किरन की कहानी
लेखिका: किरन अहमद


मेरा नाम किरन अहमद है और मैं ये कहानी अक्टूबर २००२ में लिख रही हूँ। मेरी उम्र सत्ताईस साल की है। गोरा चिट्टा रंग और पाँच फुट - तीन इंच की नॉर्मल हाईट। छरहरा जिस्म, चौंतीस डी - तीस - छत्तीस का मेरा फिगर है। लोग और मेरी सहेलियाँ कहती हैं कि मैं खूबसूरत हूँ। मेरी शादी को तकरीबन आठ महीने हुए हैं। शौहर के साथ सुहाग रात और बाकी की सैक्स लाईफ कैसे गुज़र रही है वो तो मैं आप को बताऊँगी ही लेकिन मैं आपको उस से पहले की कुछ और वाक़ये सुनाने जा रही हूँ।

मैं उस वक्त इंटर के दूसरे साल (बारहवीं) के इग्ज़ैम दे रही थी। उम्र होगी कोई सत्रह-अठारह साल के करीब। मेरे फायनल इग्ज़ैम से पहले प्रिप्रेटरी इग्ज़ैम होने वाले थे। जनवरी का महीना था बे-इंतहा सर्दी पड़ रही थी। मैं दो-दो रज़ाई ओढ़ के पढ़ रही थी।

उन दिनों, मेरे एक कज़न सुहैल जिनकी उम्र होगी कोई चौबीस-पच्चीस साल की, उन्होंने अपने शहर में कोई नया नया बिज़नेस शुरू किया हुआ था, तो वो कुछ खरिदारी के लिये यहाँ आये हुए थे और हमारे घर में ही ठहरे थे। हमारा घर एक डबल स्टोरी घर है, ऊपर सिर्फ़ एक मेरा रूम और दूसरा स्टोर रूम है जिस में हमारे घर के स्पेयर बेड, ब्लैंकेट्स, बेड-शीट्स वगैरह रखे रहते हैं। जब उनकी ज़रूरत होती है तो निकाले जाते हैं मौसम के हिसाब से। और एक दूसरा रूम जिस में मैं अकेली रहती हूँ और अपनी पढ़ाई किया करती हूँ। मेरा रूम बहुत बड़ा भी नहीं और बिल्कुल छोटा भी नहीं, बस मीडियम साईज़ का रूम था जिस में मेरा एक बेड पड़ा हुआ था। वो डबल बेड भी नहीं और सिंगल बेड भी नहीं बल्कि डबल से थोड़ा छोटा और सिंगल से थोड़ा बड़ा बेड था। इतना बड़ा तो था ही कि जब कभी-कभी मेरी फ्रैंड रात में मेरे साथ पढ़ने के लिये आती और रात में रुक जाती तो हम दोनों इतमिनान से सो सकते थे। और रूम में एक पढ़ाई की टेबल और चेयर रखी थी। एक मेरी कपबोर्ड और एक मीडियम साईज़ का अटैच्ड बाथरूम था जिस में वाशिंग मशीन भी रखी हुई थी। घर में नीचे तीन कमरे थे। एक मम्मी और डैडी का बड़ा सा बेडरूम, दूसरा एक बड़ा हाल जैसा ड्राईंग रूम जिसके एक कॉर्नर में डायनिंग टेबल भी पड़ी हुई थी। ये ड्राईंग कम डायनिंग रूम था और एक स्पेयर रूम किसी भी गेस्ट वगैरह के लिये था जिस में सुहैल को ठहराया गया था।

हाँ तो, मैं पढ़ाई में बिज़ी थी। सर्दी जम के पड़ रही थी। मैं अपना लिहाफ ओढ़े बेड पे बैठे पढ़ रही थी। बॉयलोजी का सब्जेक्ट था और मैं एक ज़ूलोजी की बुक पढ़ रही थी। इत्तेफाक से मैं रीप्रोडक्टिव सिस्टम ही पढ़ रही थी जिस में मेल और फीमेल ऑर्गन्स की डीटेल्स के साथ ट्रांसवर्स सेक्शन की फिगर बनी हुई थी। रात काफी हो चुकी थी और मैं अपनी पढ़ाई को फायनल टचेज़ दे रही थी। नोट्स के लिये कुछ फिगर्स देख के बनाये हुए थे और उस में ही कलरिंग कर रही थी और साथ में लेबलिंग कर रही थी।

रात के शायद ग्यारह बजे होंगे पर सर्दी होने की वजह से सब जल्दी ही सो गये थे जिससे लगाता था कि पता नहीं कितनी रात बीत चुकी हो। घर में मेरी मम्मी और डैडी नीचे ही रहते थे और डिनर के बाद अपनी दवाइयाँ खा के अपने रूम में जा के सो चुके थे। अचानक सुहैल मेरे कमरे में अंदर आ गये। मैं देख के हैरान रह गयी और पूछा कि, क्या बात है?

तो उसने बताया कि नींद नहीं आ रही थी और तुम्हारे रूम की लाईट्स जलती देखी तो ऐसे ही चला आया कि देखूँ तो सही कि तुम सच में अपनी पढ़ाई कर रही हो (एक आँख बंद कर के) या कुछ और।

मैंने कहा कि देख लो! अपने कोर्स का ही पढ़ रही हूँ, मेरे एक्ज़ाम्स हैं और मैं कोई खेल तमाशा नहीं कर रही हूँ।

उसने कहा कि लाओ देखूँ तो सही के तुम क्या पड़ रही हो, और मेरे नोट्स और रिकोर्ड बुक अपने हाथ में लेकर देखने लगा। सर्दी के मारे उसका भी बुरा हाल हो गया तो वो भी मेरे साथ ही लिहाफ के अंदर घुस आया और मेरे बगल में बैठ गया।

रिकॉर्ड बुक के शुरू में तो मायक्रोस्कोप की फिगर थी और फिर सेल का डायग्राम था। उसके बाद ऐसे हो छोटे मोटे डायग्राम और फिर फायनली उसने वो पेज खोल लिया जिस में मैंने मेल और फीमेल के रीप्रोडक्टिव सिस्टम का डायग्राम बनाया हुआ था। उसने मेरी तरफ़ मुस्कुरा के देखा और बोला कि, क्या ये भी तुम्हारे कोर्स में है?

मैंने कहा, हाँ! तो उसने कहा कि, अच्छा! मुझे भी तो समझाओ कि ये सिस्टम कैसे वर्क करता है।

मैं शरम से पानी-पानी हुई जा रही थी। मैंने कहा कि, मुझे नहीं पता, तुम खुद भी तो सायंस के स्टूडेंट थे, अपने आप ही पढ़ लो और समझ लो।

उसने फिर से पूछा कि, तुम्हारी समझ में नहीं आया क्या ये सिस्टम? तो मैंने कहा कि, नहीं!

उसने फिर पूछा कि मैं समझा दूँ? तो मेरे मुँह से अंजाने में "हूँ" निकल गया। उसने कहा, ठीक है, मैं समझाता हूँ, और मेरी बुक और मेरी रिकोर्ड बुक को खोल के पकड़ लिया।

हम दोनों बगल बगल में बैठे थे। मैं घुटने मोड़ के बैठी थी और वो पालती मार के बैठा था। अब उसने मुझे समझाना शुरू किया कि, ये है फीमेल का रीप्रोडक्टिव ऑर्गन, इसे ईंगलिश में वैजायना, पूसी या कंट कहते हैं और हिंदी में चूत कहते हैं।

मैं शरम के मारे एक दम से लाल हो गयी पर कुछ कहा नहीं। फिर उसने डिटेल में बताना शुरू किया कि, ये है लेबिया मजोरा जिसे पूसी के लिप्स कहते हैं और ये उसके अंदर लेबिया मायनोरा.... ये डार्क पिंक कलर का या लाल कलर का होता है और ये उसके ऊपर जो छोटा सा बटन जैसा बना हुआ है वो क्लिटोरिस या हिंदी में घुंडी या चूत का दाना भी कहते हैं और जब इसको धीरे-धीरे से रगड़ा जाता है या मसाज किया जाता है तो ये जो चूत का सुराख नज़र आ रहा है, इस में से पानी निकलना शुरू हो जाता है। या फिर अगर लड़की बहुत ही एक्साईटेड हो जाती है तो ये निकलने वाले जूस से चूत गीली हो जाती है जो कि रिप्रोडक्शन के इनिश्यल काम को आसान बना देती है।

इतना सुनना था कि मेरी चूत में से समंदर जितना जूस निकलने लगा और चूत भर गयी।

अब ये देखो दूसरी फिगर, ये मेल रीप्रोडक्टिव ऑर्गन है। इसे ईंगलिश में पेनिस या कॉक कहते हैं और हिंदी में लंड या लौड़ा कहते हैं। ये नॉर्मल हालत में ऐसे ही ढीला पड़ा रहता है जैसे कि पहली पिक्चर में है। और जब ये बेहद एक्साईटेड हो जाता है तो ये दूसरी फिगर की तरह खड़ा हो जाता है। ये पेनिस के अंदर जो ब्लड वैसल्स हैं, इन में लहू का बहाव बढ़ जाता है और उसकी वजह से मसल अकड़ के लंड लंबा मोटा और सख्त हो जाता है, और उसने मेरा हाथ पकड़ के अपने अकड़े हुए लंड पे रख दिया और कहा, ऐसे!

अब मेरी साँसें तेज़ी से चलने लगी थी और जिस्म में इतनी गर्मी आ गयी थी कि मुझे लग रहा था मानो मेरा जिस्म किसी आग में जल रहा हो। और ये देखो! उसने मेरा हाथ लंड के नीचे किया और कहा, इसके नीचे जो ये दो बॉल्स दिखायी दे रहे हैं, इन्हें ईंगलिश में टेस्टीकल्स या स्कोरटम और हिंदी में आँडे भी कहते हैं। ये असल में स्पर्म बनने की फ़ैक्ट्री है जहाँ स्पर्म बनते हैं। ये स्पर्म जब मेल के ऑर्गन से ट्राँसफर हो के फीमेल के ऑर्गन में जाता है तो बच्चा पैदा होता है।

मेरा तो मानो बुरा हाल हो गया था। कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूँ और सुहैल था के बस एक प्रोफेसर की तरह से लेक्चर दिये जा रहा था। मैं अंजाने में उसका तना हुआ लंड अपने हाथ में पकड़े बैठी थी। मुझे इतना होश भी नहीं था कि मैं अपना हाथ उसके लंड पे से हटा लूँ।

जब मेल का ये इरेक्ट लंड फीमेल की चूत के अंदर जाता है और चुदाई करते-करते जब एक्साइटमेंट और मज़ा बढ़ जाता है तो अपना स्पर्म चूत के अंदर ये जो बच्चे दानी दिख रही है, उसके मुँह पे छोड़ देता है जिससे स्पर्म बच्चे दानी के खुले मुँह के अंदर चला जाता है और बच्चा पैदा होता है।

मुझे पता ही नहीं चला के उसका एक हाथ तो मेरी चूत पे है जिसका वो मसाज कर रहा है और मेरा हाथ उसके लंड को पकड़े हुए था और मैं अंजाने में उसके मोटे लंड को दबा रही थी। ये पहला मौका था कि मैंने किसी के लंड को अपने हाथों में पकड़ा हो। उसने फिर कहा कि देखो कैसी गीली हो गयी है तुम्हारी चूत, ऐसे ही हो जाती है एक्साइटमेंट के टाईम पे।

तब मुझे एहसास हुआ कि ये मैं क्या कर रही हूँ और एक दम से अपना हाथ उसके लंड पे से खींच लिया। लेकिन उसने अपने हाथ मेरी चूत पे से नहीं हटाया। मेरी नाइटी में हाथ डाले हुए ही था और मेरी चूत का मसाज करता ही जा रहा था जिससे मेरी चूत बहुत गीली हो चुकी थी।

सुहैल हंसने लगा और बोला के डरती क्यों हो, मैं तो तुम्हें थियोरी के साथ प्रैक्टीकल भी बता रहा था ताकि तुम अच्छी तरह से समझ सको।

बस इतना कहा उसने और बिजली चली गयी और बल्ब बुझ गया और कमरे में अंधेरा छा गया। मैं तो बेतहाशा गरम और गीली हो चुकी थी। साँसें तेज़ी से चल रही थी, दिमाग और जिस्म में सनसनाहट दौड़ रही थी। ब्लड सरक्यूलेशन सौ गुना बढ़ चुका था, चेहरा लाल हो गया था और मैं गहरी-गहरी साँस ले रही थी। उसने मुझे धीरे से पुश किया और मैं बेड पे सीधे लेट गयी। वो मेरी साईड में था और उसका हाथ अभी भी मेरी चूत पे था। मुझे इतना होश भी नहीं था के मैं उसका हाथ पकड़ के हटा दूँ। बस ऐसे ही चित्त लेटी रही और अंजाने में मेरी टाँगें भी खुल गयी थी और वो मेरी चूत का अच्छी तरह से मसाज कर रहा था। मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था। अब उसने फिर मेरा हाथ पकड़ के अपने अकड़े हुए लंड पे रख दिया और मेरे हाथ को अपने हाथों से ऐसे दबाया जैसे मैं उसका लंड दबा रही हूँ। बहुत मोटा, सख्त और गरम था उसका लंड। उसने इलास्टिक वाला जॉगिंग पैंट पहना था जिसको उसने अपने घुटनों तक खिसका दिया था और मेरे हाथ में अपना लंड थमा दिया था और मैंने हमेशा की तरह बिना पैंटी और बिना ब्रेज़ियर के नाइटी पहनी थी। मुझे क्या मालूम था कि ऐसे होने वाला है। मैं तो रोज़ रात को सोने के टाईम पे अपनी पैंटी और ब्रेज़ियर निकाल के ही सोती थी।

उसका हाथ मेरे सर के नीचे था। उसने दूसरे हाथ से मुझे अपनी तरफ़ करवट दिला दी। अब हम दोनों एक दूसरे की तरफ़ मुँह करके करवट से लेटे थे। उसने मुझे किस करना शुरू किया तो मेरा मुँह अपने आप खुल गया और जल्द ही उसकी ज़ुबान मेरे मुँह के अंदर घुस चुकी थी और मैं उसकी ज़ुबान को ऐसे एक्सपर्ट की तरह चूस रही थी जैसे मैं फ्रेंच किसिंग में कोई एक्सपर्ट हूँ। हालांकि ये मेरी ज़िंदगी का पहला टंग सकिंग फ्रेंच किस था। मेरे जिस्म में तो जैसे हल्के-हल्के इलेक्ट्रिक शॉक्स जैसे लग रहे थे।

