैक्सी नावल पढ़ने लगी। उसके बाद चद्दर के अंदर से ही मेरे लंड को हाथ में लेकर मसाज करने लगी। अचानक मेरी आँख खुली और मैंने देखा कि आँटी और उसका बच्चा सो रहे हैं। शाज़िया मेरे ही साथ लेट कर नावल पढ़ रही है और साथ-साथ मेरे लंड पर हाथ फेर रही है। जब मैं काफी गरम हुआ तो मैंने पायजामे से लंड बाहर निकाल कर शाज़िया के हाथ में दिया और मैं आराम-आराम से उसकी चूत में अँगुली करने लगा। मगर उसने मज़ीद आगे नहीं जाने दिया क्योंकि अभी एक फैमली हमारे साथ थी। इसलिये उसने हाथों से ही मेरी मुठ मारी और मुझे रिलैक्स किया। उसके बाद मैंने अपनी मनि साफ़ की और खामोशी से उठ कर शाज़िया को लंबी सी किस की और दोबारा सो गया।

बरहाल सफ़र गुज़रता रहा और आखिरकार रोहरी स्टेशन आ गया जहाँ पर उस आँटी ने उतरना था। उसने उतरते हुए अपने घर का पता दिया और कहा कि बहुत लविंग कपल है, कभी हमारी तरफ़ चक्कर लगाना। और उसके बाद वो दोनों माँ-बेटा उतर गये। उनके चले जाने के बाद मैंने केबिन को लॉक किया और शाज़िया को गले लगा कर बहुत किस किया। वो मेरी हाज़िर-जवाबी और अक्लमंदी की तारीफ करने लगी। मैंने भी उसको कहा कि आखिर एक आर्मी ऑफिसर हूँ, कोई मज़ाक नहीं है।

उसके बाद सुबह कराची केंट पहुँचने तक कोई नहीं आया और मैंने शाज़िया को आठ बार अलग-अलग स्टाईल से चोदा। मुझे उसके साथ हर बार एक नया ही मज़ा आया। एक बार उसकी गाँड भी मारी। उसने थोड़ा मना किया पर रम के नशे में वो गाँड मरवाने को तैयार हो ही गयी। ये मेरी ज़िंदगी का यादगार सफ़र था और कितनी जल्दी वो रात गुज़री मुझे मालूम ना हो सका मगर आखिरकार हम लोग खैरियत से कराची कैंट कुछ लेट तकरीबन आठ बजे पहुँचे।

उस दिन संडे था इसलिये स्टेशन पहुँच कर मैं शाज़िया के साथ उतरा और अभी तक हम इतने करीब आ गये थे कि वो वाकय मुझे अपना हसबैंड जैसा समझ रही थी। वो मेरे साथ ही स्टेशन से बाहर आयी। उसने रात में मेरे साथ काफी रम पी ली थी और उसका सिर थोड़ा सा चकरा रहा था। मैंने उसको कहा कि आज चूँकि संडे का दिन है और मुझे कल ड्यूटी पर हाज़िर होना है, तुम्हारा क्या रूटीन है? उसने भी यही कहा कि उसकी भी हाज़िरी अगले दिन से है तो मैंने उसको कहा कि अगर तुम बुरा ना मानो तो मेरे साथ चलोगी?

अभी तक शाज़िया को मुझ पर काफी भरोसा हो गया था, इसलिये वो तैयार हो गयी मगर पूछा कि किधर जाना है? मैं चूँकि मेस में रहता था और वहाँ एक औरत को नहीं ले जा सकता था। इसके अलावा कराची में एक ही काबिल-ए-एतमाद दोस्त था। वो काफी अमीर था और उन दिनों मुल्क से बाहर गया हुआ था।

मैंने थोड़ा सोचा और उसको होटल में रुकने का सुझाव दिया। पहले तो वो घबरायी क्योंकि हम फौज के लोगों के पीछे आई-एस-आई काफी होती है। इसलिये उसने मुझे डराया, मगर मैंने उसको तसल्ली दी कि तुम कहीं भी ये ना शो करना कि तुम आर्मी में हो। खैर आल्लाह का नाम लेकर हम लोग मेट्रोपोल पर मौजूद सर्विसेज मेस में आ गये। मैंने वहाँ जाने से पहले शाज़िया को कहा कि चादर पहन ले और एक पर्दे वाली बीवी का रोल करे। पर्दे में होने से उसकी साँसों में मौजूद रम की महक भी किसी को नहीं आयेगी। मैंने रिसेपशन पर जाकर अपना कार्ड दिखाया और कहा कि ये मेरी वाईफ है, कराची एक काम से आयी है, इसलिये अभी मुझे फैमली वाला रूम चाहिये।

फ्रैंड्स, हो सकता है कि आप लोगों को आर्मी के एक कैप्टेन की अहमियत मालूम हो, इसलिये उस हवलदार ने कोई दूसरी बात नहीं की बल्कि एक फ़ॉर्म लाया। मैंने सिर्फ फोरमैलटी के तौर पर उल्टा सीधा नाम और मालूमात डाल कर फ़ॉर्म पर जाली दस्तखत किये। कुछ देर बाद एक सुबेदार आया और मैंने कार्ड दिखाया तो उसने सेल्यूट मार कर जवाब दिया और फिर मुझे एक फैमली रूम की चाबियाँ दीं। मैं शाज़िया को लेकर रूम में आया, और रूम का डोर बंद करके शाज़िया को सीने से लगाया कि सबसे बड़ा मसला हल हो गया। शाज़िया का ज़िक्र कहीं नहीं आया और वो बहुत खुश थी। उसने मुझे ज़ोर से किस किया। अभी हमने सिर्फ़ सामान कमरे में रखा था और एक दूसरे के साथ चिपक कर प्यार करने लगे।

अचानक डोर पर नॉक हुई और मैंने फौरन अपनी हालत ठीक करके डोर खोला। एक बेरा नाश्ते का ऑर्डर लेने आया था। मैंने कहा कि अभी तो हम थके हैं। इसलिये लंच और डिनर का ऑर्डर दे दिया। उस बेरे के चले जाने के बाद मैंने अच्छी तरह से पूरे रूम को चेक किया कि कहीं कोई खतरे की बात तो नहीं। उसके बाद जब मुतमाईन हो गया तो मैंने वापस अकर शाज़िया को गोद में लिया और चूमना शुरू किया। उसके बाद मैंने उसको नंगा करके गौर से देखा। इसमें कोई शक नहीं कि वो बहुत ही ज़्यादा खूबसूरत थी। मैं काफी देर उसको देखता रहा और भरपूर तरीके से उसको चूमा और फिर वही तमाम हालात हुए।

लंच से पहले मैं चार बार उसको चोद चुका था। मैं काफी थका हुआ था इसलिए पास मौजूद थोड़ा सा नाश्ता खाया और हम आराम करने लगे। ठीक दो बजे बेरे ने डोर खटखटाया और लंच ले कर आया। मैंने उससे लंच लेकर टेबल पर रखा और उसको कहा कि मैं खुद ही बर्तनों के लिये फोन कर दूँगा।

फिर शाज़िया को भी उठाया और हम दोनो बाथरूम में गये। ये बहुत शानदार बाथरूम था। उसमें एक बड़ा टब लगा हुआ था, सो मैंने उसको पानी से भरा और शाज़िया को उस में नंगा करके उसके पूरे जिस्म को चाटने लगा। उसके बाद जब मैं फिर रेडी हुआ तो शाज़िया ने मेरे लंड को मुँह में लेकर काफी चूसा। फिर मैंने एक नयी स्टाईल से उस टब में पानी के अंदर शाज़िया को चोदा और बहुत मज़ा आया। उसके बाद शाज़िया ने याद दिलाया कि खाना ठंडा हो रहा है तो हम लोग जल्दी-जल्दी बाहर आकर नंगे ही लंच करने लगे।

