मैं हसीना गज़ब की

लेखिका: शहनाज़ खान


भाग - १०


ताहिर अज़ीज़ खान जी का लंड उनकी घनी झाँटों के बीच खड़ा हुआ झटके खा रहा था। मैंने उसे एक बार अपनी मुठ्ठी में लेकर उसे ऊपर से नीचे तक सहलाया और फिर छोड़ दिया। मेरी इस हरकत से उनके लंड के ऊपर एक बूँद प्री-कम चमकने लगा। ताहिर अज़ीज़ खान जी ने अपने सूखते हुए होंठों पर अपनी जीभ फ़िरा कर मुझे स्कर्ट उतारने के लिये इशारा किया। मैंने स्कर्ट के इलास्टिक में अपनी अँगुलियाँ डाल कर उनकी तरफ़ देखा। उनकी आँखें मेरी स्कर्ट से चिपकी हुई थीं। वो उतावले हुए जा रहे थे। मैंने उन्हें कुछ और परेशान करने का सोचा। मैंने अपनी स्कर्ट थोड़ी सी ही खिसकायी जिससे मेरी चूत अभी भी नंगी नहीं हुई थी। थिरकते हुए मैं फिर उन्हें चिढ़ाने के लिये उनके नज़दीक गयी और अपनी एक टाँग उठा कर अपना पैर उनकी गोद में रख दिया और उनके खड़े लंड को अपने सैंडल के तलुवे और ऐड़ियों से सहलाने लगी। उनके लंड का प्री-कम छलक कर मेरे पैरों के नाखुनों और सैंडल की पट्टियों पर गिर पड़ा। फिर मैं थिरकते हुए उनसे दूर हटी और मैंने उनकी तरफ़ अपनी पीठ कर ली और अपनी स्कर्ट को धीरे-धीरे नीचे कर दिया। वो मेरी मोटी-मोटी गाँड को ललचायी नजरों से देख रहे थे। मैं अब खड़े होकर अपने जिस्म को म्युज़िक पर थिरकाने लगी। कुछ देर बाद मैं धीरे-धीरे सामने की ओर मुड़ी। मेरी नंगी चूत अब उनके सामने थी। वो एक टक मेरी सिलकी चिकनी चूत को निहार रहे थे।