मैं सुहैल के राइट साईड पे थी और वो मेरे लेफ़्ट साईड पे। अब उसने अपने पैरों को चलाते हुए अपनी जॉगिंग पैंट भी निकाल दी और अपनी टी-शर्ट भी। वो पूरा का पूरा नंगा हो गया था। उसके सीने के बाल मेरी नाइटी के ऊपर से ही मेरे बूब्स पे लग रहे थे और मेरे निप्पल खड़े हो गये थे। सुहैल ने मेरी राइट लेग को उठा के अपने लेफ़्ट जाँघ पे रख लिया। ऐसा करने से मेरी नाइटी थोड़ी सी ऊपर उठ गयी तो उसने मेरी जाँघों पे हाथ फेरते-फेरते नाइटी को ऊपर उठाना शुरू किया और मेरी मदद से पूरी नाइटी निकाल दी। मैं एक दम से अपने होश-ओ-हवास खो चुकी थी और वो जैसे कर रहा था, करने दे रही थी और पूरा मज़ा ले रही थी।

हम दोनों एक दूसरे की तरफ़ करवट लिये लेटे थे और मेरी एक टाँग उसकी जाँघ पे थी और अब उसने मेरे बूब्स को मसलना शुरू कर दिया और फिर उन्हें मुँह मे लेकर चूसने लगा। बूब्स को मुँह में लेते ही मेरे जिस्म में इलेक्ट्रिक करंट दौड़ गया तो मैंने उसका लंड छोड़ के उसका सर पकड़ के अपने सीने में घुसा दिया। वो ज़ोर-ज़ोर से मेरी चूचियों को चूस रहा था और उसका लंड जोश में हिल रहा था। लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के लिप्स को छू रहा था। लंड के सुराख में से प्री-कम भी निकल रहा था।

उसने मेरा हाथ अपने सर से हटाया और फिर से अपने लंड पे रख दिया और मैं खुद-ब-खुद ही उसको दबाने लगी और वो मेरी चूत का ऊपर से नीचे मसाज करने लगा। कभी चूत के सुराख में धीरे से उंगली डाल देता और कभी चूत के लिप्स के अंदर ही ऊपर से नीचे और जब कभी मेरी क्लीटोरिस को मसल देता तो मैं जोश में पागल हो जाती। मेरी एक टाँग उसकी जाँघों पे रखे रहने की वजह से मेरी चूत थोड़ी सी खुल गयी थी और लंड का सुपाड़ा चूत से छू रहा था तो मैंने उसके लंड को पकड़े-पकड़े अपनी चूत के अंदर रगड़ना शुरू कर दिया। मैं मस्ती से पागल हुई जा रही थी। मुझे लग रहा था जैसे मेरे अंदर कोई लावा उबल रहा है जो बाहर आने को बेचैन है। इसी तरह से मैं उसके लंड को अपनी चूत में रगड़ती रही और लंड में से निक्ल हुआ प्री-कम और मेरी चूत का बहता हुआ जूस मिल के चूत को और ज़्यादा स्लिपरी बना रहे थे और मेरा मस्ती के मारे बुरा हाल हो चुका था। अब मैं चाह रही थी के ये लंड मेरी चूत के अंदर घुस जाये और मुझे चोद डाले।

सुहैल ने मुझे फिर से चित्त लिटा दिया और मेरी टाँगों को खोल के बीच में आ गया और मेरी बे-इंतहा गीली चूत को किस किया तो मैंने अपने चूतड़ उठा के उसके मुँह में अपनी चूत को घुसेड़ना शुरू कर दिया। मेरी आँखें बंद हो गयी थी और मज़े का आलम तो बस ना पूछो। इतना मज़ा आ रहा था जिसको लिखना मुश्किल है। उसका मुँह मेरी चूत पे लगते ही मेरी टाँगें खुद-ब-खुद ऊपर उठ गयी और उसकी गर्दन पे कैंची की तरह लिपट गयी और मैं उसके सर को अपनी टाँगों से अपनी चूत के अंदर घुसेड़ रही थी और मुझे ऐसे लग रहा था जैसे मेरे अंदर उबलता हुआ लावा अब बाहर निकलने को बेचैन है। मेरी आँखें बंद हो गयी और उसकी ज़ुबान मेरी क्लीटोरिस को लगते ही मेरे जिस्म में सनसनी सी फैल गयी और मेरे मुँह से एक ज़ोर की सिसकरी निकली, आआआआहहहह सससस, और मेरी चूत में से गरम-गरम लावा निकलने लगा और पता नहीं कितनी देर तक निकलता रहा। जब मेरा दिमाग ठिकाने पे आया तब देखा कि सुहैल अभी भी मेरी चूत में अपनी ज़ुबान घुसेड़ के चाट रहा है और पूरी चूत को अपने मुँह में लेकर दाँतों से काट रहा है और मेरी चूत में फिर से आग लगने लगी। मैं सोच रही थी के बस अब सुहैल मेरी चुदाई कर दे लेकिन उस से बोलने में शरम भी आ रही थी। बस इंतज़ार ही करती रही कि कब ये मुझे चोदेगा।

सुहैल के हाथ मेरी गाँड के नीचे थे और वो मेरे चूतड़ों को उठा के चूत को चूस रहा था। मैं अपने चूतड़ों को उछाल-उछाल के अपनी चूत सुहैल के मुँह से रगड़ रही थी। चूत में फिर से गुदगुदी शुरू हो गयी थी। चूत बे इंतहा गीली हो चुकी थी और मस्ती में मेरी आँखें बंद थी और मैं सुहैल का सर पकड़े हुए अपनी चूत में घुसेड़ रही थी। अब शायद सुहैल से भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो वो अपनी जगह से उठा और मेरी टाँगों के बीच में बैठ गया और अपने लौड़े को अपने हाथ से पकड़ के उसके सुपाड़े को मेरी गीली और गरम जलती हुई चूत के अंदर, ऊपर से नीचे कर रहा था। मेरी टाँगें मुड़ी हुई थी। मुझसे भी अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो मैंने अपना हाथ बढ़ा के सुहैल का लोहे जैसा सख्त और मोटा तगड़ा लंड अपने हाथों से पकड़ के अपनी ही चूत में घिसना शुरू कर दिया। उसके लंड में से निकलते हुए प्री-कम से उसका लंड चूत के अंदर स्लिप हो रहा था और जब उसके लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के सुराख पे लगाता तो मेरे मुँह से मज़े की एक सिसकरी निकल जाती।

सुहैल अब मेरे ऊपर मुड़ गया और मेरे मुँह में अपनी ज़ुबान को घुसेड़ के फ्रेंच किस कर रहा था और मैं उसके लंड को अपनी चूत में घिस्स रही थी। मेरी टाँगें सुहैल की कमर पे लपटी हुई थी और सुहैल का लंड मेरी चूत के लिप्स के बीच में सैंडविच बना हुआ था। उसने अपने लंड को चूत के लिप्स के बीच में से ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया। चूत बहुत ही स्लिपरी हो गयी थी और ऐसे ही ऊपर नीचे करते-करते उसके लंड का मोटा सुपाड़ा मेरी छोटी सी चूत के सुराख में अटक गया और मेरा मुँह एक्साइटमेंट में खुला रह गया। उसने अपना लंड थोड़ा सा और पुश किया तो उसके लंड का सुपाड़ा पूरा चूत के अंदर घुस गया और मुझे लगा जैसे मेरी अंदर की साँस अंदर और बाहर की साँस बाहर रह गयी हो। मेरे मुँह से हल्की सी चींख, ऊऊऊईईई निकल गयी और मैंने अपने दाँत ज़ोर से बंद कर लिये।

उसने सुपाड़े को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया तो मेरी चूत में एक अजीब सा मज़ा महसूस होने लगा और मैंने अपने दोनों हाथ बढ़ा कर सुहैल को अपनी बांहों में ज़ोर से जकड़ लिया। सुहैल ने लंड को थोड़ा और अंदर घुसेड़ा तो मेरी चूत का सुराख जैसे बड़ा होने लगा और मुझे तकलीफ होने लगी। मैंने कहा कि सुहैल, दर्द हो रहा है अब और अंदर मत डालो प्लीज़, तो उसने कहा अरे पगली... अभी तो थोड़ा सा भी अंदर नहीं गया और कहा कि अभी तुमको मज़ा आयेगा, थोड़ा वेट करो, और फिर वो मेरी चूचियों को चूसने लगा तो मेरे जिस्म में फिर से सनसनी सी फैलनी शुरू हो गयी और मैं उसकी कमर पे अपने हाथ फिराने लगी।

सुहैल अपने लंड के सुपाड़े को मेरी छोटी सी टाइट चूत के अंदर बाहर करने लगा। मेरी चूत में से जूस निकलने की वजह से उसके लंड का टोपा अब अंदर-बाहर स्लिप हो रहा था। ऐसे ही करते-करते उसने अपने लंड को बाहर निकाला और एक झटका मारा तो उसका लोहे जैसा सख्त लंड मेरी चूत के अंदर आधा घुस गया और मेरे मुँह से चींख निकल गयी, उउउउउउहहहह ईईईईईईई।

लंड अब आधा अंदर घुस चुका था और मेरी चूत के अंदर जलन शुरू हो गयी। मैं उस से ज़ोर से लिपट गयी। सारा जिस्म अकड़ गया तो सुहैल ने धक्के मारना बंद कर दिया और मेरी चूचियों को चूसने लगा। थोड़ी देर में ही फिर से मुझे अच्छा लगने लगा और मेरी ग्रिप सुहैल पे थोड़ी ढीली हो गयी। उसने अपना लंड मेरी चूत के अंदर ऐसे हो छोड़ दिया और चूचियों को चूसने लगा। मुझे फिर से मज़ा आने लगा और उसका आधा घुसा हुआ लंड अच्छा लगने लगा।

जब उसने देखा के मेरी चूत ने उसके मोटे लंड को अपनी छोटे से सुराख में एडजस्ट कर लिया है तो उसने अपना लंड धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया जिससे मुझे बहुत मज़ा आने लगा। मेरी चूत में से जूस लगातार निकलने लगा जिससे मेरी चूत बहुत ही गीली हो चुकी थी। अब सुहैल ने अपने हाथ मेरी बगल से निकाल के मेरे कंधों को पकड़ लिया और मुझे फ्रेंच किस करने लगा। पोज़िशन ऐसी थी कि दोनों के जिस्म के बीच में मेरे बूब्स चिपक गये थे। सुहैल मुझ पे झुका हुआ था और उसका लंड मेरी चूत में आधा घुसा हुआ था। सुहैल ने धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर कर के मेरी चुदाई शुरू की और मैं मज़े से पागल होने लगी। मेरी चूत में उसका मोटा लंड फँसा हुआ था और अंदर-बाहर हो रहा था। मुझे फिर से लगने लगा के मेरी चूत के काफी अंदर कोई लावा जैसा उबल रहा है और बाहर निकलने को बेचैन है। उतने में ही सुहैल ने अपने लंड को मेरी चूत से पूरा बाहर निकाल लिया तो मुझे अपनी चूत खाली-खाली लगने लगी और फिर देखते ही देखते उसने इतनी ज़ोर का झटका मारा और मेरे मुँह से चींख निकल पड़ी, ऊऊऊऊईईईईईई अल्लाह...आआआआआ ऊऊऊफफफ निकाल लो बाहर!! मार डाला..... ऊऊऊईईईई, और मुझे लगा जैसे मेरे जिस्म को चीरता हुआ कोई मोटा सा लोहे का सख्त डंडा मेरी चूत के रासते मेरी टाँगों के बीच में घुस गया हो और मैं सुहैल से लिपट गयी उसको ज़ोर से पकड़ लिया और फिर एक दम से टोटल ब्लैक ऑऊट! शायद मैं एक लम्हे के लिये बे-होश हो गयी। कमरे में तो पहले से ही अंधेरा था। मुझे कुछ नज़र ही नहीं आ रहा था और फिर अचानक ऐसे चूत फाड़ झटके से तो मैं एक दम से बेहोश हो गयी। मुझे लगा जैसे सारा कमरा मेरे आगे घूम रहा हो। मुँह खुला का खुला रह गया था और आँखें बाहर निकल आयी थी और आँखों में से पानी निकल रहा था। मेरा मुँह तकलीफ के मारे खुल गया था। लगाता था जिस्म में खून ही नहीं हो और दिमाग काम नहीं कर रहा था।

पता नहीं मैं कितनी देर उसको ज़ोर से चिपकी रही और कितनी देर तक बेहोश रही। जब होश आया तो देखा कि वो अपने लंड से मेरी फटी चूत को चोद रहा है उसका लंड अंदर-बाहर हो रहा है और मेरी चूत में जलन से जैसे आग लगी हुई हो। मेरी मुँह से ऊऊऊऊईईईईई आआआआहहहह औंऔंऔंऔं आआआईईईई जैसी आवाज़ें निकल रही थी लेकिन सुहैल था कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। लगाता था जैसे पागल हो गया हो। ज़ोर-ज़ोर से चुदाई कर रहा था और मेरी फटी चूत में दर्द हो रहा था। मेरा जो लावा निकलने को बेताब था पता नहीं वो कहाँ चला गया था और मुझे बे-इंतहा दर्द हो रहा था। लगाता था जैसे कोई छूरी से मेरी चूत को काट रहा हो। चूत के अंदर बे-इंतहा जलन और दर्द हो रहा था।