लंच के बाद काफी देर हम लोग रम पीते हुए नंगे बैठे रहे और बातें करते रहे। शाज़िया ने बताया कि उसने पहले अपने एक कज़न से सैक्स किया था मगर उसको सही मज़ा मेरे साथ आया है और वो मुझसे प्यार करने लगी है। उसके बाद शाम तक चार दफा चुदाई की। मुझे हर बार एक नया ही लुत्फ़ महसूस हुआ और काफी इंजॉय किया। इस दौरान मैं एक बार उसके मुँह में और एक बार उसकी गाँड में डिसचार्ज कर चुका था।

उसके बाद शाम को हम लोग तैयार होकर बाहर निकले और सदर (कराची) आये। वहाँ मैंने शाज़िया को कुछ गिफ़्ट लेकर दिये और उसने भी कुछ शॉपिंग की। फिर रात को नौ बजे तक दोबारा होटल पहुँचे। शाज़िया ने मुसलसल चादर की हुई थी कि कोई उसको पहचान ना ले।

वापस रूम में आकर हम लोगों ने डिनर किया और फिर मैंने गरम दूध के लिये ऑर्डर दिया। कुछ देर बाद बेरा गरम दूध लेकर आया और मैंने बहुत पिया क्योंकि कम से कम दस दफा तो शाज़िया को चोद चुका था। इसलिये ताकत वापिस बहाल की। शाज़िया तो पूरी पियक्कड़ थी। उसने दूध को हाथ भी नहीं लगाया और रम पीने लगी। उसके बाद सब कुछ मुकरर करके हमने कपड़े चेंज किये। मैंने पायजामा और टी-शर्ट पहनी मगर शाज़िया अचानक बाथरूम से एक सैक्सी सी नाईटी और ऊँची ऐड़ी की सैंडल पहन कर निकली। वो बहुत अच्छी लग रही थी। ये क्रीम रंग की नाईटी थी। काफी बारीक और सिल्क की नाईटी और काले रंग के ऊँची ऐड़ी के सैंडलों में वो बहुत सैक्सी लग रही थी। वो बिल्कुल ऐसे पेश आ रही थी जैसे एक बीवी करती है।

उसके बाद पूरी रात मैं उसके साथ चुदाई करता रहा और मैंने अपनी ज़िंदगी की एक ना भूलने वाली रात गुज़ार कर एक तारीख रकम की। मैंने पूरी रात शाज़िया को मुखतलिफ स्टाईल से चोदा, और जी भर कर उसकी चूत को चाटा और जी भर कर उससे लंड चुसवाया। तीन दफा उसकी गाँड में भी लंड डाला। सबसे अच्छा सीन ये था कि एक बार शाज़िया ने मेरे लंड पर शहद लगा कर चाटा और खूब चुसायी की। मैं पूरी रात ना सो सका बल्कि पूरी रात चुदाई में मसरूफ रहा।

सुबह तकरीबन छः बजे हमने आखिरी बार बाथ लिया और उसने मुझे बहुत प्यार किया। मेरे लंड का बुरा हाल हो चुका था क्योंकि मैंने बहुत ज़्यादा बार चुदाई कर ली थी और मेरा लंड सेंसटिव हो गया था । खैर उसके बाद हम तैयार हुए और मैंने काऊँटर पर आकर क्लीयरंस करवायी और फिर हम लोग अपना सामान ले कर होटल से बाहर आये। वहाँ से मैंने एक टैक्सी की और चूँकि शाज़िया का मेस और मेरी यूनिट कैंट स्टेशन के करीब थी, इसलिये साथ ही टैक्सी में बैठे। पहले मैं उसको उसके मेस की तरफ़ ले गया और उसने अपने होस्टल के गेट पर मुझे एक अच्छी सी किस दी और अपना सामान लेकर अंदर चली गयी। हालांकि टैक्सी वाला मिरर में से देख रहा था, मगर मैंने यही ज़ाहिर किया कि ये मेरी बीवी है और मैं इसको ड्रॉप करने आया हूँ। उसके बाद टैक्सी वाले को अपनी मेस कि तरफ़ लेकर गया।

अपनी यूनिट के गेट पर जाकर मैंने टैक्सी वाले को पेमेंट की और वो चला गया। गेट पर पहुँचते ही गेट संतरी ने मेरा इस्तकबाल किया और एक बैटमैन जल्दी से मेरा सामान लेकर मेरे रूम की तरफ़ रवाना हो गया। रूम पर पहुँच कर मैंने शॉवर लिया और फिर ड्यूटी ऑफिसर को फोन किया। नसीब से मेरा ही कोर्स-मेट ड्यूटी पर था। उसको अपने अपने की इत्तला दी और उसके बाद उसको बताया कि मेरी तबियत ठीक नहीं है और इसलिये मैं ऑफिस नहीं आऊँगा। अगर कोई प्रॉब्लम हुआ तो मुझे बुला लेना।

फिर मैंने अपना मोबाइल बंद किया और शाज़िया के साथ गुज़रे हुए तमाम सीन को ज़हन में लाया और एक खुशगवार फ़ीलिंग के साथ एक गहरी नींद सो गया। शाम को जब मैं उठा और मोबाइल ऑन किया तो शाज़िया की तरफ़ से मिले प्यारे और सैक्सी एस-एम-एस पढ़े। फिर मैंने उसके मोबाइल पर फोन किया तो वो बेचारी ड्यूटी पर थी। उसने बताया कि वो मुझे और मेरे लंड को मिस कर रही है। मुझसे रहा नहीं गया और जल्दी से तैयार होकर अपनी होंडा बाईक निकाली और उसके बताये हुए हास्पिटल में एक फूलों के गुलदस्ते के साथ पहुँचा। ये शिफा हास्पिटल कोरांगी रोड पर है और इसमें फौज के तमाम लोगों का इलाज होता है। शाज़िया भी वहीं जॉब करती थी। मैं उसके बताये हुए वार्ड में गया। उसने आर्मी-नर्स का युनिफ़ॉर्म पहना हुआ था और वो बहुत ज़्यादा सैक्सी लग रही थी। उसकी आँखों से मालूम हो रहा था कि वो बहुत थकी हुई है। पिछली पुरी रात रम पी कर चुदाई की थी और सोना तो नसीब ही नहीं हुआ था।

खैर उसने मुझे विज़िटर रूम में बिठाया और मेरे लिये कोल्ड-ड्रिंक्स मंगवायी। मैंने उसको वह फूलों का गुलदस्ता दिया और उधर विज़िटर रूम में ही पकड़ कर चूमने लगा मगर उसने मुझे मना किया कि ये मेरी ड्यूटी प्लेस है.... यहाँ चुदाई करना खतरनाक है। खैर मैंने उसके साथ काफी समय गुज़ारा और इस दौरान मैंने उसे काफी चूमा और काफी दफा उसकी गाँड और चूचियों को दबाया उसके बाद मैं वापिस अपनी यूनिट आ गया और इसके बाद मैं वीक-एंड का इंतज़ार करने लगा। अगले शनिवार को फिर शाज़िया के साथ डेट लगायी। मेरे पास जगह नहीं थी लेकिन मैं उसको समंदर किनारे ले गया और वहाँ पर अंधेरे में कुछ चूमा-चाटी की और चूचियों को मसल और चूसा। उसने मेरे लंड की चुसायी की और फिर रात को वापिस मैं उसको उसके मेस छोड़ आया।