अब तो उन्हें अपने ऊपर कंट्रोल करना मुश्किल हो गया। वो उठे और मुझे बाँहों में लेकर मेरे साथ कमर हिलाने लगे। वो मेरे पीछे से सटे हुए थे। हमारे नंगे जिस्म एक दूसरे से रगड़ खा रहे थे। मेरी चूत गीली हो गयी थी। उनका लंड मेरे दोनों नितंबों के बीच जगह तलाश कर रहा था। उनके हाथ मेरे जिस्म पर फ़िसल रहे थे। सामने आदमकद आईने में मैंने हम दोनों के अक्स को एक दूसरे से गुंथे हुए देखा तो उत्तेजना और बढ़ गयी। उन्होंने मुझे आईने में देखते हुए देखा तो मुस्कुरा कर मेरी दोनों बगलों में अपने हाथ डाल कर सामने मेरे मम्मों को सहलाने लगे। मैं अपने सुंदर मम्मों को ताहिर अज़ीज़ खान जी के हाथों से मसले जाते देख रही थी। मेरी पीठ उनके सीने से लगी हुई थी। मैंने अपना सिर पीछे की ओर कर के उनके कंधे पर रख दिया। साढ़े-चार इंच ऊँची हील के सैंडल पहने होने से मेरा कद उनके कद से मेल खा रहा था। उनके हाथ मेरे दोनों बूब्स को बुरी तरह मसल रहे थे। आईने में हमारा ये पोज़ बड़ा ही सैक्सी लग रहा था। उन्होंने मेरे दोनों निप्पल अपनी अँगुलियों से पकड़ कर आगे की तरफ खींचे। मेरे दोनों निप्पल खिंचाव के कारण लंबे-लंबे हो गये थे। उनके मसलने के कारण दोनों बूब्स की रंगत सफ़ेद से गुलाबी हो गयी थी। उनकी गरम साँसें मैं अपनी गर्दन पर इधर से उधर फिरते हुए महसूस कर रही थी। उनके होंठ मेरी गर्दन के पीछे, जहाँ से मेरे बाल शुरू हो रहे थे, वहाँ जा कर चिपक गये। फिर उन्होंने मेरी गर्दन पर हल्के से दाँत गड़ाये। उनके होंठ मेरी गर्दन पर घूमते हुए मेरे बाँय कान तक आये। वो मेरे बाँय कान के ऊपर अपने होंठ फिराने लगे। औरत का कान एक जबरदस्त उत्तेजक हिस्सा होता है। मैं उनकी हरकतों से उत्तेजित हो गयी। मैंने अपने हाथ में पकड़ी व्हिस्की की बोतल को टाँगों के बीच अपनी चूत पर सख्ती से दाब रखी थी। मेरे मुँह से उत्तेजना में टूटे हुए शब्द निकल रहे थे। मैंने अपने होंठों को दाँतों में दबा रखा था, फिर भी पता नहीं किस कोने से मेरे मुँह से आआऽऽऽहहऽऽऽ ममऽऽऽऽ ऊऊऽऽऽहहऽऽऽ की आवाजें निकल रही थीं। फिर उन्होंने कान पर अपनी जीभ फ़िराते हुए कान के निचले हिस्से को अपने मुँह में भर लिया और हल्के-हल्के से उसे दाँत से काटने लगे। मेरे हाथ से बोतल नीचे छूट गयी और मैंने उनके सिर को अपने हाथों से थाम लिया। हमारे जिस्म संगीत की धुन पर एक दूसरे से सटे हुए इस तरह से थिरक रहे थे कि मानो दो नहीं एक ही जिस्म हों। उन्होंने मुझे अपनी ओर घुमाया और मेरे बूब्स पर अपने होंठ रख कर मेरे निप्पल को चूसने लगे। इसी तरह की हरकतों की ख्वाहिश तो तब से मेरे मन में थी जब से मैंने उन्हें पहली बार देखा था। मुझे उनके साथ पैरिस आने का न्यौता कबूल करते समय ही पता था कि इस टूर में हम दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता जन्म लेने वाला है। मैं उसके लिये शुरू से ही उतावली थी। मैं भी उनको अपनी ओर से पूरा मज़ा देना चाहती थी। मैं भी उनकी छातियों पर झुक कर उनके छोटे-छोटे निप्पलों को अपने दाँतों से कुरेदने लगी। मैंने अपनी जीभ से उनके निप्पलों को सहलाना शुरू किया तो उत्तेजना से उनके निप्पल भी खड़े हो गये। मैं उनके बालों से भरे सीने को सहला रही थी। मैंने अपने दाँतों को उनके सीने में गड़ा कर जगह-जगह अपने दाँतों के निशान छोड़ दिये। मैंने कुछ देर तक उनके निप्पल से खेलने के बाद अपने होंठ नीचे की ओर ले जाते हुए उनकी नाभी में अपनी जीभ घुसा दी और उनकी नाभी को अपनी जीभ से चाटने लगी। वो मेरे खुले बालों में अपनी अँगुलियाँ फ़िरा रहे थे। फिर मैं घुटनों के बल उनके सामने बैठ गयी और उनके लंड को अपने हाथों में लेकर निहारने लगी। मैंने मुस्कुरा कर उनकी ओर देखा। उनके खतना लंड का गोल-मटोल टोपा गुब्बारे की तरह फूला हुआ था। मैंने उसकी टिप पर अपने होंठ लगा दिये। एक छोटा सा किस लेकर अपने चेहरे के सामने उनके लंड को सहलाने लगी। उनके लंड को अपने मुँह में लेने की इच्छा तो हो रही थी लेकिन मैं उनके रिक्वेस्ट करने का इंतज़ार कर रही थी। मैं उनके सामने ये नहीं शो करना चाहती थी कि मैं पहले से ही कितना खेली खायी हुई हूँ।

इसे मुँह में लेकर प्यार करो!