सुहैल मुझे चोदे ही जा रहा था। अंधेरे में उसे पता भी तो नहीं चल रहा था कि मैं कितनी तकलीफ में हूँ। मैं उसके जिस्म से चिपकी हुई थी और उसके झटकों से मेरे बूब्स आगे पीछे हो रहे थे। थोड़ी ही देर में जब मेरी चूत उसके मोटे लंड को अपने छोटे से सुराख में एडजस्ट कर चुकी तो मुझे भी मज़ा आने लगा और मेरी ग्रिप उस पे से ढीली पड़ गयी और वो अब दनादन चोद रहा था। उसका लंड अंदर-बाहर हो रहा था और मुझे बेहद मज़ा आ रहा था, ऐसा मज़ा जो कभी सारी ज़िंदगी नहीं आया था। उसके हाथ अभी भी मेरे कंधों को पकड़े हुए थे और वो अपनी गाँड उठा-उठा के लंड को पूरा सिरे तक बाहर निकलता और जोर के झटके से चूत के अंदर घुसेड़ देता। उसके चोदने की स्पीड बढ़ गयी थी और अब मेरा लावा जो पता नहीं कब से निकलने को बेताब था, मुझे लगा कि अब वो फिर से बाहर आने वाला है और मुझे अपनी चूत के अंदर ही अंदर उसका लंड फूलता हुआ महसूस हुआ। उसने बहुत ज़ोर ज़ोर से चोदना शुरू किया और फायनली लंड को पूरा चूत से बाहर निकाला और एक इतनी ज़ोर से झटका मारा कि मेरा सारा जिस्म हिल गया और मेरे जिस्म में जैसे बिजली कि झटके लगने लगे और सारा जिस्म काँपने लगा।

मैंने फिर से सुहैल को ज़ोर से अपनी बांहों में जकड़ लिया। उसके साथ ही उसके लोहे जैसे सख्त लंड में से गरम- गरम मलाई के फुव्वारे निकलने लगे और मेरी चूत को भरने लगा। बस उसी टाईम पे मेरा लावा जो चूत के बहुत अंदर उबल रहा था, ऐसे बाहर निकलने लगा जैसे बाँध तोड़ के दरिया का पानी बाहर निकल जाता है। मुझे लगा जैसे सारे जहाँ में अंधेरा छा गया हो। जिस्म में झटके लग रहे थे और दिमाग में सनसनाहट हो रही थी और बहुत ही मज़ा आ रहा था। सुहैल अभी भी धीरे-धीरे चुदाई कर रहा था। जितनी देर तक उसकी मलाई निकलती रही, उसके धक्के चलते रहे और फिर वो अचानक मेरे जिस्म पे गिर गया जिससे मेरे बूब्स हम दोनों के जिस्म के बीच में सैंडविच बन गये। हम दोनों गहरी गहरी साँसें ले रहे थे। मैं उसके बालों में हाथ फिरा रही थी और मेरी ग्रिप बिल्कुल ढीली पड़ गयी थी। टाँगें खुली पड़ी थी और मैं चित्त लेटी रही। सुहैल का लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर ही था पर अब वो धीरे-धीरे नरम होने लगा था और फिर एक प्लॉप की आवाज़ के साथ उसका लंड मेरी चूत के सुराख से बाहर निकल गया और मुझे लगा कि उसकी और मेरी मलाई जो चूत के अंदर जमा हो चुकी थी, वो बाहर निकल रही है और मेरी गाँड के क्रैक पे से होती हुई नीचे बेडशीट पे गिरने लगी।

सुहैल थोड़ी देर तक मेरे ऊपर ऐसे ही पड़ा रहा। जब दोनों को होश आया तो उसने मुझे एक फ्रेंच किस किया और बोला कि कल रात फिर तुम्हें रीप्रोडक्टिव सिस्टम का अगला हिस्सा पढ़ाने आऊँगा।

मैंने मुस्कुराते हुए कहा कि शैतान चलो भागो यहाँ से, तुम ने ये क्या कर डाला। अगर कुछ हो गया तो क्या होगा।

उसने कहा कि नहीं ऐसे नहीं होगा, तुम फ़िक्र ना करो। और वो अपने कपड़े पहन के नीचे सोने चला गया।

मैं सुबह देर तक सोती रही। नीचे से मम्मी आवाज़ें देती रही लेकिन मैं तो गहरी नींद सो रही थी तो मम्मी ने सुहैल से कहा कि जा बेटा ज़रा देख तो सही कि ये किरन की बच्ची अभी तक सोयी पड़ी है। कॉलेज भी जाना है उसने।

सुहैल ऊपर आया और मुझे जगाया। मैं जब जागी और अपने बेड से उठी तो देखा कि वो तो ब्लड से भरी पड़ी है। मैं तो एक दम से डर ही गयी पर सुहैल ने कहा कि डरने की कोई बात नहीं है, ये तुम्हारी हायमन थी जिसे झिल्ली भी कहते हैं, वो फट गयी और तुम्हारी चूत कि सील टूट गयी है। ये झिल्ली तो हर कुंवारी लड़की को होती है और पहली चुदाई में टूट जाती है और ये नॉर्मल है, तो मैंने इतमिनान की साँस ली और बेडशीट को लपेट के वाशिंग मसीन में धोने के लिये डाल दिया और मैं जब नहा धो के नीचे उतर रही थी तो मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था। मम्मी ने पूछा कि क्या हुआ, ऐसे क्यों चल रही है, तेरी तबियत तो ठीक है ना? तो मैंने कहा पता नहीं मम्मी! क्या हुआ!

सुहैल ने शरारत से मुस्कुराते हुए बीच में कहा कि शायद कोई चीज़ चुभ गयी होगी तो मैंने उसकी तरफ़ बनावटी गुस्से से देखा और मैंने मम्मी से कहा, हाँ मम्मी, हो सकता है कोई चीज़ चुभ गयी हो, कल रात बिजली भी तो चली गयी थी न और अंधेरा हो गया था तो हो सकता है कोई चीज़ सच में चुभ गयी हो तो मम्मी ने इतमिनान की साँस ली और कहा ठीक है, अगर दवाई लगानी हो तो लगा लो।

तो सुहैल ने मुस्कुराते हुए कहा कि आप फिक्र ना करें खाला, मैं इसे आज दर्द कम होने का इंजेक्शन लगा दुँगा जिससे इसका दर्द हमेशा के लिये खतम हो जायेगा! मम्मी ने कहा कि हाँ ये ठीक है, पर उन्हें क्या पता कि सुहैल कौन से इंजेक्शन की बात कर रहा है और ये इंजेक्शन वो मुझे कहाँ लगायेगा। ये तो बस मैं जानती थी या वो।

मैंने नाश्ता किया और कॉलेज चली गयी। कॉलेज तो चली गयी पर कहीं दिल ही नहीं लग रहा था। चूत में मीठी-मीठी खुजली हो रही थी। बार-बार मेरा हाथ मेरी चूत पे ही चला जाता था और सारे जिस्म में मीठा-मीठा सा दर्द हो रहा था। बार-बार अंगड़ाई लेने का मन कर रहा था। पता नहीं क्यों, आज कॉलेज कुछ अजीब सा लग रहा था । खैर कॉलेज का टाईम खतम हुआ और मैं घर आ गयी और लंच के बाद अपने रूम में जा के सो गयी। बहुत देर तक सोती रही और उठने का मन ही नहीं कर रहा था। सारे जिस्म में एक अजीब सी मिठास लग रही थी। शाम को देर से उठी और फ़्रेश हो के नीचे आ गयी और हम सब ने डिनर साथ किया। वहीं डिनर टेबल पे बैठ के हम सब बातें करने लगे मगर मेरा मन तो कहीं और ही था। मैं बातें सुन तो रही थी पर समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था। थोड़ी देर के बद मैंने कहा कि अब मैं जाती हूँ, मुझे पढ़ाई करनी है और मैं ऊपर अपने कमरे में चली गयी।

रात के करीब साढ़े दस हो गये थे और मुझे अभी भी नीचे से मम्मी डैडी और सुहैल की बातों की आवाज़ें आ रही थी। मैं आते ही अपने बेड पे लेट गयी और मेरा हाथ खुद-ब-खुद मेरी सलवार के अंदर चूत पे चला गया और मैं अपनी चूत को सहलाने लगी और चूत से खेलने लगी। मैंने देखा कि मेरी चूत पे थोड़ी-थोड़ी झांटें उग आयी हैं। वैसे तो मैं हर हफते अपनी झांटें साफ़ करती हूँ और अभी तीन ही दिन हुए थे मुझे झांटें साफ़ किये हुए और अब हल्की-हल्की सी महसूस हो रही थी। मैं बाथरूम में गयी और क्रीम लगा के बची खुची झांटों को साफ़ कर दिया। अब मेरी चूत मक्खन जैसी चिकनी हो गयी थी। मैं वापस बेड पे आके लेट गयी और कमरे की बिजली बंद कर दी और अंधेरे में ही एक बार फिर से अपनी चूत को सहलाने लगी। अब चूत एक दम से मक्खन की तरह चिकनी हो चुकी थी। ठंड बढ़ चुकी थी और मैं ब्लैंकेट तान कर लेट गयी और अब अंधेरे में मुझे मसाज करने में बहुत मज़ा आ रहा था। लड़कियाँ, खासकर कॉलेज जाने वाली लड़कियाँ जानती हैं कि सर्दी की रात हो और चूत मक्खन जैसी चिकनी हो तो चूत से खेलने में और मसाज करने में कितना मज़ा आता है और मैं भी अपनी चूत का मसाज करने लगी और मसाज करते-करते मेरी उंगली तेज़ी से चलने लगी। कभी उंगली चूत के सुराख में अंदर डाल के और कभी मैं क्लीटोरिस का मसाज कर रही थी और फिर अचानक मेरा हाथ तेज़ी से चलने लगा और जिस्म काँपने लगा और फिर मेरा लावा फिर से उबलने लगा और चूत में से जूस निकलने लगा। मेरी आँखें बंद हो गयी और दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था और दिमाग में सांय-सांय सी होने लगी और मस्ती में ना जाने मैं कब सो गयी।

मुझे अपनी चूत पे किसी का हाथ महसूस हुआ तो मेरी आँख खुल गयी। पता नहीं कितनी रात हो गयी थी। मेरी आँख खुली और मुझे होश आया तो समझ में आया कि वो सुहैल है। मैं उस से लिपट गयी और हम दोनों फ्रेंच किस करने लगे। हम एक दूसरे की ज़ुबान को चूस रहे थे। उसका एक हाथ मेरी चूत पे आ गया और वो मेरी चूत का मसाज मेरी सलवार के ऊपर से ही करने लगा। मुझे चूत में गर्मी महसूस होने लगी और गीली भी होने लगी। मैंने हाथ बढ़ा के उसके लंड को पकड़ा तो पता चला कि वो तो पूरा का पूरा नंगा लेटा है। मैं उसका नंगापन महसूस करके मुस्कुरा दी और उसके लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ के दबाने लगी। हम दोनों चित्त लेटे थे। उसका हाथ अब मेरी सलवार के अंदर घुस चुका था उसने सलवार का स्ट्रिंग खोल दिया था और चूत को मसाज कर रहा था। मेरी चिकनी चूत पे उसका हाथ बहुत अच्छा लग रहा था।

वो अपनी जगह से उठा और मेरी कमीज़ को मेरा हाथ ऊपर कर के निकाल दिया और मेरी टाँगों को खोल के टाँगों के बीच में आ के बैठ गया और मेरी सलवार को नीचे खींच के उतारने लगा तो मैंने अपनी चूतड़ उठा दिये और सलवार निकालाने में मदद की। अब हम दोनों नंगे थे और कमरे में अंधेरा था। घर के सारे लोग सो चुके थे। मैंने पूछा कि क्या टाईम हुआ है तो उसने बताया कि रात का एक बज रहा है और सर्दी के मारे मेरे मम्मी डैडी ब्लैंकेट तान के अपने कमरे में कब के सो चुके हैं।

सुहैल मेरे ऊपर ऐसे ही लेट गया। उसका अकड़ा हुआ लंड जिस में से प्री-कम निकल रहा था, मेरी चूत के ऊपर था। हम दोनों के जिस्म के बीच में उसका लंड और मेरी चूचियाँ दोनों सैंडविच बन गयी थी। हम दोनों किसिंग में बिज़ी हो गये। मेरी चूत के ऊपर उसका लंड लगने से चूत में खुजली शुरू हो चुकी थी और गीली भी हो चुकी थी। वो मेरी चूचियों को मसल रहा था और किसिंग कर रहा था। उसका लंड मेरी चूत के लिप्स के बीच में "हॉट डॉग" के सैंडविच की तरह से फँसा हुआ था। लंड के डंडे का निचला हिस्सा मेरी चूत को खोल के लिप्स के बीच में था। लंड के डंडे का निचला हिस्सा क्लीटोरिस से टच कर रहा था तो और मज़ा आ रहा था। अब उसने मेरी चूचियों को चूसना शुरू कर दिया जिससे मेरे जिस्म में बिजली दौड़नी शुरू हो गयी और मुझे लग रहा था कि सारे जिस्म से बिजली दौड़ती हुई चूत में आ रही है ऐसे जैसे कि मेरी चूत बिजली का न्यूकलियस हो या सैंट्रल पोइंट हो।

सुहैल अपने लंड के डंडे को चूत के लिप्स के बीच में ही ऊपर नीचे करने लगा। उसके लंड में से प्री-कम भी निकल रहा था जिससे उसके लंड का निचला हिस्सा जो मेरी चूत के लबों के बीच में था, स्लिपरी हो गया था और फिसल रहा था। मेरी टाँगें उसके चूतड़ पे क्रॉस रखी थी और मैं उसको अपनी तरफ़ खींच रही थी। मेरी चूत बे-इंतहा गीली हो चुकी थी। वो भी मस्ती में था। ऐसे ही लंड को चूत के अंदर ऊपर नीचे करते-करते उसका लंड मेरी चूत के सुराख में फंस गया और एक ही झटके में मेरी गीली चूत के अंदर आधा घुस गया तो मेरे मुँह से आआआहहहहह और ईईईईईई की सिसकरी निकल गयी और मेरी आँखें फटी रह गयी। उसने अब अपना लंड आधा ही अंदर बाहर करना शुरू कर दिया तो मुझे बहुत मज़ा आने लगा। मैं अपनी गाँड उठा-उठा के उसका लंड अपनी चूत के अंदर लेने की कोशिश करने लगी। सुहैल ने अब अपना पूरा लंड सुपाड़े तक चूत से बाहर निकाल के एक ज़ोरदार झटका मारा तो मेरे मुँह से आआआआईईईईईईईई की आवाज़ निकली और मैं उससे ज़ोर से लिपट गयी। मेरा अंदर का दम अंदर और बाहर का बाहर रह गया। चूत पूरी स्ट्रैच हो चुकी थी मेरी चूत में एक दफ़ा फिर से जलन होने लगी।