उसके बाद मेरा ये रूटीन बन गया था कि जब भी वो शाम को फ़्री होती तो मैं उसको अपनी मोटर-बाईक पर बिठा कर लेकर जाता और कोई भी खाली जगह देख कर कुछ चुदाई करता। मगर अभी तक कोई फ़्लैट या घर नहीं मिला था कि मैं अपने लंड की तमाम मस्ती उतार सकूँ।

इस दौरान शाज़िया ने मुझे अपनी बेस्ट-फ्रेंड फौज़िया से भी मिलवाया। वो होस्टल में शाज़िया की रूम-मेट थी। वो भी काफी सैक्सी लड़की थी। उसकी उम्र भी शाज़िया के जितनी थी मगर फिगर थोड़ा कम था। मेरे ख्याल से उसका फिगर ३४-२६-३४ था। शाज़िया ने मुझे उससे होस्टल में मिलवाया और उसने मेरी बड़ी खातिर की।

अब चूँकि शाज़िया की चूत को एक लत पड़ गयी थी और वो अपनी चूत को हर-रोज़ चटवाना और चुदवाना चाहती थी। मगर ना तो मैं इतना फारिग था और ना हमारे पास कोई घर या फ़्लैट था कि मैं उसको हर वक्त लेकर जाता और उसकी चूत की आग बुझाता। इसलिये उसने अपनी रूम-मेट फौज़िया से आहिस्ता-आहिस्ता चुदाई का सिलसिला स्टार्ट किया, जिसका मुझे बाद में मालूम हुआ। फिर मेरा रूटीन काफी मसरूफ हो गया था और मैं बस शाज़िया से रात को फोन पर चुदाई की बातें करता और वो फोन पर ही मेरी मुठ लगवा देती थी। वजह यह थी कि मेरी यूनिट में मेरी जिम्मेवारियाँ कुछ दिनों के लिये बढ़ गयी थीं, सो मैं शाज़िया को वक्त नहीं दे सका। मगर हम लोग फोन हर रोज़ करते और फोन-सैक्स करते थे। जबकि उसको तो उसकी फ्रेंड फौज़िया मिल गयी थी और वो दोनों हर रोज़ लेस्बियन चुदाई करती थीं। जब शाज़िया मेरे साथ फोन सैक्स करती तो उस वक्त साथ ही वो फौज़िया कि साथ चुदाई कर रही होती थी। उसके लहज़े से मालूम पड़ता था कि उसने शराब पी रखी होती थी।

काफी दिनों बाद मुझे एक काम से शिफ़ा हास्पिटल जाना पड़ा और मैं युनिफ़ॉर्म में था। मगर मेरे लंड में काफी खुजली हो रही थी और काफी दिन से शाज़िया की चूत का मज़ा नहीं लिया था। मैं अचानक युनिफ़ॉर्म में उसके ड्यूटी वार्ड में पहुँच गया तो वो हैरान हो गयी और मुझे युनिफ़ॉर्म में देख कर काफी खुश हुई। बेशक मैं युनिफ़ॉर्म में काफी स्मार्ट लगता हूँ और मेरे कंधों पर स्टार्स काफी अच्छे लगते हैं। खैर वो ड्यूटी पर थी और कोई जगह नहीं थी तो उसने मुझे अपने चेंजिंग रूम में बिठाया। ये इमरजेंसी वार्ड में नर्सेज का चेंजिंग रूम था। इधर नर्सें कुछ आराम और कुछ चेंजिंग वगैरह करती थीं। हालांकि इधर अदमियों को इजाज़त नहीं थी मगर शाज़िया ने रिस्क ले कर मुझे वहाँ बिठाया और मैं उसका इंतज़ार करने लगा। लेखक: अंजान

कुछ देर बाद वो खुद कॉफी का कप लेकर आयी। मैंने पहले भी बताया कि शाज़िया युनिफ़ॉर्म में बहुत सैक्सी लगती थी क्योंकि उसकी बाहर निकली हुई गाँड और उसके बूब्स साफ़ नज़र आते थे। मैं तो उसको देख कर ही सैक्सी मूड में आ गया। जब वो अंदर आयी तो मैंने उसको पकड़ा और उसे चूमना शुरू कर दिया। उसने मना किया कि ये जगह ठीक नहीं है मगर मैंने कहा कि इधर तो कोई भी नहीं आता। फिर उसने डोर लॉक किया और मैंने आहिस्ता से उसकी युनिफ़ॉर्म शर्ट ऊपर की और उसकी सफेद-सफेद चूचियाँ चूसने लगा। काफी दिनों बाद उसकी चूचियाँ चूस रहा था, इसलिये बहुत मज़ा आया। फिर मैंने उधर ही अपनी पैंट की ज़िप खोली और अपना लंड बाहर निकाला। शाज़िया ने जल्दी-जल्दी उसको मुँह में लिया और चूसने लगी। साथ-साथ वो बोली कि मैं इसको मिस कर रही थी, ये मेरी जान कितना उदास है, चलो मैं तुमको खुश करती हूँ। मैं जल्दी ही गरम हो गया। फिर मैंने शाज़िया की पैंट नीचे की और उधर ही सोफ़े पर उसको उल्टा मोड़ दिया और पीछे से उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया।

मुझे कुछ-कुछ डर भी लग रहा था मगर चुदाई की इंतहा पर था, इसलिये जल्दी-जल्दी उसकी चूत में लंड आगे पीछे करने लगा। फिर कुछ देर बाद मैं उसकी चूत में फारिग हुआ और उसने मेरे लंड को अपनी चूत से निकाल कर चाटना शुरू किया और बोली कि, काफी दिनों से मैंने ये टेस्ट नहीं किया, और मेरे लंड को अच्छी तरह चाटने लगी। फिर उसने अपना ड्रेस ठीक किया और अपनी हालत को मिरर में देख कर ठीक किया। मैंने भी अपनी हालत ठीक की।

उसने डोर की कुँडी खोली और एहतियात से बाहर देखा कि कोई नहीं है। उसने बताया कि मैं वार्ड में जा रही हूँ, तुम बाद में आराम से निकल जाना। उसके चले जाने के बाद मैं भी कुछ देर बाद ठीक हो कर बाहर निकला और उसके पास वार्ड में गया। वहाँ शाज़िया की काफी कलीग्स थीं। शाज़िया ने मुझे उनसे मिलवाया कि ये मेरे कज़न हैं। मैं आर्मी की युनिफ़ॉर्म में था, इसलिये बाकी नर्सों ने शाज़िया को सराहा कि तुम्हारा कज़न काफी स्मार्ट है, और उसको छेड़ा और वो शर्मा सी गयी।

इमरजेंची वार्ड में चुदाई करके मेरा काफी खौफ हट गया था और जब तक उसकी उस वार्ड में ड्यूटी थी, मैं अक्सर शाज़िया के पास वार्ड में जाता और काफी खतरा लेकर अपने लंड की प्यास बुझाता। हालांकि हम लोग पूरा इंजॉय तो नहीं कर सकते थे मगर कुछ न कुछ कर ही लेते थे, क्योंकि वो जगह ज़्यादा सेफ नहीं थी। इसी दौरान मैं उसकी फ्रैंड फौज़िया से भी काफी फ़्री हो गया था लेकिन अभी तक उसने कोई चुदाई की बात नहीं की थी और न ही बताया कि वो शाज़िया के साथ लेस्बियन सैक्स करती है।