ऊँऽऽ नहीं ये गंदा है। मैंने लंड को अपने से दूर करने का नाटक किया, छी! इससे तो पेशाब भी किया जाता है। इसे मुँह में कैसे लूँ?

तूने अभी तक जावेद के लंड को मुँह में नहीं लिया क्या?

नहीं वो ऐसी गंदी हर्कतें नहीं करते हैं।

ये गंदा नहीं होता है.... एक बार तो लेकर देख! ठीक उसी तरह जैसे चोकोबार आईसक्रीम को मुँह में लेकर चाटती हो। असलियत में तो मैं उस लंड को मुँह में लेने के लिये इतनी बेकरार थी की अगर उसमें से तो पेशाब भी निकल रहा होता तो मैं उसे आब-ए-ज़मज़म समझ कर पी जाती पर फिर भी मैं जानबूझ कर झिझकते हुए अपनी जीभ निकाल कर उनके लंड के टोपे पर फिराने लगी। मेरे बाल खुले होने की वजह से उनको देखने में परेशानी हो रही थी। इसलिये उन्होंने मेरे बालों को पकड़ कर जूड़े के रूप में बाँध दिया। फिर मेरे चेहरे को पकड़ कर अपने लंड को मेरी ओर ठेलने लगे। मैंने उनकी हरकत के इख्तयार में अपना मुँह खोल दिया। उनका लंड आधा अंदर जा कर मेरे गले के दर में फंस गया।

बसऽऽ और नहीं जायेगा! मैंने कहना चाहा मगर मुँह से बस, ऊँऽऽऽ ऊँऽऽऽ जैसी आवाज निकली। इसलिये मैंने उनके लंड को अपने मुँह में लिये-लिये ही उन्हें इशारा किया। वो अपने लंड को अब आगे पीछे करने लगे। मैं उनके लंड को अपने मुँह से चोद रही थी और साथ-साथ उनके लंड पर अपनी जीभ भी फ़िरा रही थी।

पूरा ले! मज़ा नहीं आ रहा है! पूरा अंदर जाये बिना मज़ा नहीं आयेगा। उन्होंने अपने लंड को बाहर खींचा।

इतना बड़ा लंड पूरा कैसे जायेगा? मेरा मुँह मेरी चूत जैसा तो है नहीं कि कितना भी लंबा और मोटा हो सब अंदर ले लेगा! मैंने कहा।