सुहैल थोड़ी देर तक तो ऐसे ही लंड को चूत के अंदर घुसाये हुए लेटा रहा और मुझे फ्रेंच किस करने लगा। दोनों एक दूसरे की ज़ुबान चूस रहे थे। थोड़ी ही देर में चूत के अंदर की जलन खतम हो गयी और मुझे उसका लोहे जैसा सख्त लंड अपनी चूत के अंदर बेहद अच्छा लगने लगा। सुहैल ने चुदाई शुरू कर दी। वो पूरा लंड बाहर तक निकाल-निकाल के चोद रहा था। उसके पैर पीछे को थे और बेड की लकड़ी की पट्टी से टिके हुए थे और मेरी टाँगें उसके चूतड़ पे कैंची की तरह से जकड़ी हुई थी। वो लकड़ी की बैक का सहारा लेकर अपने लंड को पूरा चूत में से बाहर निकाल-निकाल के ज़ोर-ज़ोर से चुदाई कर रहा था। जैसे ही उसका लंड चूत से बाहर निकलता तो मुझे लगाता जैसे मेरी चूत एक दम से खाली हो गयी हो और फिर जब लंड चूत के अंदर घुस जाता तो लगाता जैसे चूत पूरी तरह से भर गयी है और वो मुझे चोदता ही चला गया। वो ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था और उसकी दोनों कोहनियाँ मेरे जिस्म के दोनों तरफ़ थीं। उसके पैर पीछे और मेरे पैर उसकी गाँड पे क्रॉस थे। मुझे अब बहुत ही मज़ा आने लगा था उसकी चुदाई से।

उसके हर धक्के से मेरी चूचियाँ आगे पीछे होने लगी तो उसने अपने मुँह से उनको चूसना शुरू कर दिया। मस्ती से मैं पागल हो गयी थी। मेरी छोटी सी टाइट चूत के अंदर उसका इतना बड़ा लोहे का डंडा बहुत मज़ा दे रहा था। चुदाई में बहुत ही मज़ा आ रहा था। मेरी चूत में से जूस लगातार निकल रहा था और फच-फच की आवाज़ें कमरे में गूँजने लगी। मुझे ये चुदाई का म्युज़िक बहुत मस्त लग रहा था। मैं अपनी गाँड उठा-उठा के उस से चुदवा रही थी जैसे म्युज़िक की ताल से ताल मिला रही होऊँ।

सुहैल के धक्के तेज़ हो चुके थे और मुझे भी लग रहा था कि मेरी चूत के अंदर कोई तूफान उठ रहा हो। मैं उससे लिपट गयी। सुहैल इतनी ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था कि मुझे ऐसे महसूस हो रहा था जैसे उसका लंबा मोटा लोहे जैसा सख्त लंड मेरी चूत को फाड़ के मेरे पेट तक घुस चुका है। वो दीवानों की तरह से चोद रहा था। मैं उससे ज़ोर से लिपट गयी और दोनों की साँसें तेज़ी से चल रही थी। मुझे लगा कि मेरी चूत में जो तूफान मचा हुआ था वो अब बाहर निकलने को मचल रहा हो और ठीक उसी वक्त सुहैल के लंड में से मलाई के फुव्वारे छूटने लगे - एक दो तीन चार पाँच - उफफफफ मुझे तो मस्ती में पता ही नहीं चला के कितनी मलाई निकल रही है जबकि उसकी पहली मलाई के फुव्वारे ही से मेरी चूत में से तूफानी लावा निकलने लगा। मैं उससे ज़ोर से लिपट गयी थी। उसके धक्के अब धीमे होने लगे और वो अपना लंड मेरी चूत के अंदर ही छोड़ के मेरे ऊपर गिर गया। मेरी चुदी हुई चूत हम दोनों की मलाई से भर चुकी थी पर अभी तक बाहर नहीं निकली थी क्योंकि चूत के सुराख पे उसके लंड का टाइट ढक्कन लगा हुआ था। दोनों ऐसे हे गहरी-गहरी साँसें लेते रहे और मेरी ग्रिप भी अब लूज़ हो गयी थी। उसका लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर ही था। ऐसे लग रहा था जैसे चूत के अंदर ही फूल के और मोटा हो रहा हो। अंधेरे कमरे में हमारी तेज़ी से चलती हुई साँसें सुनायी दे रही थी। मेरी आँखें बंद थी और सारे जिस्म में एक अजीब सी सनसनाहट हो रही थी। मेरे दिल और दिमाग का टोटल ब्लैक-आऊट हो गया था। शायद एक दो या तीन मिनट के लिये मैं सो गयी थी या पता नहीं मस्ती में बेहोश हो गयी थी।

मुझे थोड़ा सा होश आया तो महसूस हुआ कि सुहैल मेरे ऊपर पलट के आ चुका है और उसके लंड में से टपकती हुई हम दोनों की मिक्स मलाई के ड्रॉप्स मेरे लिप्स पे गिर रहे हैं। शायद वो अपना लंड चूत में से बाहर निकालते ही पलट के सिक्स्टी-नाईन पोज़िशन में आ गया था। मेरी टाँगें मुड़ी हुई थी और सुहैल मेरी चूत को चाटना शुरू कर चुका था। मेरे बंद लिप्स पे जब मलाई गिरी तो खुद-ब-खुद मेरी ज़ुबान बाहर निकली और मैंने मलाई को टेस्ट किया और फिर जैसे खुद-ब-खुद ही मेरा मुँह खुल गया और मैं सुहैल के आधे अकड़े हुए लंड को चूसने लगी। दोनों की मिक्स मलाई उसके लंड पे लगी हुई थी और मैं चाट रही थी और वो मलाई को मेरी चूत में से चाट रहा था। इस तरह से मैंने उसके लंड को साफ़ किया और उसने मेरी चूत को साफ़ किया।

अब फिर से सुहैल मेरे बगल में आ के लेट गया। वो मेरी पीठ के पीछे था और मेरी पीठ से उसका सीना लग रहा था। मैं ऐसे करवट से लेटी थी और वो मेरे पीछे मुझसे लिपटा हुआ करवट से लेटा था। मेरे चूतड़ पे उसका लंड महसूस हो रहा था। पर अभी तक मेरा दिमाग ठिकाने नहीं आया था और अभी तक कमरा मेरे आँखों के सामने घूम रहा था और मैं पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी।

उसका लंड मेरे चूतड़ से लग रहा था और उसने मेरे बगल से हाथ डाल के मेरी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया। मेरे निप्पल बहुत सेंसटिव हो चुके थे और उसका हाथ लगने से कड़क हो गये थे। मैं अपनी टाँगों को मोड़ कर के ऐसे लेटी थी कि मेरे घुटने मेरी चूचियों के करीब थे और सुहैल मेरे पीछे से लंड को चूत पे टच कर रहा था और आहिस्ता-आहिस्ता से धक्के मार मार के पीछे से ही लेटे लेटे लंड के सिर को चूत के सुराख में घुसाने की कोशिश कर रहा था।

उसके लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के सुराख में लगते ही चूत में जैसे फिर से जान आने लगी और वो गीली होना शुरू हो गयी। वो मेरी चूचियों को मसल रहा था और धक्के मार मार के लंड के सुपाड़े को पीछे से ही चूत के अंदर घुसा रहा था। थोड़ी ही कोशिश के बाद मेरी चूत में उसका लंड आधा और फिर पूरा अंदर घुसने लगा। उसका लंड पूरी तरह से अकड़ गया था और फिर से एक दम से लोहे जैसा सख्त हो गया था।

मुझे फिर से मज़ा आने लगा था वो जोश में लंड को फिर से सुपाड़े तक निकाल-निकाल के पीछे से ही मुझे चोद रहा था। मेरा पूरा जिस्म रिलैक्स हो गया था। चूत में से जूस भी निकलने लगा था और चूत अंदर से स्लिपरी हो गयी थी। उसका लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था और मैं फिर से मज़े लेने लगी थी। अचानक जब उसने अपना लंड पूरा बाहर खींच के अंदर घुसाने की कोशिश की तो वो चूत में से बाहर निकल के गाँड के सुराख में घुस गया मेरे मुँह से फिर से एक ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍.... ऊऊऊऊईईईईईईईई चींख निकल गयी पर गाँड के मसल तो रिलैक्स थे। किसे पता था कि लंड गाँड में घुस जायेगा। बस लंड मेरी चूत के जूस से गीला हो गया था और एक ही झटके में अचानक ही मेरी गाँड को फाड़ता हुआ अंदर घुस चुका था। मैं उछल के आगे हो रही थी कि उसी वक्त सुहैल ने मुझे टाइट पकड़ लिया और मैं उसके लोहे जैसे लंड को अपनी छोटी सी गाँड के सुराख से बाहर नहीं निकाल पायी। अब वो मेरी गाँड मार रहा था। मुझे बहुत तकलीफ हो रही थी। इतना मोटा लंबा लंड मेरी छोटी सी गाँड में घुस चुका था और मुझे लग रहा था कि मेरी गाँड फट गयी है।

अपने लंड को गाँड के अंदर रखे-रखे ही उसने मुझे पलट दिया। मैं उलटी लेट गयी और वो मेरे ऊपर आकर मेरी गाँड मारने लगा। मुझे बहुत ही तकलीफ हो रही थी। मेरी आँख से आँसू निकल रहे थे पर वो मेरी एक नहीं सुन रहा था और गाँड मारने में बिज़ी था। मेरे पेट के नीचे उसने एक तकिया जैसा कुशन रख दिया था जिससे मेरी गाँड थोड़ी ऊपर उठ गयी थी और वो गाँड में अपना लंड पेल रहा था। वो अपने लंड को पूरा निकाल-निकाल के मेरी छोटी सी गाँड में घुसेड़ रहा था और फिर उसकी स्पीड बढ़ गयी। जैसे-जैसे उसके झटके तेज़ हो रहे थे, तकलीफ के मारे मेरी जान ही निकली जा रही थी और फिर अचानक मुझे उसकी मलाई अपनी गाँड में गिरती महसूस हुई और थोड़ी ही देर में अपने लंड की मलाई मेरी गाँड में गिरा के वो शाँत पड़ गया और मेरे बगल में आकर लेट गया। पर मेरी गाँड तो दर्द के मारे फटी जा रही थी। जितना मज़ा चुदाई में आया था अब उतनी तकलीफ हो रही थी। मैं सुहैल से बोली कि आगे से कभी मेरी गाँड नहीं मारना, मुझे बहुत ही दर्द हो रहा है।

वो हंसा और कहा कि वो तो मेरा लंड गलती से तुम्हारी गाँड में घुस गया तो मुझे मज़ा आया और मैंने गाँड मार दी, नहीं तो मेरा इरादा तो तुम्हारी गाँड मारने का नहीं था। ठीक है अगर तुम्हें पसंद नहीं तो अगली बार नहीं मारूँगा। फिर थोड़ी देर के बाद एक और टाईम उसने मुझे चोदा जिससे मेरी गाँड में तकलीफ खतम हो गयी और चूत में फिर से मज़ा आ गया और पता नहीं ऐसी चुदाई के बाद मैं कब सो गयी।

सुबह उठी तो देर हो चुकी थी। आज कॉलेज नहीं जाना था। नाश्ता कर के थोड़ी देर नीचे ही हम सब बातें करते रहे और बस ऐसे ही सारा दिन गुज़र गया। मैं और सुहैल अगले एक हफते तक खूब चुदाई करते रहे रोज़ रात को वो मम्मी डैडी के सो जाने के बाद ऊपर आ जाता और हम जम कर चुदाई करते। एक हफते के बाद वो चला गया और जाने से पहले मैं उससे लिपट के खूब रोयी। मुझे लगा जैसे कोई मेरा लवर मुझे छोड़ के जा रहा है। वो मेरे सारे जिस्म पे हाथ फेरता रहा और प्यार करता रहा और कहा, सुनो किरन, अगर तुम्हारे पीरियड्स में कोई गडबड़ हो जाये तो मुझे फ़ौरन फोन कर देना, मैं कुछ इंतज़ाम कर दुँगा! पर अगले ही महीने में मेरे पीरियड्स टाईम से कुछ पहले ही शुरू हो गये तो मैंने इतमिनान की साँस ली और सुहैल को फोन कर के बता दिया। फिर जब कभी सुहैल आता तो हम खूब चुदाई करते।

मैंने अपनी ग्रेजुयेशन पूरी कर ली और एक दिन मुझे पता चला के मेरा निकाह किसी अशफाक नाम के आदमी से फिक्स हो गया है। उसके घर वाले हमारे घर आये थे और मुझे पसंद भी कर गये और फिर निकाह की डेट फिक्स कर के मेरा निकाह कर दिया गया।

मैं अभी निकाह की डीटेल्स में नहीं जाना चाहती और डायरेक्ट अपनी सुहाग रात के बारे में बता देती हूँ। निकाह हो गया और मैं अपने ससुराल आ गयी। सारा घर अच्छी तरह से सजा हुआ था। घर बहुत बड़ा भी नहीं और बिल्कुल छोटा भी नहीं था, बस ठीक ठाक ही था। उसके घर को पहुँचते-पहुँचते रात हो चुकी थी। डिनर तो कर ही चुके थे मैरिज हॉल में। अशफाक का कमरा भी ठीक ठाक ही था। बेड पे चमेली के फूल बिखरे पड़े थे। पिंक कलर का नरम बेड बहुत अच्छा लग रहा था। सारे कमरे में चमेली के फूलों कि भीनी भीनी खुशबू आ रही थी। बेहद अच्छा लग रहा था। एक दम से ऐसे ही रोमैंटिक था जिसकी हर लड़की ख्वाहिश करती है।