आखिरकार मेरा जिगरी दोस्त, अहमद, भी कराची वापस आ गया। वो काफी अमीर है और डिफेंस फेज़-ई/ई में रहता है। मैंने उससे मिल कर उसको बताया कि मैं उसको काफी मिस करता रहा हूँ। अभी तक मैंने शाज़िया की चुदाई का उसको नहीं बताया था मगर इस दौरान एक दिन हमारा प्रोग्राम होक्स-बे का बना और मैंने अहमद को भी प्रोग्राम का बताया और उसको शाज़िया और उसकी फ्रैंड का तफ़सील से बताया। मगर उसको अभी तक चुदाई का नहीं बताया था बल्कि बताया कि बहुत करीबी गर्ल फ्रैंड है।

आखिरकार सितंबर के पहले संडे को, मैं अहमद के साथ उसकी गाड़ी में शाज़िया के होस्टल आया। उस वक्त तक शाज़िया कि सिर्फ़ फोन पर अहमद से बात हुई थी, सो उन दोनों ने पहली बार अहमद को देखा। फिर हम चारों (शाज़िया, फौज़िया, मैं और अहमद) कार में बैठ कर होक्स-बे की तरफ़ रवाना हुए। अभी तक हम लोग रिजर्व थे क्योंकि मैं आगे अहमद के साथ बैठा था और पीछे शाज़िया और फौज़िया बैठी थीं।

होक्स्र-बे पर मैंने पहले से हट बुक करवाया हुआ था और हम लोग कुछ सामान लेकर गये थे। वहाँ मैंने फौज़िया को अहमद के साथ किया और खुद शाज़िया के साथ सी-साईड पर वॉक करने लगा। उसके बाद वो दोनों कुछ आगे चले गये और मैं शाज़िया को लेकर हट में आया। वहाँ मैंने उसको चूमना शुरू किया और फिर दोबारा एक ज़ोरदार चुदाई की। जब वो दोनों वापस आये तो मैंने रूम को लॉक किया हुआ था। उन्होंने नॉक किया और मैंने डोर खोला। हालांकि मैं चुदाई खतम कर चुका था मगर शाज़िया के ड्रेस से मालूम हो रहा था कि हम लोग चुदाई कर रहे थे। मगर उन्होंने कुछ नहीं कहा।

उसके बाद हमने मिल कर बियर पी और लंच किया। फिर लंच के बाद जब शाज़िया और फौजिया सामान संभालने में लगी तो अहमद बालकोनी में मेरे पास आया और आँख मार कर हालात मालूम किया। वो मेरा बेस्ट फ्रैंड है तो मैंने उसको हालात का बताया और उससे फौज़िया का मालूम किया। उसने बताया कि फौज़िया ने भी काफी बातें चुदाई पर की थीं उसके साथ और वो भी जल्द राज़ी हो जायेगी।

उसके बाद मैं शाज़िया को लेकर सी-साईड पर गया और अहमद और फौज़िया को हट पर छोड़ा और कहा कि, तुम लोग आराम करो, हम लोग राऊँड लगा कर आते हैं। फिर मैं शाज़िया को बगल में लेकर हट से दूर चला गया। पीछे मालूम हुआ कि अहमद साहब ने भी अपनी लंड की आग बुझा ली है और फौज़िया की चूत की सैर कर ली है। इस दौरान फौज़िया ने शाज़िया के साथ लेस्बियन सैक्स का भी अहमद को बताया। हम दोनो काफी देर बाद वापस आये तो हम सब ने मिल कर बियर पीनी शुरू की। इस दौरान हमने काफी गपशप की और फिर जब मैं अहमद के साथ अकेला हुआ तो उसने बताया कि काम हो गया है और उसने फौज़िया की चूत को पार कर लिया है।

खैर हमने एक बहुत अच्छा दिन होक्स-बे पर गुज़ार कर शाम को वापसी की। अहमद ने ड्राइविंग मुझे दी और वापसी पर मैं ड्राइविंग करता हुआ कार लेकर आया। वापसी पर शाज़िया मेरे साथ आगे की सीट पर थी जबकि फौज़िया अहमद के साथ पीछे सीट पर थी। हमने पूरे रास्ते बहुत इंजॉय किया मगर शाज़िया ने या फौज़िया ने ये नहीं शो किया कि दोनों अपनी चूत फिरवा कर आ रही हैं।

उसके बाद हम चारों का एक अच्छा ग्रुप बन गया। चूँकि अहमद काफी अमीर लड़का था और अकेला फ़्लैट में रहता था, तो मेरी निसबत उसके पास पैसा काफी था। वैसे भी आर्मी में तनखा काफी कम होती है और मैं वैसे भी काफी खर्चा नहीं करता था। मगर अहमद हर डेट पर हम चारों का खर्च बर्दाश्त करता था।

उसके बाद मैं कईं दफा शाज़िया को अहमद के फ़्लैट पर लेकर गया और शाज़िया की चूत की आग बुझाता रहा। इधर शाज़िया और फौज़िया तो अच्छी फ्रैंड्स थी ही और आपस में भी चुदाई करती थीं। उन्होंने एक दूसरे को हमारे साथ चुदाई की कहानी भी बता दी थी। अभी तक हम चारों ने ग्रुप सैक्स नहीं किया था और उसकी वजह या तो शरम थी या अभी तक मौका ही नहीं मिला था। अक्सर शाज़िया की ड्यूटी होती तो फौज़िया फ़्री होती, या फौज़िया की ड्यूटी होती तो शाज़िया फ़्री होती। आखिरकार २३ नवंबर को अहमद की सालगिरह थी और उसने मुझे पहले ही से दावत दे रखी थी और उन दोनों को भी कहा कि उन्होंने भी पार्टी में आना है।

यहाँ मैं एक बात वाज़िया कर दूँ कि नर्सों को होस्टल से बाहर रात गुज़ारने की इज़ाजत नहीं थी। इसलिये हम लोग या तो दिन में मिलते या रात दस बजे तक वापिस आ जाया करते थे, क्योंकि उनकी रोज़ाना रात को हाज़री होती थी और रोज़ाना उनकी रिपोर्ट उनकी हेड नर्स को जाती थी। जब से मैं कराची वापस आया था, मैंने दोबारा शाज़िया के साथ रात नहीं गुज़ारी थी और न कभी मौका मिला था। बरहाल मैंने शाज़िया को अहमद की सालगिरह और सैक्स प्रोग्राम का बताया। उसका भी दिल किया कि काफी इंजॉय किया जाये, सो उन दोनो ने अपनी हेड नर्स को इल्तज़ा की कि उनकी रिश्तेदारी में शादी है और उनको रात बाहर रहना पड़ेगा। लेखक: अंजान

उनकी दरख्वास्त मंज़ूर हो गयी। मैं और अहमद २३ नवंबर को शाम के वक्त शाज़िया और फौज़िया के होस्टल उन दोनों को लेने अये। वो रात भी मेरी ज़िंदगी की ना भूलने वाली रात थी। शाम को हम चारों अहमद की कार में तारीक रोड गये और मैंने और दोनों लड़कियों ने अहमद के लिये कुछ गिफ़्ट पैक करवाये। उसके बाद अहमद के फ़्लैट पर चारों पहुँच गये।

अहमाद ने बताया कि अभी रात का खाना उसकी तरफ़ से बाहर रेस्तोरां में होगा। फिर वापस अकर केक काटेंगे। खैर हम चारों डिफेंस के एक खूबसूरत रेस्तोरां सिल्वर स्पून में गये और वहाँ ज़बरदस्त डिनर किया और डिनर के दौरान बहुत गपशप लगायी और काफी इंजॉय किया। उसके बाद वापस आकर फ़्लैट पर हमने बाकी प्रोग्राम को तरतीब दिया। ये पहली बार है कि शाज़िया और फौज़िया एक साथ उस फ़्लैट पर थीं, वर्ना तो मैं जब शाज़िया को ले कर जाता था तो वो अकेली होती थी, और अहमद जब फौज़िया को लेकर जाता तो वो भी अकेली होती थी।