उन्होंने मुझे उठाया और बिस्तर पर ले जाकर लिटा दिया। मैं पीठ के बल लेट गयी। अब उन्होंने मेरे जिस्म को कंधों से पकड़ कर बिस्तर से बाहर की तरफ़ खींचा। अब मेरा सिर बिस्तर से नीचे लटकने लगा था। हाँ ये ठीक है.... अब अपने सिर को बिस्तर से नीचे लटकाते हुए अपने मुँह को खोल! वो बोले। मैंने वैसा ही किया। इस पोज़िशन में मेरा मुँह और गले का छेद एक सीध में हो गये थे। ससुर जी अब मेरे मुँह में अपने लंड को डालते हुए मुझसे बोले, एक जोर की साँस खींच अंदर! मैंने वैसा ही किया। वो अपने लंड को अंदर ठेलते चले गये। उनका मोटा लंड सरसराता हुआ गले के अंदर घुसता चला गया। पहले तो उबकायी जैसी आयी। लेकिन उनका लंड फंसा होने के कारण कुछ नहीं हुआ। उनका लंड अब पूरा अंदर घुस चुका था। उनके लंड के नीचे लटकते दोनों गेंद अब मेरी नाक को दाब रहे थे। एक सेकेंड इस हालत में रख कर उन्होंने वापस अपने लंड को बाहर खींचा। उनके लंड ने जैसे ही गले को खाली किया, मैंने अपने फ़ेफ़ड़ों में जमी हवा खाली की और वापस साँस लेकर उनके अगले धक्के का इंतज़ार करने लगी। उन्होंने झुक कर मेरे दोनों मम्मों को अपनी मुठ्ठी में भर लिया और उन्हें मसलते हुए वापस अपने लंड को जड़ तक मेरे मुँह में ठेल दिया। फिर एक के बाद एक, धक्के मारने लगे। मैंने अपनी साँसें उनके धक्कों के साथ एडजस्ट कर ली थी। हर धक्के के साथ मेरे मम्मों को वो बुरी तरह मसलते जा रहे थे और साथ-साथ मेरे निप्पलों को भी उमेठ देते। जैसे ही वो मेरे निप्पलों को पकड़ कर खींचते, मेरा पूरा जिस्म कमान की तरह ऊपर की ओर उठ जाता। काफी देर तक यूँ ही मुँह में ठेलने के बाद उन्होंने अपना लंड बाहर निकाल लिया। और ज्यादा देर तक चूसने से हो सकता है मुँह में ही निकल जाता। उनका लंड मेरे थूक से गीला हो गया था और चमक रहा था। उनके उठते ही मैं भी उठ बैठी। उन्होंने मुझे बिस्तर से उतार कर वापस अपने आगोश में ले लिया। मैंने उनके सिर को अपने हाथों से थाम कर उनके होंठों पर अपने होंठ सख्ती से दाब दिये। मेरी जीभ उनके मुँह में घुस कर उनकी जीभ से खेलने लगी। साढ़े-चार इंच ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने होने के बावजूद मुझे अपनी ऐड़ियों को और ऊपर करना पड़ा जिससे मेरा कद उनके कद के कुछ हद तक बराबर हो जाये। मेरे सैंडलों के ऐड़ियाँ अब ज़मीन से ऊपर उठी हुई थी और मेरे पंजे मुड़े हुए थे। फिर मैंने अपने दोनों मम्मों को हाथों से उठा कर उनके सीने पर इस तरह रखा कि उनके निप्पलों को मेरे निप्पल छूने लगे। उनके निप्पल भी मेरी हरकत से एक दम कड़े हो गये थे। मेरे निप्पल तो पहले से ही उत्तेजना में तन चुके थे। मैंने अपने निप्पल से उनके निप्पल को सहलाना शुरू किया। उन्होंने मेरे नितंबों को सख्ती से पकड़ कर अपने लंड पर खींचा।

मममऽऽऽ शहनाज़ मीऽऽऽऽ ऊँमऽऽऽऽ। तुम बहुत सैक्सी हो। अब अफ़सोस हो रहा है कि तुम्हें इतने दिनों तक मैंने छुआ क्यों नहीं। ओफफ‍ओहहऽऽऽ तुम तो मुझ पागल कर डालोगी। आआआऽऽऽहहहहऽऽऽ हाँऽऽऽ ऐसे हीऽऽऽ वो अपने लंड को मेरी चूत के ऊपर रगड़ रहे थे। कुछ देर तक हमारे एक दूसरे के जिस्म को रगड़ने के बाद उन्होंने मुझे बिस्तर के पास ले जाकर मेरे एक पैर को उठा कर बिस्तर के ऊपर रख दिया। अब घुटनों के बल बैठने की उनकी बारी थी। वो मेरी टाँगों के पास बैठ कर बिस्तर पर रखे मेरे पैर और उसके सैंडल की पट्टियों पर अपनी जीभ फिराने लगे। मुझे ऊँची हील वाले सैक्सी सैंडल पहनना बहुत अच्छा लगता है, इसलिये मैं हरदम सैंडल पहने रहती हूँ। ज्यादातर मरदों की तरह शायद उन्हें भी हाई-हील सैंडल निहायत पसंद थे, इसलिये ताहिर अज़ीज़ खान जी अपने जीभ मेरे पंजों, पैरों और सैंडलों पर फिराने लगे। फिर उनकी जीभ मेरी टाँगों और जाँघों से होती हुई मेरी टाँगों के जोड़ पर घूमने लगी। उनकी जीभ मेरे घुटने पर से धीरे-धीरे आगे बढ़ती हुई मेरी टाँगों के जोड़ तक पहुँची। उन्होंने अपनी जीभ से मेरी चिकनी चूत को ऊपर से चाटना शुरू किया। वो अपने हाथों से मेरी चूत की फाँकों को अलग करके मेरी चूत के भीतर अपनी जीभ डालना चाहते थे।