अशफाक कि छोटी बहन, रुखसाना ने मुझे बेड पे बिठा के मुस्कुराते हुए कहा कि भाई जान अभी आ जायेंगे, आप थोड़ा रेस्ट ले लें और कमरे से चली गयी। मुझे अपनी सहेलियों के किस्से याद आने लगे जिनकी शादी हो चुकी थी। किसी ने कहा कि मेरी तो रात भर चुदाई हुई और सुबह मुझसे चला भी नहीं जा रहा था। किसी ने कहा था कि बस ऐसे ही रहा, कोई खास मज़ा नहीं आया था। किसी ने कहा कि अपने लौड़े को चूत के अंदर डालने से पहले ही चूत के ऊपर अपनी मलाई निकाल के सो गया था। मैं काफी एक्साईटेड थी कि पता नहीं मेरा क्या हशर होगा क्योंकि सुहैल से चुदवाये हुए भी तकरीबन एक साल से ज़्यादा ही हो चुका था। चूत के मसल फिर से टाइट हो गये थे। थोड़ी ही देर में वो कमरे में आ गया। अशफाक बहुत स्मार्ट लग रहा था। गोरा रंग, मीडियम हाईट और मीडियम बिल्ट। सब मिलाकर एक अच्छा स्मार्ट आदमी लग रहा था। मुझे अपनी फ्रैंड्स की बातें याद आ रही थी जिनकी शादी हो चुकी थी, जैसे कि सुहाग रात को क्या होता है और कैसे हसबैंड अपनी वाइफ को अपनी बातों से पता के चोद डालता है और लड़की को कितना मज़ा आता है। और साथ में ही मुझे सुहैल भी याद आ गया और सुहैल के साथ हुई मेरी पहली चुदाई भी मुझे याद आ गयी तो मस्ती से मेरा जिस्म टूटने लगा और एक लंबे मोटे लंड का सपना लिये बैठी रही, जो मेरी चूत में घुस के मुझे चोदेगा, मेरी प्यासी चूत की प्यास को बुझायेगा और मज़ा देगा।

अशफाक कमरे के अंदर आ गया और बेड पे बैठ गया। पहले तो मेरी खूबसूरती को निहारता रहा, मेरे गालों पे हाथ फेरता रहा और फिर गाल पे किस किया तो मेरे जिस्म में बिजली दौड़ने लगी और जिस्म जलने लगा। थोड़ी देर में वो उठा और अपने कपड़े चेंज कर के बेड पे आ गया और बहुत धीमी रोशनी वाला लाइट पिंक कलर का नाइट लैंप जला दिया। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। सारे जिस्म से पसीना छूटने लगा और मुँह से गरम-गरम साँसें निकलने लगी। अब अशफाक चेंज कर के आ गया और हम दोनों लेट गये। पहले तो मेरी खूबसुरती को निहारता रहा और धीरे-धीरे उसके हाथ मेरी चूचियों पे आ गये और वो उनको दबाने लगा तो जिस्म में सनसनी सी फैल गयी। ऐसे ही बातें करते-करते वो मेरे कपड़े उतारता चला गया। सारे कपड़े निकाल के मुझे नंगा कर दिया। मेरे मुँह से एक बात भी नहीं निकल रही थी। नये घर में नये लोगों के साथ रहने से एक नयापन ही लग रहा था। सुहैल तो फिर भी कज़न था, उतना नयापन नहीं महसूस हुआ था लेकिन यहाँ तो हर कोई अजनबी था। शरम भी आ रही थी और एक्साइटमेंट भी थी। मैं बेड पे नंगी लेटी रही। शरम से बुरा हाल था पर क्या करती, ज़माने के रिवाज यही थे कि पहली रात को हसबैंड अपनी वाइफ को चोद देता है और सारी उम्र के लिये वो सिर्फ़ अपने हसबैंड की ही होके रह जाती है। वो थोड़ी देर तक मेरे नंगे जिस्म को देखता रहा और अपने हाथ मेरे सारे जिस्म पे फेरता रहा। मेरे सारे जिस्म में जैसे चिंटियाँ घूमने लगी हों। चूत में भी अब खुजली शुरू हो गयी थी।

वो मेरे नंगे जिस्म पे हाथ फेर रहा था। वो मेरी चूचियों को दबा रहा था और कभी-कभी चूचियों को चूस लेता। धीरे-धीरे उसका हाथ मेरी चूत पे आ गया और वो मेरी उसी दिन की शेव की हुई मक्खन जैसी चिकनी चूत पे आ गया और वो चूत का मसाज करने लगा। मेरे जिस्म में बिजली दौड़ रही थी और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने दिल में सोचा कि ये तो खिलाड़ी लग रहा है, शायद चुदाई का एक्सपीरियंस होगा और उसका हाथ मेरी चूत पे लगते ही जैसे मेरी चूत में फ्लड आ गया और वो बे-इंतहा गीली हो गयी और रस से भर के अब रसीली चूत हो गयी।

अशफाक ने अपने कपड़े भी निकाल दिये और नंगा हो गया। मैंने एक तिरछी नज़र उसके लंड पे डाली तो दिल धक से रह गया। उसका लंड बस ऐसे ही था, कोई खास नहीं था, टोटल इरेक्ट होने के बाद शायद चार इंच या पाँच इंच का ही होगा। मैंने सोचा कि शायद थोड़ी देर के बाद वो और अकड़ के बड़ा हो जायेगा। खैर अब वो मेरी चूचियों को चूस रहा था और हाथ से मेरी चूत का मसाज कर रहा था। कभी-कभी चूत के अंदर अपनी उंगली डाल देता तो मैं ससससीसीसी ईईईईई कर के सिसकरी ले लेटी।

अब उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर अपने लंड पे रख दिया। मैं कुछ देर तक ऐसे ही अपना हाथ उसके लंड पे रखी रही तो उसने मेरे हाथ को अपने हाथ से पकड़ के दबाया तो मैं समझ गयी कि शायद वो चाहता है कि मैं उसका लंड अपनी मुट्ठी में लेकर दबाऊँ। मैंने उसके लंड को एक या दो बार ही दबाया था कि उसने मेरा हाथ हटा दिया और सीधा मेरे ऊपर चढ़ आया और मेरी टाँगों को फैला के मेरे ऊपर लेट गया। लंड को मेरी चूत के लिप्स के अंदर सुराख पे सटाया और झुक के मुझे किस करने लगा और एक ही झटके में उसका लंड मेरी समंदर जैसे गीली चूत के अंदर घुस चुका था और वो अचानक ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा और बस चार या पाँच ही धक्के लगाया था कि उसके मुँह से ऊऊऊऊहहहह की आवाज़ निकली और उसकी मलाई मेरी चूत में गिर गयी। मुझे तो उसका लंड अपनी चूत के अंदर सही तरीके से महसूस भी नहीं हुआ और उसकी चुदाई पूरी हो चुकी थी। मेरी कुछ फ्रैंड्स ने बताया था कि कभी-कभी एक्साइटमेंट की वजह से और कभी चूत की गरमी से लंड से मलाई जल्दी ही निकल जाती है पर कुछ दिनों में जब चुदाई डेली करते रहते हैं तो फिर ठीक हो जाता है और अच्छी तरह से चोदने लगाता है और ये कि ऐसा अगर कभी हो तो कोई फिक्र की बात नहीं है। यही सोच के मैं खामोश हो गयी कि हो सकता है कि एक्साइटमेंट या चूत की गर्मी से वो जल्दी ही झड़ गया हो पर बाद में अच्छी तरह से चोद डालेगा।

मैंने भी सोचा कि शायद एक्साइटमेंट में उसकी क्रीम जल्दी निकल गयी होगी और ये कोई नयी बात नहीं होगी। वो गहरी-गहरी साँसें लेता हुआ मेरे जिस्म पे पड़ा रहा और मेरी चूत में पहले से ज़्यादा तूफ़ान उठ रहा था और मेरा मन कर रहा था कि किसी तरह से सुहैल आ जाये और मुझे इतना चोदे कि मेरी चूत फट जाये पर ऐसा हो नहीं सकता था ना। मैं कुछ नहीं कर सकती थी। इंतज़ार किया कि शायद अशफाक के लंड में फिर से जान पड़ेगी और वो कुछ सही ढंग से चुदाई करेगा पर ऐसा कुछ नहीं हुआ और वो मेरे बगल में लेट के गहरी नींद सो गया और एक ही मिनट में उसके खर्राटे गूँजने लगे।

सुबह हुई तो उसकी बहन रुखसाना कमरे में आयी और मुस्कुराते हुए एक आँख बंद कर के पूछा, क्यों भाभी जान! रात सोयी या भाई जान ने सारी रात जगाया? मैं उस पगली को क्या बताती कि उसका भाई मेरी चूत में आग लगा के सो गया और मैं सारी रात जागती रही और इंतज़ार करती रही कि हो सकता है कि उसका लंड फिर से जाग जाये पर ऐसा कुछ हुआ नहीं और रुखसाना से कैसे बताती कि उसके भाई को आग लगाना तो आता है पर उस आग को बुझाना नहीं आता। मैंने बनावटी शर्म से नज़र नीचे कर ली और मुस्कुरा दी और दिल में सोचा कि पता नहीं इसे कैसा शौहर मिलेगा, पहली रात को चोद-चोद के चूत का भोंसड़ा बना देगा या मेरी तरह चूत में आग लगा के सो जायेगा। तब मैं पूछूँगी उससे कि रात कैसी गुजरी, रात भर चुदाई होती रही या खुद मलाई निकाल के सो गया और तुम्हारी चूत में आग लगा के तुम्हें सोने नहीं दिया। लेकिन अभी इस सवाल को पूछने के लिये तो टाईम है।

इसी तरह से एक हफ्ता हो गया और मुझे कोई खास मज़ा नहीं आया। बस वो अपने हिसाब से चोदता रहा और हर बार चोद के मुझसे पूछता कि "मज़ा आया किरन?" तो मैं मुँह नीचे कर के चुप हो जाती और वो समझता कि शायद मैं उसकी चुदाई को इंजॉय कर रही हूँ। पता नहीं क्या प्रॉबलम था उसको कि चुदाई से पहले उसका लंड अकड़ता तो था लेकिन चूत की गर्मी से उसकी मलाई दूध बन के निकल जाती थी। ऐसा लगाता था कि लंड चूत के अंदर सिर्फ़ मलाई छोड़ने के लिये ही जाता है। मुश्किल से दो या तीन ही धक्कों में उसका काम तमाम हो जाता था। शुरू-शुरू में तो मैं समझी कि शायद एक्साइटमेंट की वजह से होगा और वक्त के साथ ठीक हो जायेगा पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। शादी के बाद पूरे दो हफ्ता उसके घर रह कर हम शहर में चले आये जहाँ उसका बिज़नेस था।

अशफाक के घर वाले शहर के आऊटर में रहते हैं और अशफाक एक बिज़नेसमैन है। उसका रेडीमेड गार्मेंट्स का बिज़नेस है जो काफी अच्छा चलता है। वो अपने बिज़नेस के लिये डेली आऊटर से शहर में नहीं आ सकता था और इसी लिये उसने एक शानदार फ्लैट शहर में ले रखा था जिस में हम दोनों ही रहते हैं। घर में किसी चीज़ की कमी नहीं थी। कभी-कभी उसके मम्मी और डैडी आ जाते या कभी उसकी बहन रुखसाना आ जाती तो एक या दो दिन रह के चले जाते। घर में मैं अकेली ही रहती हूँ।

वक्त ऐसे ही गुजरता रहा। वो मेरी चूत में सारी रात आग लगाता रहता और खुद सुबह सुबह उठ के चला जाता और मैं जलती हुई चूत के साथ सारा दिन गुजारती रहती। करती भी तो क्या करती। इसी तरह से तीन महीने गुज़र गये। बहुत बोर होती रहती थी घर में बैठे-बैठे। सब नये -ये लोग थे। किसी से भी कोई जान पहचान नहीं थी। हमारे घर के करीब ही एक लेडी रहती थी। उनका नाम था सलमा। वो होंगी कोई छत्तीस या सैंतीस साल की। काफी खुश अखलाक़ और तहज़ीब याफ्ता औरत थीं। वो अक्सर हमारे घर आ जाया करती हैं और इधर उधर की बातें करती रहती हैं। मैं उन्हें आँटी कहने लगी। वो जब आती तो दो-तीन घंटे गुज़ार के ही जाती। कभी खाना पकाने में भी मदद कर देती और कभी-कभी तो हम दोनों मिल के खाना भी खा लेते। वो अपने अपियरेंस का बेहद ख़याल रखती थीं और हमेशा सलीके से कपड़े, गहने वगैरह पहने होती थीं और हल्के से मेक अप में बेहद खूबसूरत दिखती थीं। मैंने भी उनसे काफी कुछ सीखा।

अशफाक तो बिज़नेस के सिल सिले में शहर से बाहर जाते ही रहते हैं और जब कभी किसी दूर के शहर जाना होता तो वो तीन-चार दिन के लिये जाते और मैं घर मैं अकेली ही रहती हूँ। कई बार आँटी ने कहा कि किरन तुम अकेली रहती हो, अगर तुम कहो तो मैं तुम्हारे पास आ के सो जाया करूँ!