अहमद ने बहुत इंतज़ाम किया था। उसने बड़ा सा केक मंगवाया था। उसके साथ बाहर के मुल्क से लायी महंगी शराब थी। खैर हमने फिर केक काटा और सब ने अहमद को हैप्पी बर्थडे कहा। उस वक्त मैंने अहमद के गालों पर एक किस की तो वो दोनो लड़कियाँ मुस्कुराने लगीं और कहने लगीं, देखो एक लड़का दूसरे लड़के को किस कर रहा है! मैंने जवाब दिया कि एक लड़की जब दूसरी लड़की को किस कर सकती है तो क्या मैं दूसरे लड़के को किस नहीं कर सकता? इस पर शाज़िया समझ गयी और ज़ोर- ज़ोर से हंसने लगी।

उसके बाद हम चारो ड्रिंक्स पीने लगे और गपशप लगाने लगे। दोनों लड़कियाँ पूरे जोश में वो महंगी शराब पी रही थीं और उन पर नशा जल्दी छाने लगा था। फिर फौज़िया ऊँची ऐड़ी की सैंडल में लड़खड़ाती सी किचन की तरफ बढ़ी तो अहमद भी उसके पीछे हो लिया। मैं शाज़िया को सहारा देकर बेडरूम में लाया और किसिंग करने लगा। मैंने शाज़िया को कहा कि ग्रुप सैक्स करते हैं मगर उसने कहा कि फौज़िया राज़ी नहीं होगी। खैर हमने कुछ देर बेडरूम में चुदाई की और इस दौरान अहमद ने भी फौज़िया को नहीं छोड़ा क्योंकि जब मैंने बेडरूम खोला तो बाहर हॉल में फौज़िया अपने कपड़े ठीक कर रही थी। दरसल अभी तक हम में कुछ शरम थी और मैंने कभी भी अहमद के साथ मिलकर कोई चुदाई-ईवेंट नहीं किया था। इसके अलावा मैं फौज़िया की चूत मारना तो चाहता था मगर शाज़िया से कभी इज़हार नहीं कर सका था। इसलिये हम लोगों ने और ड्रिंक्स लीं और काफी देर बातें करते रहे।

उसके बाद हमने मूवी लगायी और उस में कुछ सैक्सी सीन थे। इन तमाम हालात को देख कर शाज़िया का बहुत दिल चाहा मगर अभी तक वो अहमद से खुली नहीं थी। इसलिये उसने मुझे आँख मारी और सबसे कहा कि उसने बहुत ड्रिंक कर ली है और उसको नींद आ रही है और उसने सोना है। वो उठ कर नशे में लड़खड़ाती एक कमरे में चली गयी। शाज़िया के चले जाने के बाद फौज़िया ने भी सोना चाहा और वो भी नशे में लड़खड़ाती शाज़िया के रूम मैं जाने लगी तो मैंने कहा, फौज़िया साहिबा, आपका दूसरा रूम है। इस पर कुछ शर्मा गयी मगर मुस्कुरा कर दूसरे कमरे में चली गयी।

मेरा और अहमद का दिल तो कर रहा था कि गर्ल फ्रैंड्स को चेंज और शेयर करें लेकिन शायद अभी तक हम में कोई बात थी कि हिम्मत नहीं हो रही थी और फिर हम दोनो कुछ देर गपशप लगा कर अपने अपने कमरे में चले गये।

मेरे रूम में शाज़िया मेरा इंतज़ार कर रही थी और दूसरे रूम में फौज़िया अहमद का इंतज़ार कर रही थी। उसका हाल तो मुझे मालूम ना हो सका लेकिन शाज़िया चुदाई के लिये बेकरार थी। वो पहले ही अपने कपड़े उतार चुकी थी और नशे में बिस्तर पर सिर्फ सैंडल पहने नंगी पड़ी अपनी चूत सहला रही थी। मैंने शाज़िया को बहुत ज़बरदस्त तरीके से छः दफ़ा चोदा और सुबह तक हम लोग मुखतलिफ़ तरीके से एक दूसरे के साथ चुदाई करते रहे।

सुबह होने से कुछ देर पहले मैं उठ कर किचन में पानी पीने आया तो उस दौरान फौज़िया भी किचन में थी और मैंने उसको छेड़ते हुए पूछा कि रात कैसी गुज़री? वो मुस्कुरायी और मुझसे मेरी रात का पूछा। मैंने पहली बार फौज़िया को अपने साथ काफी फ़्री देखा और उसे देख कर ज़ाहिर था कि वो भी शाज़िया की तरह नशे में थी। मैंने उसको बाँहों में लिया और कहा कि मैं तुम्हें भी चोदना चाहता हूँ!

उसने भी यही कहा कि मैं भी तुम्हारे साथ चुदाई करना चाहती हूँ मगर शाज़िया नहीं मानती क्योंकि वो तुमसे प्यार करती है और वो कहती है कि नोमी सिर्फ़ मेरा है! खैर उधर किचन में मैंने उसके साथ कुछ चूमा-चाटी की और कुछ उसके बूब्स दबाये। उसके बाद मैं अपने रूम में आ गया और शाज़िया के साथ एक और दफा चुदाई की। फिर सुबह हो गयी और मैंने पहले की तरह शाज़िया के साथ मिलकर बाथ लिया और फिर वो दोनो लड़कियाँ तैयार हुईं क्योंकि उन्होंने ड्यूटी पर जाना था।

उसके बाद अहमद की कार में हम चारों उनके होस्टल की तरफ़ आये। वहाँ गेट पर पहुँच कर हमने उनको अलविदा किया तो पहली बार शाज़िया के साथ-साथ फौज़िया ने भी मुझे एक किस किया और इसके जवाब में शाज़िया ने भी पहली बार अहमद को किस किया और हमारा थैंक्स किया और कहा कि बहुत मज़ा आया।

उसके बाद अहमद मुझे यूनिट छोड़ने आया और मैं अपनी ड्यूटी में मसरूफ हो गया। खैर दिन गुज़रते रहे और हम लोग उसी तरह अकेले-अकेले चुदाई में मसरूफ थे। मेरे पास अहमद की फ़्लैट की चाबियाँ थीं और मैं अक्सर शाज़िया को वहाँ लेकर जाता और हम दोनों इंजॉय करते। अहमद भी फौज़िया को लेकर जाता और वो भी चुदाई का मज़ा लेते।

मगर अभी तक फौज़िया के साथ सिवाय किसिंग के कुछ नहीं किया और उसकी अज़ीम वजह शाज़िया थी। वो मुझे शेयर करना नहीं चाहती थी। इसमें कोई शक नहीं कि मैं उसको बहुत अच्छा चोदता था और उसको पूरा मज़ा देता था, मगर मैं भी एक मर्द (बेवफ़ा जात) था और हर वक्त ग्रुप सैक्स या फौज़िया की चूत मारने का सोचता था।

एक दिन मैं शाज़िया को लेकर अहमद के फ़्लैट पर गया था और उसके साथ चुदाई कर रहा था। तभी अचानक डोर खुला और अहमद फौज़िया के साथ अंदर दाखिल हुआ। दरसल मैं शाज़िया को टिवी पर मूवी दिखा कर चोद रहा था और मुझे मालूम था कि अहमद नहीं आयेगा। फौज़िया भी अपने रिश्तेदार के घर गयी हुई थी, इसलिये उसका भी अहमद के साथ आने का कोई चाँस ना था। हम लोग शराब पीकर बेफ़िक्र होकर चुदाई में मसरूफ थे और ये सब इतना अचानक हुआ कि मैं और शाज़िया बिल्कुल संभल न सके।