नहीं! ऐसे नहीं! कहकर मैंने उनके हाथों को अपने जिस्म से हटा दिया और मैंने खुद एक हाथ की अँगुलियों से अपनी चूत को खोल कर दूसरे हाथ से उनके सिर को थाम कर अपनी चूत से सटा दिया। लो अब चाटो इसे!

उनकी जीभ किसी छोटे लंड की तरह मेरी चूत के अंदर बाहर होने लगी। शराब के नशे में मैं बहुत उत्तेजित हो गयी थी। मैं उनके बालों को अपनी मुठ्ठी में पकड़ कर उन्हें खींच रही थी, मानो उन्हें उखाड़ ही देना चाहती थी। दूसरे हाथों की अँगुलियों से मैंने अपनी चूत को फैला रखा था और साथ-साथ एक अँगुली से अपनी क्लीटोरिस को सहला रही थी। मैंने सामने आईने में देखा तो हम दोनों की हालत को देख कर अपने ऊपर कंट्रोल नहीं कर पायी और मेरे जिस्म से लावा बह निकला। मैंने सख्ती से दूसरे हाथों की मुठ्ठी में उनके बालों को पकड़े हुए उनके सिर को अपनी चूत में दाब रखा था। उनकी जीभ मेरी चूत से बहती हुई रस धारा को अपने अंदर समा लेने में मसरूफ हो गयी। काफी देर तक इसी तरह चूसवाते हुए जब मेरी बर्दाश्त से बाहर हो गया तो मैंने उनके सिर को अपनी चूत से खींच कर अलग किया। उनके सिर के कईं बाल टूट कर मेरी मुठ्ठी में आ गये थे। उनके होंठ और ठुड्डी मेरे रस से चमक रहे थे। ऊऊहहऽऽ ताआऽऽहिर! अब मैंने वासना और शराब के नशे में अपने खिताब में चेंज लाते हुए उन्हें ऊपर अपनी ओर खींचा। वो खड़े हो कर मुझ से लिपट गये और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर मेरे होंठों को अपने मुँह में खींच लिया और उन्हें बुरी तरह चूसने लगे। मैं नहीं जानती थी कि उधर भी इतनी ज्यादा आग लगी हुई है। उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी। मुँह में अजीब सा टेस्ट समा गया। मैंने ज़िंदगी में पहली बार अपनी चूत के रस का स्वाद चखा। मैंने उनके चेहरे पर लगे अपने रस को चाट कर साफ़ किया।