मैंने हमेशा हँसते हुए उनके इस इरादे को टाल दिया और अब वो मेरे साथ सोने की बात नहीं करती। कभी-कभी अगर बातें करते-करते रात को देर भी हो जाती तो वो अपने घर चली जाती थी। उनके शौहर मर्चेंट नेवी में इंजीनियर थे और साल में दो-तीन दफ़ा कुछ हफ़्तों की छुट्टियों में आते थे। उनकी बारह साल की एक बेटी थी जो बोर्डिंग स्कूल में पढ़ती थी। उनके पास एक बड़ा सा कुत्ता था जिसे वो दिल-ओ-जान से चाहती थीं। सलमा आँटी अपने कुत्ते के साथ अकेली रहती थीं।

एक दिन आँटी दोपहर के वक्त आ गयीं। मैं उसी वक्त बाहर से कुछ शॉपिंग करके वापस लौटी थी और चाय पी कर थोड़ा सुस्ताने का दिल कर रहा था क्योंकि आज बादल छाये हुए थे और कभी भी बारिश हो सकती थी और ठंडी हवा चल रही थी। हकीकत में मौसम सुहाना हो रहा था पर मुझे रात के गैर तसल्ली बक्श सैक्स से सारा जिस्म टूटा जा रहा था । मैंने घर में कदम रखा ही था और अभी सैंडल भी नहीं उतारे थे कि ठीक उसी टाईम पे आँटी आ गयी। आँटी ने पूछा कि मैं कहीं जा रही हूँ क्या तो मैने कहा. नहीं आँटी! बल्कि अभी-अभी आयी हूँ तो आँटी ने पूछा के थक गयी होगी... कहो तो मैं तुम्हारा जिस्म दबा दूँ तो मैंने हँस के कहा कि नहीं आँटी, ऐसी कोई बात नहीं। इतनी देर में एक दम से बहुत ज़ोरों की बारिश शुरू हो गयी। मेरे इस घर में आने के बाद ये पहली बारिश थी तो मेरा जी चाह रहा था कि मैं ऊपर जा के बालकोनी से बारिश देखूँ। इसी लिये मैंने आँटी से कहा कि चलिये ऊपर चल के बैठते हैं और बारिश का मज़ा लेते हैं।

हम दोनों बालकोनी में आ गये। हमारा फ्लैट आठवीं मंज़िल पर बिल्डिंग का सबसे ऊपर वाला फ्लैट है और हमारी बिल्डिंग के सामने सड़क थी और दूसरी तरफ छोटी सी मार्केट थी जहाँ सब्ज़ी, दूध और तकरीबन डेली इस्तेमल की सभी चीज़ें मिल जाया करती थी। इतनी बारिश की वजह से सारा मार्केट सुना पड़ा हुआ था। कभी-कभी कोई इक्का दुक्का सायकल वाला या कोई आदमी बरसाती ओढ़े गुज़र जाता था। हम दोनों बालकोनी में रखी कुर्सियों पे बैठ गये और बाहर का सीन देखने लगे। कभी-कभी बारिश का थोड़ा सा पानी हमारे ऊपर भी गिर जाता था। मौसम ठंडा हो गया था और ऐसा अंधेरा था कि शाम के पाँच बजे ही ऐसा लग रहा था जैसे रात के आठ-नौ बज रहे हों। मैं चाय़ बनाने उठी तो आँटी ने कहा कि, ऐसे मौसम में जिन या रम पीने में बहुत मज़ा आता है! मैं उनकी बात सुनकर चौंक पड़ी। हालांकि मैं खुद अशफाक के कहने पर उसके साथ कभी-कभी बियर पी लेती थी पर आँटी पीने का शौक रखती होंगी, इस बात की मुझे उम्मीद नहीं थी। मैंने आँटी से कहा कि जिन या रम तो नहीं है क्योंकि अशफाक व्हिस्की पीना पसंद करते हैं... तो आँटी ने कहा कि वही ले आओ।

मैं जा के दो ग्लास और अशफाक की अलमारी से व्हिस्की की बोतल ले आयी। व्हिस्की पीने का ये मेरा पहला मौका था। हम दोनों पैग पीते-पीते बाहर का सीन देखते रहे और इधर उधर की बातें करते-करते बारिश के मज़े लेने लगे। एक छोटा सा पैग पीने से ही जिस्म में थोड़ी सी गर्मी आ गयी। आँटी तो इतनी देर में एक बड़ा पैग पी चुकी थीं और दूसरा पैग खतम होने को था। उन्होंने जोर देकर मेरे लिये अपने जैसा ही बड़ा सा पैग बना दिया। वो मेरे लेफ़्ट साईड में बैठी थीं और ईधर-उधर की बात करते-करते पता नहीं आँटी को क्या सूझा कि मुझसे मेरी सैक्स लाईफ के बारे में पूछने लगी। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या बताऊँ और व्हिस्की का हल्का सा सुरूर भी छाने लगा था। आँटी एक्सपीरियंस्ड थीं। शायद मेरी खामोशी को ताड़ गयीं और धीरे से पूछा, रात को मज़ा नहीं आता ना??

मैंने ना में सर हिलाया लेकिन कुछ ज़ुबान से बोली नहीं। उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और धीरे से दबाया और कहा कि मुझे भी नहीं आता, मैं भी ऐसे ही तड़पती रहती हूँ। और मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर उसका मसाज करने लगी। उन्होंने अपनी सुहाग रात के बारे में बताया जो मेरी सुहाग रात की ही तरह हुई थी और फिर बताया कि कैसे वो अपनी सैक्स की प्यास को बुझाती हैं। मैं हक्की बक्की उनकी कहानी सुन रही थी। उन्होंने बताया कि उनका एक दूर का भाँजा है जो शहर में ही कॉलेज में पढ़ता है और हॉस्टल में रहता है। वो कभी-कभी आँटी की चुदाई करके उनकी प्यासी चूत की प्यास को बुझा देता है। मैं आँटी की कहानी सुन के हैरत में पड़ गयी और सोचने लगी कि मैं अपनी प्यासी चूत की प्यास बुझाने के लिये क्या करूँ।

अब ठंड थोड़ी सी बढ़ गयी पर व्हिस्की के सुरूर और गर्मी से बहुत अच्छा लग रहा था और हम बैठे व्हिस्की पीते हुए बारिश के मज़े ले रहे थे और अपनी अपनी चुदाई कि कहानियाँ एक दूसरे को सुना रहे थे। आँटी अपनी कुर्सी घुमा के मेरी तरफ मुँह करके बैठ गयीं और बीच-बीच में मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर मसल रही थीं और अपनी टाँग बढ़ा कर मेरी सलवार ऊपर खिसकाते हुए अपने सैंडल को मेरी मेरी टाँगों पर हल्के-हल्के फिरा रही थीं और मेरे जिस्म में गर्मी आ रही थी। फ्लैट आठवीं मंज़िल पर होने की वजह से कोई हमें सड़क से देख नहीं सकता था और वैसे भी सड़क इतनी बारिश की वजह से सुनसान ही थी। वैसे मैं इस वक्त थोड़े नशे में थी और इतनी मस्त हो चुकी थी कि मुझे किसी बात का खयाल भी नहीं था। ऊपर से अपनी टाँगों पर उनके सैंडल का प्यारा सा लम्स और बाहर का ठंडा मौसम। फिर आँटी ने सुहाग रात की और अपनी चुदाई की दास्तान शुरू करके मेरे जिस्म में फिर से आग लगा दी थी।

मुझे सुहैल से चुदवाई हुई वो रातें याद आ रही थी जब मेरी चूत में सुहैल का लंबा मोटा लंड घुस के धूम मचा देता था और चूत-फाड़ झटके मार-मार के मेरी चूत को निचोड़ के अपने लंड का सारा रस मेरी चूत के अंदर छोड़ के कैसे मज़ा देता था। मेरा पूरा दिल और दिमाग सुहैल की चुदाई में था। मुझे पता ही नहीं चला के कब आँटी का पैर मेरी सलवार के ऊपर से जाँघों पे फिसलने लगा और मेरे सारे जिस्म में एक मस्ती का एहसास छाने लगा और बे-साख्ता मेरी टाँगें खुल गयीं और मैंने महसूस किया के आँटी का हाई-हील वाला सैंडल मेरी जाँघ से फिसल के टाँगों के बीच सलवार के ऊफर से चूत पे टिक गया और वो चूत का धीरे-धीरे मसाज करने लगी और मुझे मज़ा आने लगा।

मेरी प्यासी चूत पे आँटी के सैंडल के लम्स और मसाज से मुझे अपने स्कूल का एक किस्सा याद आ गया। हम उन दिनो ग्यारहवीं क्लास में थे। सुहैल से चुदाई से पहले की बात है। हुआ ये था कि मेरी क्लासमेट, ताहिरा, मेरे पड़ोस में ही रहती थी और कभी वो मेरे घर आ जाती और हम दोनों मिल कर रात में पढ़ाई करते और एक ही बेड में सो जाते। कभी मैं उसके घर चली जाती और साथ पढ़ाई करते और मैं वहीं उसके साथ उसके बेड में ही सो जाती। एक रात वो मेरे घर आयी हुई थी और हम रात को पढ़ाई कर के मेरे बेड पे लेट गये। मेरा रूम घर में ऊपर के फ़्लोर पे था और मम्मी और डैडी का नीचे। मैं ऊपर अकेली ही रहती थी तो हमें अच्छी खासी प्राईवेसी मिल जाती थी। दोनों पढ़ाई खतम कर के सोने के लिये लेट गये। ताहिरा बहुत ही शरारती थी। उसने अपने मम्मी डैडी को चोदते हुए भी कई बार देखा था। कभी सोने का बहाना कर के कभी विंडो में से झाँक कर और फिर मुझे बताती थी कि कैसे उसके डैडी नंगे हो कर उसकी मम्मी को नंगा कर के चोदते हैं, कभी लाईट खुली रख के तो कभी लाईट बंद कर के। वो चुदाई देखती रहती थी और मुझे बता देती थी कि उसके डैडी ने आज उसकी मम्मी को कैसे चोदा और ये भी बताती कि उसकी मम्मी ने कैसे उसके डैडी के लंड को चूसा और सारी मलाई खा गयी।

हाँ तो वो मेरे साथ बेड मैं थी। हम ऐसे ही बातें कर रहे थे। वो अपने मम्मी और डैडी के चुदाई के किस्से सुना रही थी और अचानक उसने पूछा, किरन तेरा साईज़ क्या है? मैंने पूछा, कौन सा साईज़?, तो उसने मेरी चूचियों को हाथ में पकड़ लिया और पूछा अरे पागल इसका! और हँसने लगी। उसका हाथ मेरे बूब्स पे अच्छा लग रहा था और उसने भी अपना हाथ नहीं हटाया और मैंने भी उससे हाथ निकालने को नहीं कहा और वो ऐसे ही मेरी चूचियों को दबाने लगी। रात तो थी ही और हम ब्लैंकेट ओढ़े हुए थे और लाईट बंद थी। ऐसे में मुझे उसका मेरी चूचियों को दबाना अच्छा लग रहा था। मैंने उसका हाथ नहीं हटाया। मैंने बोला कि मुझे क्या मालूम!, तो उसने कहा ठहर मैं बताती हूँ तेरा क्या साईज़ है! मैंने बोला, तुझे कैसे मालूम? तो वो हँसने लगी और बोली मुझे सब पता है, और वो मेरे ऊपर उछल के बैठ गयी। मैं सीधे ही लेटी थी और वो मेरे ऊपर बैठ कर मेरे बूब्स को मसल रही थी। अब उसने मेरी शर्ट के अंदर हाथ डाल के मसलना शुरू कर दिया तो मुझे और मज़ा आने लगा। मैंने बोला, हाय ताहिरा, ये क्या कर रही है? तो वो बोली कि मेरे अब्बू भी तो ऐसे ही करते हैं मेरी अम्मी के साथ.... मैंने देखा है जब अब्बू ऐसे करते हैं तो अम्मी को बहुत मज़ा आता है..... बोल तुझे भी आ रहा है या नहीं? मैंने कहा, हाँ मज़ा तो आ रहा है...! तो उसने कहा कि बस तो ठीक है, ऐसे ही लेटी रह ना, मज़ा ले बस, और वो ज़ोर ज़ोर से मेरी चूचियों को मसलाने लगी।

मेरे ऊपर बैठे-बैठे ही उसने अपनी शर्ट भी उतार दी और मुझसे बोली कि मैं भी उसके बूब्स को दबाऊँ तो मैं भी हाथ बढ़ा के उसके बूब्स को अपने हाथ में लेकर मसलने लगी। ताहिरा की चूचियाँ मेरी चूचियों से थोड़ी सी बड़ी थीं। लाईट बंद होने से कुछ दिखायी नहीं दे रहा था, बस दोनों एक दूसरे की चूचियों को दबा रहे थे। ऐसे ही दबाते-दबाते वो मेरी टाँगों पे आगे पीछे होने लगी। हमारी चूतें एक दूसरे से मिल रही थीं और एक अजीब सा मज़ा चूत में आने लगा। अब वो मेरे ऊपर लेट गयी और मेरी चूँची को चूसने लगी। मेरे मुँह से आआआआआहहहहह निकल गयी और मैं उसके सर को पकड़ के अपनी चूचियों में घुसाने लगी। थोड़ी देर ऐसे ही चूसने के बाद वो थोड़ा आगे हटी और अपनी चूँची मेरे मुँह में घुसेड़ डाली और मैं चूसने लगी। वो भी आआआआहहहह की आवाज़ें निकाल-निकाल के मज़े लेने लगी।

अब हम दोनों मस्त हो चुके थे। वो थोड़ा सा पीछे खिसक गयी और मेरी चूत पे हाथ रख दिया तो मेरी गाँड अपने आप ही ऊपर उठ गयी। हम अब कोई बात नहीं कर रहे थे बस एक दूसरे से मज़े ले रहे थे। उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और साथ में अपना भी और खुद अपने घुटनों पे खड़ी हो के अपनी सलवार निकाल दी और नंगी हो गयी और मेरी सलवार को भी पकड़ के नीचे खिसका दिया। मैंने भी अपनी गाँड उठा के उसको निकालने में मदद की। अब हम दोनों नंगे थे। अभी हमारी चूतों पे ठीक से बाल आने भी नहीं शुरू हुए थे। एक दम से चिकनी चूतें थीं हम दोनों की। अब फिर से वो ऐसे बैठ गयी जिससे हम दोनों की चूतें टच हो रही थी। वो आगे पीछे होने लगी और बताया कि मेरी अम्मी जब अब्बू के ऊपर बैठती है तो ऐसे ही हिलती रहती है।