उस दिन पहली बार मुझे फौज़िया ने और शाज़िया को अहमद ने नंगा देखा। मैं थोड़ा सा बौखलाया मगर अहमद मेरा जिगरी दोस्त था। इसलिये हिम्मत कर के मैंने शाज़िया को चोदना ज़ारी रखा। वो दोनों रूम में चले गये। पहले शाज़िया भी कुछ हिचकिचायी मगर अब तो सब कुछ खुल चुका था और फिर वो नशे में भी थी, इसलिये वो भी बेफ़िक्र हो कर चुदवाती रही। उसके बाद मैंने देखा कि बेडरूम का डोर खुला है और फौज़िया भी अहमद के साथ चुदाई स्टार्ट कर चुकी है।

इस तरह हमारा पर्दा खतम हुआ और मैंने पहली बार फौज़िया को पूरा नंगा देखा और वो भी काफी सैक्सी थी। लेकिन उसके बूब्स शाज़िया से छोटे थे, बाकी सब कुछ बहुत आला था, खासकर उसकी गाँड बहुत ही सैक्सी थी। ऊपर से फौज़िया ने उँची हील के सैंडल पहने हुए थे जिससे उसकी गाँड और भी सैक्सी लग रही थी और मेरे लंड पर कहर ढा रही थी। उसके बाद हम चारों नंगे थे और टीवी पर मूवी देखने लगे। शाज़िया मेरे लंड के साथ और फौज़िया अहमद के लंड के साथ खेल रही थी। मैंने शाज़िया से कहा अगर वो बुरा ना माने तो मैं फौज़िया को थोड़ा प्यार करूँ। शाज़िया का दिल तो नहीं चाह रहा था मगर अभी हम इतने खुल चुके थे कि वो इनकार ना कर सकी।

उसके बाद पहली बार मैंने फौज़िया के साथ चुदाई शुरू की। वो भी चुदाई में काफी एक्सपर्ट थी। इसी दौरान अहमद ने भी पहली बार शाज़िया को चूमना शुरू किया। पता नहीं क्यों मुझे अच्छा नहीं लग रहा था जब अहमद उसको किस कर रहा था, लेकिन अभी हम चारों इतने करीब आ गये थे और खुल चुके थे कि और कोई रास्ता नहीं था।

उसके बाद मैं दोबारा गरम हुआ और मैंने फौज़िया को एक ज़बरदस्त तरीके से चोदा। इसके साथ-साथ अहमद ने भी शाज़िया को आला तरीके से चोदा। अहमद का लंड मेरे से कुछ छोटा था, मगर वो भी चोदने में मास्टर था। आखिरकर हमने उस दिन ग्रुप सैक्स कर ही लिया। उस दिन हमने काईं दफा चुदाई की और फिर वापसी की तैयारी करने लगे तो मैंने सबको इकट्ठा करके एक वादा लिया कि हम में कोई बात छुपी नहीं रहेगी और ना कोई दिल में कोई बात रखेगा। जो भी बात होगी वो ओपन करनी होगी, जिसका भी जिसके साथ भी चुदाई करने का दिल चाहेगा वो खुल कर बोलेगा और बगैर किसी जलन के चुदाई करेंगे। मैं जानता था कि अगर ये वादा नहीं लेता तो हमारी दोस्ती और सैक्सी रिलेशन खराब हो सकते थे। मेरी ये बात सुन कर सबने हलफ़ दिया और सब खुश हो गये। लेखक: अंजान

उसके बाद अहमद की कार में हम चारों उनके होस्टल आये, पर फिर अहमद के साथ मैं उसके फ़्लैट आया क्योंकि मेरी मोटर बाइक वहाँ थी। फ्लैट पर आकर मैंने सारी बात साफ़-साफ़ अहमद को बतायी और वादा लिया कि हमारी दोस्ती में कोई फ़रक नहीं आयेगा, और ना हम कोई बात छिपायेंगे। हर बात खोल कर करेंगे।

उसके बाद हमारी ज़िंदगी बहुत ही ज़बरदस्त तरीके से गुज़र रही थी क्योंकि हम चारों बहुत अच्छे और जिगरी दोस्त थे। उसके बाद काफी दफा हमने साथ में ग्रुप सैक्स किया। काफी दफा मैं सिर्फ़ शाज़िया को या सिर्फ़ फौज़िया को फ़्लैट पर लेकर गया। इसी तरह अहमद भी काफी दफा सिर्फ़ शाज़िया को और काफी दफ़ा सिर्फ़ फौज़िया को लेकर फ़्लैट पर गया और हम उन दोनों की चूत की आग बुझाते रहे। अहमद ही शराब और खाने वगैरह का खर्च उठाता था और चूंकि दोनों लड़कियों को रोज़ाना शराब पीने की आदत थी, इसलिये उनकी रोज़ की बोतल भी अहमद ही सपलायी करता था। दिन में या शाम को वो दोनों हमसे चुदवाती थीं और रात में होस्टल में दोनों चुदैलें नशे में चूर होकर लेस्बियन चुदाई करती थीं।

दिसंबर में मेरी यूनिट की एक्सरसाईज़ शुरू हुई और मैं पंद्रह दिनों के लिये बादीन (सिंध) के बोर्डर पर गया, मगर पीछे से अहमद ने बहुत ज़बर्दस्त वक्त उन दोनों चुदैलों को दिया और काफी दफा दोनों को साथ में भी चोदा। मैं एक्सरसाईज़ में उन लोगों को बहुत मिस करता रहा, लेकिन वो लोग मुझे मुसलसल मोबाइल पर फोन करते थे, बल्कि अहमद तो कभी-कभी जब उनकी चूत मारता था तो चुदाई करते-करते मुझे फोन करता और कहता कि ये चुदाई तुम्हारी तरफ़ से हो रही है। अहमद ने बताया कि दोनों लड़कियों के चूत की गर्मी इस हद तक बढ़ गयी है कि कईं बार वो अकेला उनकी तसल्ली नहीं कर पाता था। मैं बेचारा बादीन के रेगिस्तान में अपने टेंट में मुठ मारता था और उन दोनो की चूतों को मिस करता था।

उसके बाद एक मुश्किल वक्त गुज़ार कर मैं ३० दिसंबर को वापस कराची अपनी यूनिट में आया। अगले दिन ३१ दिसंबर थी और हम चारों मिल कर सिनेमा गये और वहाँ पर फ़िल्म देखी। उसके बाद चारों वापस अहमद के फ़्लैट पर आये और खूब शराब पी और ग्रुप सैक्स किया। उस दिन की अहम बात ये थी कि पहली बार हमने शाज़िया और फौज़िया की चूत और गाँड में एक साथ लंड डाला। पहले शाज़िया की गाँड में अहमद ने लंड डाला और मैंने शाज़िया की चूत में लंड डाला। उस दौरान फौज़िया, शाज़िया के बूब्स को चूसती रही। उसके बाद अहमद ने फौज़िया की चूत में लंड डाला और मैं फौज़िया कि गाँड में लंड डालने की तैयारी कर रहा था। मैं तो शाज़िया की पहले भी गाँड मार चुका था इसलिये उसको इतनी मुश्किल नहीं हुई थी मगर बेचारी फौज़िया की गाँड में जब मैं लंड डाल रहा था और अहमद ने चूत में ढकेला तो उसको काफी तकलीफ़ हुई। मगर इस दौरान शाज़िया ने उसकी काफी मदद की और उसकी गाँड के सुराख को चाट कर उस पर अपना थूक लगाया और उसको हौंसला दिया। थोड़ी मुश्किल से लेकिन आखिरकर फौज़िया की गाँड और चूत में हमने अपने लंड एक साथ डाले। शराब के नशे ने भी फौज़िया को दर्द झेलने में मदद की। बाद में उसको भी काफी मज़ा आया और हमने नये साल को एक नये स्टाईल से वेलकम किया। उसके बाद हमने उन दोनों को तोहफे दिये। अहमद ने उन्हें स्कॉच व्हिस्की की चार बोतलें भी तोहफे में दीं तो दोनों बहुत खुश हुईं।

नया साल सुरू हुआ और वो साल पूरा मैंने बहुत इंजॉय किया और हम चारों ने बहुत ही ज़्यादा चुदाई कि। मैंने शाज़िया और फौज़िया को नये-नये तरीकों से चोद और हमने नये-नये स्टाईल से ग्रुप सैक्स किया। मैंने उनको कार में चोदा और काफी जगहों पर कार में सैक्स किया। मेरे पास आर्मी का कार्ड था इसलिये कभी पुलीस का खौफ़ न था। एक दिन मैं कार से बाहर था और अहमद अंदर कार में फौज़िया को चोद रहा था कि एक पुलीस मोबाइल करीब से गुज़री। मेरे साथ शाज़िया थी जोकि बहुत डरती थी मगर मैंने उसको कहा कि हौंसला रखो। जब पुलीस मोबाइल करीब आयी तो दो पुलीस वाले हमारे करीब आये और पूछने लगे हमारे बारे में। मैंने रोब से अपना आर्मी कार्ड निकाल कर दिखाया और कहा, "कैप्टेन नोमान! पाकिस्तान आर्मी स्पेशल ब्राँच।" मेरा रोब देख कर वो डर गये और सर ,सर करने लगे। मैंने इंगलिश में उनसे पूछा, "कैन आई सी योर ड्यूटी पर्मिट? शी इज़ माय वाईफ एंड यू आर नॉट अलाऊड टू आस्क मी।" वो चूँकि सिर्फ़ पैसे लेने के चक्कर में गश्त कर रहे थे, इस पर वो ज़रा डर गये और फौरन वहाँ से गुम हो गये।

अहमद की बात सच थी कि उन दोनों को अकेले एक मर्द पुरी तसल्ली नहीं दे सकता था। जब भी मैं अकेला उन दोनों के साथ चुदाई करता तो वो मिलकर मेरा लंड और मेरी पुरी ताकत निचोड़ लेती थीं। शराब के नशे में तो दोनों शेरनियाँ बन जाती थीं और जंगलीपन से चुदवाती थीं पर मज़ा बहुत आता था। हमारी ज़िंदगी के ना-भूलने वाले दिन गुज़रते रहे लेकिन हर बात का एंड होता है। इस दौरान अहमद का यूके से विज़ा आ गया और वो यूके चला गया। हमने उसकी आखिरी शाम बहुत ही रोमांचक और आला तरीके से पार्टी की। उसका सारा खर्च शाज़िया और फौज़िया ने उठाया। उसके बाद हमने ना भूलने वाला ग्रुप सैक्स अहमद के फ़्लैट पर आखिरी बार किया, जिसको याद करके मैं बहुत तड़पता हूँ। उसके बाद हम सारे अहमद को सी-ऑफ करने कराची एयरपोर्ट आये।

मुझे बहुत दुख हो रहा था लेकिन क्या कर सकता था खैर शाज़िया और फौज़िया भी दोनों काफी उदास थीं क्योंकि हम चारों में चुदाई के साथ-साथ बहुत प्यार हो गया था। खैर हमने कईं तोहफों के साथ अहमद को सी-ऑफ किया। अहमद ने एयरपोर्ट पर बगैर खौफ के शाज़िया और फौज़िया को बहुत किस किया और अलविदा हो गया। एयरपोर्ट से वापस मैं अहमद की कार चला करके ला रहा था और काफी उदास था। फिर मैंने उन दोनों को होस्टल छोड़ा और फिर खुद अपनी यूनिट चला गया। मैं अहमद को बहुत मिस कर रहा था। उसके फ़्लैट की चाबियाँ मेरे पास थी और उसकी कार भी मेरे पास थी लेकिन मैं फिर भी उसको और वो गुज़रे हुए समय को मिस कर रहा था।

उसके बाद तकरीबन पंद्रह दिन मैंने कार इस्तमाल की और शाज़िया और फौज़िया को इकट्ठे लेकर जाता था और दोनों की एक साथ चुदाई करता था। अहमद भी हमारी कंपनी को मिस कर रहा था और मुसलसल मोबाइल पर फोन करता था।

पंद्रह दिनों बाद अहमद के पेरेंट्स कराची अपने फ़्लैट में शिफ़्ट हो गये और मैंने चाबियाँ और कार उनको वापिस कर दीं। अहमद के पेरेंट्स मुझे काफी अच्छी तरह जानते थे और मेरी काफी इज्जत करते थे। मैं भी उनकी काफी इज्जत करता हूँ। अहमद के चले जाने के बाद मैं उनका काफी ख्याल रखता था और वो भी मुझे अपने बेटे की तरह ट्रीट करते थे।

अहमद की फैमली आ जाने के बाद सबसे ज़्यादा मुश्किल मुझे जगह की हुई कि अब चुदाई के लिये कोई जगह नहीं थी। बल्कि मैं रिस्क लेकर शाज़िया और फौज़िया के वार्ड में जाता था और उनके इनकार के बावजूद उनके विज़ीटर रूम के बाथरूम में अपनी लंड की तमन्ना पूरी करता था, मगर मज़ा नहीं आ रहा था क्योंकि वहाँ खतरा काफी होता था, और फिर मैं उनसे पूरी तरह से चुदाई भी नहीं कर सकता था। उन दोनों का तो रात को एक-दूसरे से काम चल ही जाता था। उनको अब मैं आर्मी कोटे से शराब सपलायी करता था जो वो रात को होस्टल में अपने कमरे में पीती थीं और मौज करती थीं। मैं ये भी मिस कर रहा था क्योंकि शराब के नशे में वो बहुत मस्त चुदवाती थीं और इसका मौका अब मुझे नहीं मिलता था।

काफी दिन हो गये थे और हमने इकट्ठे सैक्स नहीं किया। मैंने शाज़िया को कहा कि कुछ करो, या तो अपनी एक साथ एक ही वार्ड में ड्यूटी लगवाओ या कुछ और करो। वो दोनों भी ग्रुप सैक्स चाहती थीं लेकिन कोई रास्ता नहीं निकल रहा था।

आखिरकार उसने एक प्लैन बनाया कि मैं उनके होस्टल में रात को दीवार कूद कर के आऊँ। ये बहुत खतरनाक काम था लेकिन अपने लंड की खुशी के लिये मैं कुछ भी कर सकता था। प्लैन के मुताबिक मैं रात के आठ बजे उनके होस्टल की दीवार के पास पहुँच कर उनको मोबाइल पर काल किया और वो दोनो दीवार के करीब आ गयीं। मैंने दीवार क्रॉस की, ये कोई बड़ी ऊँची दीवार नहीं थी। उसके बाद उन्होंने मुझे एक बड़ा दुपट्टा दिया और मैंने अपने ऊपर डाल लिया। मैं एक फ़िमेल जैसा दिख रहा था और मैं उन दोनों के दरमियान चल रहा था और दूर से कोई भी पहचान नहीं सकता था। उनके साथ चलते-चलते मैं उनके ब्लॉक में आया, और फिर सीढ़ियाँ चढ़ कर हम उनके रूम में आ गये। वहाँ पहुँचा तो मेरा साँस फुला हुआ था क्योंकि ये काफी खतरनाक काम था।