हमारी चूतें एक दूसरे से रगड़ खा रही थी और हमें बहुत ही मज़ा आ रहा था। दोनों की चिकनी-चिकनी बिना बालों वाली मसके जैसी चूतें आपस में रगड़ रही थी। फिर वो थोड़ा सा नीचे को हो गयी और मेरी चूत पे किस कर दिया तो मैं पागल जैसी हो गयी और मैंने उसका सर पकड़ के अपनी चूत में घुसा दिया और वो किस करते-करते अब मेरी चूत के अंदर जीभ डाल कर चूसने लगी तो मेरे जिस्म में लहू तेज़ी से सर्क्यूलेट होने लगा और दिमाग में साँय-साँय होने लगा। मुझे लगा जैसे कोई चीज़ मेरी चूत के अंदर से बाहर आने को बेताब है पर नहीं आ रही है और मुझे लगा जैसे सारा कमरा गोल-गोल घूम रहा हो। इतना सारा मज़ा आ गया और मैं अपनी चूत उसके मुँह में रगड़ती रही। थोड़ी देर में ये कंडीशन खतम हो गयी तो वो बगल में आकर लेट गयी और मुझे अपनी टाँगों के बीच में लिटा लिया और मेरा सर पकड़ के अपनी चूत में घुसा दिया। उसकी मक्खन जैसी चिकनी चूत को किस करना बहुत अच्छा लग रहा था और अब उसने मेरे सर को पकड़ के अपनी चूत में घुसाना शुरू कर दिया और मेरे मुँह में अपनी चूत को रगड़ने लगी। उसकी चूत का टेस्ट मुझे कुछ नमकीन लगा पर वो टाईम ऐसा था के हम दोनों मज़े ले रहे थे और फिर उसने मेरे मुँह में अपनी चूत को और भी तेज़ी से रगड़ना शुरू कर दिया और मुँह से अजीब आवाज़ें निकालने लगी और फिर वो शाँत हो गयी। मेरा खयाल है कि स्कूल के दिनो में ऐसी फ्रैंड्स जो एक दूसरे के घर रात बिताती हैं, ये चूचियों को दबाना या चूत को मसाज करना या किस करना सब नॉर्मल सी बात होगी क्योंकि ताहिरा ने मुझे अपनी और दो फ्रैंड्स के बारे में बताया कि वो भी ऐसे ही करती हैं। शायद ये उम्र ही ऐसी होती है।

खैर तो मैं कह रही थी कि आँटी का सैंडल वाला पैर मेरी चूत पे लगने से मेरे जिस्म में एक आग जैसी लग रही थी। मेरा दिल और दिमाग अब ताहिरा और मेरी गुजरी हुई पुरानी हर्कतों से हट कर आँटी की तरफ़ आ गया था। पता नहीं आँटी ने अब तक क्या बोला..... मैं तो अपनी और ताहिरा की गुजरी हुई बातें ही याद कर रही थी। तब के बाद आज किसी फिमेल का लम्स मेरी चूत में महसूस हो रहा था। असल में मुझे ये फीमेल और फीमेल का सैक्स यानी लेस्बियनिज़्म पसंद नहीं है पर वो वक्त ऐसा ही था कि मैं फिर से बहक गयी और आँटी को अपनी चूत दे बैठी।

हम दोनों बालकोनी में ही लगभग आमने-सामने बैठे थे। अब आँटी के सैंडल की हील सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत के लिप्स को खोल के ऊपर नीचे हो रही थी। आँटी कभी चूत के सुराख में सैंडल की हील डाल देती तो कभी क्लीटोरिस को मसल देती तो मेरा मस्ती के मरे बुरा हाल हो जाता। चूत में से लगातार जूस निकल रहा था और चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। हालांकि मैंने दूसरा पैग पीने के बाद और नहीं लिया था पर अब मेरा नशा और बढ़ने लगा था और मुझसे कुर्सी पर ठीक से बैठा नहीं जा रहा था। आँटी ने तो मुझसे भी ज्यादा व्हिस्की पी रखी थी पर उन्हें आदत थी। इसलिये नशा होने के बावजूद वो मुझसे बेहतर हालत में थीं। मुझे झूमते हुए देख कर उन्होंने मुझे सहारा देकर पहले ज़मीन पर बिठा दिया और मेरी सलवार और पैंटी उतार कर मुझे तकरीबन नंगा कर दिया और फिर मेरी चूत में उंगली करने लगीं। मैं तो नशे में मस्त थीं और बालकोनी में अपनी इस नंगी हालत की मुझे कोई फिक्र नहीं थी। मुझे पता भी नहीं चला कि कब आँटी ने भी अपने सारे कपड़े उतार दिये और मेरा हाथ लेकर अपनी चूत पे रख दिया। जब मेरा हाथ उनकी चूत में लगा तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा हाथ किसी जलती हुई भट्टी या गरम चुल्हे में लगा दिया हो..... इतनी गरम थी आँटी की चूत। मैंने भी आँटी की चूत का मसाज शुरू कर दिया और कभी अपनी उंगली अंदर डाल के सुराख में घुसेड़ देती तो कभी क्लीटोरिस को मसल देती तो आँटी के मुँह से आआआहहहह ऊऊऊऊईईईई जैसी आवाज़ें निकल जाती। दोनों ज़ोर-ज़ोर से एक दूसरे की चूतों का मसाज कर रहे थे और मज़े से दोनों की आँखें बंद हो चुकी थी।

सलमा आँटी ने मुझे लिटा दिया और मेरे पैरों के बीच में बैठ गयीं और झुक कर मेरी टाँगें और पैर चूमने-चाटने लगीं। मैंने गर्दन उठा कर देखा तो दंग रह गयी कि वो मेरे पैरों में बंधे सैंडलों को भी बड़ी शिद्दत से चाट रही थीं। फिर वो मेरी सैंडल की लंबी हील को मुँह में लेकर इस तरह चूसने लगीं जैसे लंड चूस रही हों। ये नज़ारा देख कर मेरी चूत और भी फड़कने लगी। फिर उन्होंने आगे झुककर चूत पे किस किया और अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डाल कर चाटना शुरू किया तो मेरी मुँह से आआआआआआ आआआहहहहह की सिसकरी निकल गयी और मैंने आँटी का सर पकड़ के अपनी चूत में दबा दिया और उसी वक्त मेरी अंगारे जैसी गरम चूत झड़ने लगी। मेरी आँखें बंद हो चुकी थी और मस्ती में मैं गहरी-गहरी साँसें ले रही थी। फिर आँटी मेरे ऊपर सिक्स्टी-नाईन की पोज़िशन में आ गयी और मेरे मुँह पे अपनी चूत को रगड़ने लगी तो मेरा मुँह खुल गया और सलमा आँटी की चूत का इस्तक़बाल किया। उनकी गरम चूत में से नमकीन गाढ़ा जूस निकलने लगा। मैंने आँटी की पूरी चूत को अपने मुँह में लेकर दाँतों से काट डाला तो उनके मुँह से चींख निकल गयी, आआआआहहहाह्ह ओंहओंहओंहओंहओंह आआआआआ ईईईईईईई ऊऊऊऊहहहहह, और उनकी चूत में से जूस निकलने लगा और वो झड़ने लगी। बहुत देर तक हम बिना कोई बात किये ऐसे ही सिक्स्टी-नाईन की पोज़िशन में लेटे रहे। फिर थोड़ी देर के बाद आँटी ने कहा कि आज मैं बहुत दिनों बाद इतना झड़ी हूँ और बहुत मज़ा आया! मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल था। अशफाक तो मेरी चूत में आग लगा के खुद झड़ के सो जाते थे और मैं रातों में तड़पती रहती थी। ऐसे में आँटी की चूत को चूसने से बहुत सकून मिला। उस दिन के बाद जब कभी आँटी को झड़ना होता तो वो अपनी चूत को अच्छी तरह से शेव करके मेरे पास आती और फिर हम दोनों व्हिस्की पी कर घंटों तक एक दूसरे की चूत चाटते और आपस में अपनी चूतें रगड़ कर मज़ा करते। सलमा आँटी के पास दो तरह के डिल्डो भी थे। एक तो करीब दो फुट लंबा डबल डिल्डो था जिसके दोनों तरफ लंड थे और दूसरा बेटरी से चलने वाला नौ इंच लंबा डिल्डो था। सलमा आँटी किसिंग में तो बेहद माहिर थीं और उनके रसीले होंठों को चूमना और आपस में एक दूसरे के मुँह में ज़ुबाने डाल कर चूसना मुझे बेहद अच्छा लगता था। इसके अलावा सलमा आँटी को ऊँची हील के सैंडलों का बेहद जुनून था और मेरे साथ लेस्बियन चुदाई के वक़्त खुद भी हाई हील के सैंडल पहने रहती और मुझे भी सैंडल पहने रखने को कहतीं। उन्हें मेरे पैर और सैंडल चाटने में बेहद मज़ा आता था और फिर मुझे भी इसमें मज़ा आने लगा।

हकीकत में, उसके कुछ ही दिनों बाद मेरी चुदाई अपने बॉस के साथ होने लगी थी लेकिन मैं आँटी को इस बात का पता नहीं चलने देना चाहती थी। मैं अपना हर सीक्रेट उन्हें नहीं बताना चाहती थी, इसी लिये आँटी से नहीं कहा और उनके सामने ऐसी बनी रहती जैसे मेरी चूत बरसों कि प्यासी हो और उनके साथ मुझे बहुत ही मज़ा आता था।

हुआ यूँ कि मैं घर में अकेले रहते-रहते बोर होने लगी थी। सिवाय खाना पकाने के और कोई काम ही नहीं था। हर दूसरे दिन एक धोबन आ के हमारे कपड़े धो जाया करती थी। बोर होने की वजह से मैंने अशफाक से कहा कि अगर वो बुरा ना माने तो मैं कोई जोब कर लूँ ताकि मैं बिज़ी रह सकूँ। अशफाक को भी अपने बिज़नेस से फ़ुर्सत नहीं मिलती थी और अब तक तो उसको पता चल ही गया था कि मेरी चूत उसके लंड से और उसकी चुदाई से मुतमाईन नहीं है तो उसने कहा, ठीक है मेरा एक फ्रैंड है, वो अपनी खुद की कंपनी चलाता है, मैं उससे बात कर लूँगा, तुम घर बैठे ही उसका काम कर देना ताकि तुम बिज़ी भी रहो और तुम्हारा दिल भी लगा रहे। फिर एक दिन अशफाक ने बताया कि उसने अपने दोस्त को डिनर पे बुलाया है और साथ में काम की भी बात कर लेते हैं, तो मैं खुश हो गयी और अच्छे से अच्छा खाना बना के अपने होने वाले बॉस को खिलाना चाहती थी इसलिये मैं किचन में डिनर की तैयारी में बिज़ी हो गयी।

रात के खाने के टाईम से पहले ही अशफाक का दोस्त आ गया। कॉलबेल बजी तो अशफाक ने दरवाजा खोला और हेलो, हाऊ आर यू, कह कर अंदर बुला लिया। मैं देख के दंग रह गयी। वो तो एक अच्छा खासा स्मार्ट आदमी था। तकरीबन छः फ़ुट के करीब उसकी हाईट होगी, गोरा रंग, चौड़े कंधे। हट्टा कट्टा मज़बूत जवान लग रहा था। उसे देखते ही मेरी चूत में एक अजीब एक्साइटमेंट सी होने लगी और मुझे लगा के मेरी चूत गीली हो रही है। मुझे खुशी हुई कि मैंने उस दिन ठीक से मेक-अप करके चूड़ीदार सलवार और स्लीवलेस कमीज़ पहनी थी जिसका गला भी लो-कट था। खुशकिस्मती से मैंने चार इंच उँची हील के सैंडल पहने हुए थे जिससे मेरी हाईट बढ़ कर पाँच फुट सात इंच के करीब हो गयी थी उसकी ऊँचाई के मुनासिब लग रही थी। अशफाक ने इंट्रोड्यूस करवाया और कहा कि ये मेरे बचपन का दोस्त और क्लासमेट सुशांत कुमार श्रीवास्तव है जो अपनी फायनेंस कंपनी चलाता है। दोनों स्कूल से कॉलेज खतम होने तक क्लास-मेट रहे हैं और एक दूसरे से बहुत ही फ्री हैं। ऑफिस में वो एस-के के नाम से फेमस है। और फिर अशफाक ने कहा, एस-के! ये मेरी वाइफ है किरन! हम दोनों ने एक दूसरे को सलाम किया और हम सब अंदर ड्राईंग रूम में आ के सोफ़े पे बैठ गये। अशफाक और एस-के बैठ के व्हिस्की पीते हुए बातें करने लगे। अशफाक के कहने पर मैंने भी एक पैग पिया और फिर मैं खाना टेबल पे रखने के लिये चली गयी।

टेबल रेडी हो गयी तो मैंने दोनों से कहा कि चलिये डिनर रेडी है! वाश बेसिन पे हाथ धो के वो दोनों आ गये। सब मिलकर खाना खाने लगे। एस-के मेरे बनाये हुए खाने की बहुत तारीफ कर रहे थे। खाने में परांठे, दम का चिकन, आलू गोश्त का कोरमा, कबाब, टमाटर की चटनी, पुलाव बना के उस पे उबले अंडों को आधा काट कर सजा के रखा था और कस्टर्ड और आईसक्रीम थी। खाना सच में बहुत लज़ीज़ था। अशफाक कभी मुझे कुछ देता तो कभी एस-के कि प्लेट में कुछ डाल देता। खाना खाने के बाद फिर से वो दोनों ड्राईंग रूम में जा के सोफ़े पे बैठ गये और मैं टेबल साफ़ कर के वहीं आ गयी और हम सब साथ बैठ के व्हिस्की पीने लगे और बातें करने लगे।

अशफाक ने कहा, यार एस-के! देखो तो किरन घर में अकेली रहती है और अकेले रहते-रहते बोर हो गयी है..... वो अपने आप को मसरूफ रखने के लिये कोई काम करना चाहती है...... तुम्हारे पास अगर कोई ऐसा काम हो तो बताना।

एस-के ने कहा, ये तो बहुत अच्छी बात है, मेरे पास डेटा एंट्री करने का काम पड़ा हुआ है। मेरे पास डेटा एंट्री का जो क्लर्क था वो चला गया। किरन ऑफिस से इनवोयस और वाऊचर घर ला सकती है और घर बैठे-बैठे ही मेरा काम कर सकती है। ऑफिस तो तुम्हारे घर के करीब ही है। किरन ऑफिस आके, डेली या वीकली, काम लेकर आ सकती है और घर बैठे ही काम कर सकती है। मैं शुरू में डेली आके चेक करता रहुँगा और उसको गाईड करता रहुँगा। मेरे पास ऑफिस में एक एक्स्ट्रा कंप्यूटर भी है, मैं वो भी किरन के पास भेज दुँगा..... यहीं किसी रूम में रख लेना और वो आराम से घर बैठे ही काम कर लेगी।

अशफाक ने कहा कि ये तो बहुत अच्छी बात है, किरन कल ही तुम्हारे ऑफिस अआ जायेगी और काम भी देख लेगी!