रूम में आकर मैंने सकून का साँस लिया और अभी बैठा ही था कि डोर पर नॉक हुई। मैं घबराया मगर उन्होंने जल्दी से मुझे स्टोर में छिपा दिया और डोर ओपन किया तो उनकी एक दूसरी फ्रैंड कुछ माँगने आयी थी। खैर जल्दी ही वो चली गयी और मैं फिर स्टोर से बाहर निकल आया। शाज़िया और फौज़िया ने मेरे लिये काफी खातिर किया हुआ था। व्हिस्की के साथ काजू, कबाब वगैरह का इंतज़ाम था। दोनों ने काफी बनाव-सिंगार किया हुआ था। शाज़िया ने गुलाबी रंग का शलवार-कमीज़ पहना था और उसके पैरों में बहुत ही सैक्सी सफ़ेद रंग के हाई-हील सैंडल थे। फौज़िया ने सफ़ेद रंग का प्रिंटेड सलवार-कमीज़ पहना था जिस पर कई रंगों के फूल बने हुए थे और शाज़िया जैसे ही पर काले रंग के सैंडल पहने हुए थे।

उसके बाद हमारा प्रोग्रम स्टार्ट हुआ। पहले हमने कबाब खाये और साथ में व्हिस्की का मज़ा लिया। उन दोनों ने भी जी भर कर शराब पी और कुछ ही देर में वो दोनों झूम रही थीं। मैंने अपने ऊपर कंट्रोल रखा क्योंकि मैं ज्यादा पी कर धुत्त नहीं होना चाहता था। उन दोनों को एक साथ चोदना इतना आसान नहीं था। मैंने बारी-बारी से दोनो को चूमा। उसके बाद एक मेरा लंड चूस रही थी और मैं एक की चूत चाट रहा था। उसके बाद बारी-बारी उनकी चूत की आग भुजायी। मैं सुबह सहर के वक्त तक उनके रूम में था और उनको अलग-अलग स्टाईल से चोदता रहा। उन्होंने काफी इंजॉय किया और मैंने भी उनके रूम में पहली बार उनकी चूत और गाँड का मज़ा लिया। वो मुझसे तब तक चुदवाती रहीं जब तक मेरे लंड में बिल्कुल भी जान बाकी नहीं रही। तकरीबन सुबह पाँच बजे मैं अकेला ही दुपट्टे में छुप कर दीवार तक गया। वो दोनों आना तो साथ चाहती थीं पर नशे में वो ठीक से चलने के काबिल नहीं थीं। मैंने दीवार क्रॉस की और अपनी मोटर-बाईक जो करीब ही पार्किंग में थी, स्टार्ट की और यूनिट में आ गया।

ये भी मेरी ज़िंदगी के ना-भूलने वाले सीन थे क्योंकि खतरे में चूत मारने और उन दोनों के साथ चुदाई करने का और ही मज़ा था। खैर मेरी ज़िंदगी बहुत ही सेटिसफाईड और मज़े में उन दो चूतों और उनकी गाँडों के मारने में गुज़र रही थी। उन दोनो को भी मालूम था कि मैं कहीं और नहीं जाता बल्कि सिर्फ़ उनकी चूत और गाँड मारता हूँ। इसमें कोई शक नहीं कि मैंने वो पूरा अर्सा उनके अलावा कहीं कोई और चूत नहीं चोदी क्योंकि उन्होंने इतना सेटिसफाईड रखा था कि कभी कहीं और चुदाई करने के लिये लंड में ताकत ही नहीं रहती थी। इसके अलावा मैं उनके साथ बहुत खुश रहता था। मेरी ज़िंदगी के रूटीन में शामिल हो गया था कि मैं अक्सर उनमें से एक को या दोनों को डेट पर लेकर जाता था। इसके अलावा महीने में एक या दो बार रिस्क लेकर उसी तरह उनके रूम में जाता और एक साथ उन दोनों की चुदाई करता था।

इस तरह दो साल तक मैंने अपनी ज़िंदगी में चुदाई का भरपूर मज़ा लिया और ना-भूलने वाली यादें कायम कीं। मगर फिर शायद चुदाई के दिन पूरे हो गये या किस्मत की खराबी हुई कि मेरी पोस्टिंग का ऑर्डर आ गया। लेखक: अंजान

मुझे आज भी वो रात याद है जब मैं अपने मूव होने से एक रात पहले शाज़िया और फौज़िया के रूम में उनको चोद रहा था और बहुत उदास था क्योंकि एक दिन बाद मैंने चले जाना था। उस दिन मैंने जी भर कर दोनों को चोद और उनकी गाँड मारी मगर इंसान का जी नहीं भरता और मैं इसलिये परेशान था कि फिर पता नहीं ऐसी चूतें नसीब होती हैं कि नहीं।

यह एक बात बहुत दिलचस्प थी कि वो दोनों मेरे साथ शादी के लिये भी तैयार हो गयी थीं। उन्होंने मुझे प्रपोज़ल दिया कि हम दोनों से शादी करलो, हम साथ साथ रहेंगे। मगर एक तो मेरी फैमली कभी भी नर्स के साथ शादी नहीं मानती और ऊपर से उनके साथ दोस्ती और चुदाई की जा सकती थी, उनको वाईफ नहीं बनाया जा सकता था। उनकी ज़िंदगी में शराब, ऐय्याशी और चुदाई इतनी लाज़िम हो गयी थी कि मेरी शादी के बाद मेरे बैटमैन या मेरे दोस्तों से चुदवाये बिना नहीं रहतीं और मैं अहमद को तो बरदाश्त कर सकता था मगर किसी और को नहीं। दुसरी बात ये कि कभी-कभी तो दोनों को एक साथ चोदने में मज़ा था पर हर रोज़ दोनों को एक साथ चोदना पड़ता तो कुछ ही महीनों में वो दोनों मिलकर मुझे निचोड़ कर मेरी जान निकाल देतीं।

आखिरकार लतदाद यादें उनके पास छोड़ कर स्करदू के लिये पोस्टिंग पर रवाना हुआ। उस दिन वो दोनों मुझे कराची कैंट स्टेशन सी-ऑफ करने आयी हुई थी। मैंने उनको अपने केबिन में बहुत प्यार किया और दोनों को बहुत किस किया। फिर उनको उदास छोड़ कर मैं चला गया। यहाँ स्करदू में पहुँच कर मैं एक महिना बेस कैंप में रहा और उनसे फोन और खतों के ज़रिये कांटेक्ट रहा। जैसा मेरा अंदाज़ा था दोनों धीरे-धीरे पहले जैसे ही अपने रूटिन में मस्त हो गयी। अब वो बेखौफ होकर दिन में जहाँ कहीं भी और जिस किसी के साथ भी मौका मिलता चुदवा लेती थीं, फिर चाहे वो ज़मादार हो या वार्ड-बॉय हो या कोई और। रात भर तो दोनों नशे में चूर होकर एक दूसरे से लेस्बियन सैक्स का मज़ा लेती थीं। मैं स्करदू की बर्फ़ीली पहाड़ियों पर हूँ और काफी समय हो गया है उन दोनो से कोई कांटेक्ट नहीं है, लेकिन इतना भरोसा है कि उन दोनों की चूतें बाकायदा चुद रही होंगी।

!!! समाप्त !!!


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