दूसरे दिन मैं बेहद अच्छे से तैयार हो के एस-के के ऑफिस गयी। मैं साड़ी कुछ खास मौकों पर बहुत कम पहनती हूँ लेकिन उस दिन मैंने फिरोज़ी रंग की साड़ी इस तरह बांधी थी की मेरी पतली कमर और नाभी दिखायी दे और मेरा स्लीवलेस ब्लाऊज़ भी काफी लो-कट और लगभाग बैकलेस था। मैंने ब्रा नहीं पहनी थी क्योंकि मेरा ब्लाऊज़ किसी ब्रा से ज्यादा बड़ा नहीं था। साथ ही मैं चार इंच ऊँची हील के काले रंग के स्ट्रैपी सैंडल पहनना नहीं भूली क्योंकि एक तो इससे मेरी हाईट पौने छ: फुट के करीब हो गयी थी और दूसरा ये कि उँची हील के सैंडलों से मेरा फिगर और कयामत-खेज़ हो गया था क्योंकि मेरी छातियाँ बाहर को उघड़ रही थीं और चूतड़ भी और ज्यादा उभर आये थे और चाल में भी नज़ाकत आ गयी थी। मैंने अपने लंबे बाल खुले ही रखे थे।

ऑफिस अच्छा खासा बड़ा था और नीट और क्लीन था। सारे ऑफिस में कार्पेट बिछी हुई थी और एस-के का ऑफिस तो एक दम से शानदार था। एक बहुत बड़ी सेमी-सर्क्यूलर टेबल थी जिसके एक साईड में छोटी सी कंप्यूटर टेबल भी थी जिस पर कंप्यूटर, एल-सी-डी मॉनिटर और नीचे प्रिंटर भी रखा हुआ था। डोर को अंदर से लॉक करने ये खोलने के लिये उसके पास आटोमेटिक बटन था। उसके रूम के बाहर एक छोटा सा कैमरा था जिससे उसको पता चल जाता था कि बाहर कौन वेट कर रहा है और उसको मिलना हो तो वो आटोमेटिक लॉक का बटन प्रेस कर देता जिससे दरवाजा खुल जाता और फिर अंदर से खुद-ब-खुद बंद भी हो जाता। ऑफिस सेंट्रली एयर कंडिशंड था। सब मिलाकर बहुत शानदार ऑफिस था। ऑफिस का सारा स्टाफ अपने-अपने काम में बिज़ी था।

मैं ऑफिस गयी तो एस-के ने मुझे फौरन अंदर बुला लिया और अपनी चेयर से खड़ा हो के मुझसे शेक हैंड किया तो उसका गरम हाथ मेरे हाथ में आते ही मेरे जिस्म में बिजली दौड़ने लगी और मेरी चूत गीली होने लगी। मैंने कहा कि सर आपका ऑफिस तो वंडरफुल है, एक दम से शानदार। उसने कहा कि देखो किरन मुझे ये सर वगैरह कहने की ज़रूरत नहीं है। तुम मेरे लिये किरन हो और मैं तुम्हारे लिये सुशांत, तुम मुझे सब की तरह एस-के भी कह सकती हो लेकिन अगली बार से सर नहीं कहना, ठीक है? मैंने मुस्कुराते हुआ कहा, ठीक है सर! और हम दोनों हँस पड़े। एस-के ने कॉफी के लिये ऑर्डर दे दिया जो थोड़ी ही देर में आ गयी। कैपेचिनो कॉफी की फ़र्स्ट क्लास खुशबू से सारा ऑफिस महक उठा। दोनों कॉफी पीने लगे। उसके बाद उसने किसी को बुला के एक कंप्यूटर, मॉनिटर और प्रिंटर अपनी कार में रखने के लिये कहा और थोड़ी देर के बाद वो मुझे अपनी कार में लेकर मेरे घर आ गया।

हमारे घर में एक स्पेयर रूम भी है जिस में कंप्यूटर रख दिया गया। कंप्यूटर की स्पेशल टेबल तो नहीं है लेकिन घर की ही एक टेबल पे रख दिया गया और एस-के ने कंप्यूटर के कनेक्शन लगा दिये और कंप्यूटर स्टार्ट कर के मुझे बता दिया। कनेक्शन लगाने के बाद वो हाथ धोने के लिये बाथरूम में चला गया तो मैं कॉफी बनाने लगी। हम दोनों ड्राईंग रूम में आ के बैठ गये और कॉफी पीने लगे। एस-के और मैं इधर-उधर की बातें करने लगे। वो अपने स्कूल और कॉलेज के किस्से सुनाने लगे कि कैसे वो कॉलेज में बदमाशियाँ किया करते थे और लड़कियों को छेड़ते रहते थे। मैंने कहा कि आप पर तो लड़कियाँ मरती होंगी! तो वो हँस पड़ा और कहा नहीं ऐसी बात नहीं है, बस हमारे कुछ क्लासमेट और कुछ जूनियर लड़कियाँ थीं, हम (एक आँख दबा के बोला) मस्ती करते थे। इतनी देर में लंच का टाईम हो गया तो मैंने कहा कि यहीं रुक जायें और साथ में खाना खा कर ही जाना तो उसने कहा कि किरन तुम जैसी क्यूट लड़की के साथ किसे लंच या डिनर करना पसंद न होगा, पर सच में मुझे थोड़ा सा काम है..... हम किसी और दिन लंच या डिनर ले लेंगे साथ में। जब उसने मुझे क्यूट लड़की कहा तो मेरा चेहरा शरम से लाल हो गया जिसको उसने भी नोट किया। उसने कहा कि मैं कल ऑफिस आ जाऊँ, तब तक वो सारी चीज़ें रेडी रखेगा मेरे लिये।

दूसरे दिन मैं फिर सजधज कर ऑफिस गयी तो उसने मुझे अपने कंप्यूटर के प्रोग्राम पर ही बता दिया के कैसे एंट्रिज़ करनी हैं और कहा कि ये प्रोग्राम, मेरे पास जो कंप्यूटर भेजा है, उस पर भी है। काम उतना मुश्किल नहीं था, जल्दी ही समझ में आ गया। हाँ कुछ चीज़ें ऐसी थी जो कि समझ में नहीं आ रही थी। कुछ केलक्यूलेशन थे कुछ एडिशन और सबट्रेक्शन थे पर उसने कहा कि जो भी मैं कर सकती हूँ करूँ और जो मेरी समझ में नहीं आ रहा है, वो लंच टाईम पे मेरे पास आ कर मुझे समझा देगा। मैं इनवोयस का बंडल उठा के घर चली आयी।

ऑफिस से घर, तकरीबन पंद्रह-बीस मिनट की वॉक है। घर आने के बाद सारे इनवोयस और वाऊचर को अपने सामने रख कर पहले तो ऐसे ही समझने की कोशिश करती रही और थोड़ी देर के बाद एंट्री करना शुरू किया। नया-नया काम शुरू किया था तो काम करने में मज़ा आ रहा था और जोश के साथ काम कर रही थी। मुझे टाईम का पता ही नहीं चला। शाम के साढ़े तीन हो गये और जब एस-के ने बेल बजायी तो मैंने टाईम देखा। उफ़ ये तो साढ़े तीन हो गये।

मैंने डोर खोला। एस-के अंदर आ गया और हम दोनों कंप्यूटर वाले रूम में चले आये। पता नहीं एस-के की पर्सनैलिटी में क्या था कि मैं उसको देखते ही अपने होश खो बैठती और गीली होना शुरू हो जाती। उसने काम देखना शुरू किया। कुछ मैंने गलत किया था कुछ सही किया था। उसने केलक्यूलेशन वगैरह करना सिखाया और कुछ देर बैठ कर कॉफी पी कर चला गया। जितनी देर वो मेरे पास बैठा रहा, उसके जिस्म से हल्की उठती हुई पर्फ़्यूम की खुशबू से मैं मस्त होती रही। उसके साथ बैठना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैं तो ये सोचने लगी के एस-के यहीं मेरे साथ ही रहे तो कितना अच्छा हो और मेरी गरम और प्यासी चूत को चोद-चोद के अपनी क्रीम चूत के अंदर डाल के उसकी प्यास बुझा दे और मेरी गरम चूत को ठंडा कर दे। पर ये मुमकिन नहीं था। एक तो वो मैरिड था और रात मेरे साथ नहीं रह सकता था, दूसरे ये कि ऑफिस के दूसरे काम भी तो देखने होते हैं। मैं एस-के को अपने दिल की बात ना कह सकी पर मेरा दिल चाह रहा था के वो मेरे साथ ही रहे। वो मेरा काम देख के और कुछ काम समझा के अपने घर चला गया और मैं पता नहीं क्यों उदास हो गयी।

इसी तरह से एक हफ़्ता गुज़र गया। कोई खास बात नहीं हुई बस ये कि मैं उसके लिये हर रोज़ अच्छे से तैयार होती और जितनी देर वो मेरे करीब रहता, मैं मस्त रहती और पूरे मूड में रहती, पर उसके चले जाने के बाद मैं उदास हो जाती। मैं ऑफिस से तकरीबन दो हफ़्तों का काम ले आयी थी तो ऑफिस भी नहीं जाना था। सुबह उठ के नाश्ता कर के, फिर अच्छे से तैयार होकर, काम शुरू करती और काम के बीच-बीच में अपने काम भी करती रहती, जैसे खाना बनाना या और भी छोटे-मोटे काम। धोबन तो हर दूसरे दिन आ कर कपड़े धो जाया करती थी। इसी तरह से रुटीन चलने लगी। सलमा आँटी को भी पता चल गया था के मैं दिन में बिज़ी रहती हूँ तो वो भी मुझे दिन के टाईम पे डिस्टर्ब नहीं करती और कभी उनका मन करता तो वो शाम को या रात को किसी टाईम पे आ जाती और गप्पें लगाने लगती और साथ में हम वही करते जो बालकोनी में किया था और फिर आँटी चली जाती और मैं मस्त हो के सो जाती। पहले भी जब अशफाक मेरी चूत में आग लगा देता और बुझा नहीं पता तो मैं कभी-कभी बैंगन, मोमबत्ती या लंड की शक्ल की कोई और चीज़ अपनी चूत में डालकर मज़ा ले लेती थी पर आजकल काम में बिज़ी रहने के बावजूद मेरी ये हरकत बहुट बढ़ गयी थी। कंप्यूटर पर डेटा ऐंट्री करते-करते एस-के की याद आ जाती तो उसके लंड का तसव्वुर करते हुए मैं खुद ही अपनी चूत को कोई भी लंड के शक्ल की चीज़ से चोद-चोद कर झड़ जाती और फिर अपना काम में लग जाती।

एक दिन ऐसे हुआ के मैं काम कर रही थी और एस-के आ गये और मेरे पीछे खड़े हो कर काम देखने लगे। कभी-कभी कोई मिस्टेक हो जाती तो बता देते। मैं काम में बिज़ी थी। बीच में मुड़ कर देखा तो एस-के मेरे पीछे नहीं थे। मैंने सोचा कि शायद कुछ काम होगा और चले गये होंगे और मैं उठ कर बाथरूम में गयी। बाथरूम का डोर खोल के अंदर पैर रखते ही एक शॉक लगा। एस-के वहाँ खड़ा पेशाब कर रहा था और उसने अपना इतना मोटा गधे जैसा बे-खतना लौड़ा हाथ में पकड़ा हुआ था। पूरा हाथ में पकड़ने के बाद भी उसका लंड उसके हाथ से बाहर निकला हुआ था और अभी वो इरेक्ट भी नहीं था। मैं एक ही सेकेंड के अंदर पलटी और ओह सॉरी कह कर बाहर निकल गयी और सोचने लगी के अभी उसका लंड अकड़ा नहीं है तो ये हाल है उसके लौड़े का और जब अकड़ जायेगा तो क्या हाल होगा और ये तो लड़कियों की चूतें फाड़ डालेगा। इसी सोच के साथ मैं दूसरे बाथरूम में चली गयी और पेशाब करके वापस आ गयी और अपने काम में लग गयी। एस-के फिर से मेरे पीछे आ कर खड़ा हो गया और मेरा काम देखने लगा। मैं काम तो कर रही थी पर मेरा सारा ध्यान उसके लंड में था और उसका लंड जैसे ही मेरे ज़हन में आया, मेरी चूत गीली होनी शुरू हो गयी। एस-के को भी पक्का यकीन था के मैंने उसके लंड को देख लिया है और औरों की तरह मैं भी हैरान रह गयी हूँ।

मैं काम में बिज़ी थी और वो पीछे खड़ा था। अब उसने मेरे कंधे पे हाथ रख दिया और कहा कि किरन तुम्हारा ध्यान किधर है? मैं घबड़ा गयी और सोचने लगी के उसको कैसे पता चला कि मैं दिल में क्या सोच रही हूँ। मैं खामोश रही तो उसने कहा कि देखो तुमने कितनी एंट्रिज़ गलत कर दी हैं। मैं और घबरा गयी क्योंकि सच में मेरा दिल काम में था ही नहीं। मेरा दिमाग तो एस-के के लंड में ही अटक के रह गया था। मैं घर में होने के बावजूद मैं काफ़ी सजधज कर और अच्छे कपड़े पहन कर काम करती थी क्योंकि एस-के कभी भी आ सकता था। लो-कट गले वाले स्लीवलेस और टाईट सलवार-कमीज़ और साथ में उँची हील के सैंडल पहनना नहीं भूलती थी। कभी-कभार साड़ी भी पहनती थी|

उस दिन भी मैंने स्काई ब्लू कलर की स्लीवलेस कमीज़ और सफेद सलवार पहनी थी जो मेरे जिस्म पे बहुत अच्छी लग रही थी। मेरी कमीज़ का गला भी काफी लो-कट था और चूछियों का क्लीवेज काफी हद तक नुमाया हो रहा था। मेरे कंधे खुले हुए थे और एस-के के दोनों हाथ मेरे कंधों पे थे। उसके गरम