उन्होंने थिरकते हुए बिस्तर के साईड में रखी फ्रेंच वाईन की बोतल उठा ली। उसके कॉर्क को खोल कर उन्होंने उसमें से एक घूँट लगाया। फिर मैंने भी एक घूँट लगाया और फिर उन्होंने मुझे अपने सामने खड़ा कर दिया। फिर उस बोत्तल से मेरे एक मम्मे पर धीरे-धीरे वाईन डालने लगे। उन्होंने अपने होंठ मेरे निप्पल के ऊपर रख दिये। रेड वाईन मेरे बूब्स से फ़िसलती हुई मेरे निप्पल के ऊपर से होती हुई उनके मुँह में जा रही थी। बहुत ही एग्ज़ोटिक सीन था वो। फिर वो उस बोतल को ऊपर करके मेरे सिर पर वाईन उढ़ेलने लगे। साथ-साथ मेरे चेहरे से, मेरे कानों से और मेरे बालों से टपकती हुई वाईन को पीते जा रहे थे। मैं वाईन में नहा रही थी और उनकी जीभ मेरे पूरे जिस्म पर दौड़ रही थी। मैं उनकी हरकतों से पागल हुई जा रही थी। इस तरह से मुझे आज तक किसी ने प्यार नहीं क्या था। इतना तो साफ़ दिख रहा था कि मेरे ससुर जी सैक्स के मामले में तो सबसे अनोखे खिलाड़ी थे। जब बोतल आधी से ज्यादा खाली हो गयी तो उन्होंने बोतल मुझे पकड़ा दी और मेरे पूरे जिस्म को चाटने लगे। मैं बोतल से घूँट पीने लगी और वो मेरा जिस्म चाटने लगे। मेरा पूरा जिस्म वाईन और उनकी लार से चिपचिपा हो गया था। उन्होंने एक झटके में मुझे अपनी बाँहों में उठा लिया और अपनी बाँहों में उठाये हुए बाथरूम में ले गये। इस उम्र में भी इतनी ताकत थी कि मुझको उठाकर बाथरूम ले जाते वक्त एक बार भी उनकी साँस नहीं फ़ूली। बाथरूम में बाथ-टब में दोनों घुस गये और एक दूसरे को मसल-मसल कर नहलाने लगे। नहाते वक्त भी मेरे पैरों में सैंडल मौजूद थे। नहाने के साथ-साथ हम एक दूसरे को छेड़ते जा रहे थे। सैक्स के इतने रूप मैंने सिर्फ तसव्वुर में ही सोचे थे। आज ससुर जी ने मेरे पूरे वजूद पर अपना हक जमा दिया। वहीं पर बाथ-टब में बैठे-बैठे उन्होंने मुझे टब का सहारा लेकर घुटने के बल झुकाया और पीछे की तरफ़ से मेरी चूत और मेरी गाँड के छेद पर अपनी जीभ फिराने लगे।

ऊऊऊऽऽऽहहहऽऽऽऽ! ताआऽऽऽहिर! जाआऽऽऽन ये क्या कर रहे हो? छीऽऽऽ नहीईं वहाँ जीऽऽभ सेऽऽऽ मत चाटो! नऽऽऽहींऽऽऽ हाँऽऽऽऽ और अंदर.... और अंदर। मैं उत्तेजना में जोर-जोर से चींखने लगी। ससुर जी ने मेरी गाँड के छेद को अपनी अँगुलियों से फैला कर उसके अंदर भी एक बार जीभ डाल दी। मेरी चूत में आग लगी हुई थी। मैं उत्तेजना और नशे में अपने ही हाथों से अपने मम्मों को बुरी तरह मसल रही थी।

बस-बस! और नहीं.. अब मेरी प्यास बुझा दो। मेरी चूत जल रही है.... इसे अपने लंड से ठंडा कर दो। अब मुझे अपने लंड से चोद दो। अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती। ये आपने क्या कर डाला..... मेरे पूरे जिस्म में आग जल रही है। प्लीऽऽऽऽज़ और नहीं.... मैं तड़प रही थी। उन्होंने वापस टब से बाहर निकल कर मुझे अपनी बाँहों में उठाया और गीले जिस्म में ही कमरे में वापस आये।

उन्होंने मुझे उसी हालत में बिस्तर पेर लिटा दिया। वो मुझे लिटा कर उठने को हुए तो मैंने झट से उनकी गर्दन में अपनी बांहें डाल दीं, जिससे वो मुझसे दूर नहीं जा सकें। अब इंच भर की दूरी भी बर्दाश्त से बाहर हो रही थी। उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरी बाँहों को अपनी गर्दन से अलग किया और अपने लंड पर बोतल में बची हुई वाईन से कुछ बूँद रेड वाईन डाल कर मुझसे कहा, अब इसे चूसो! मैंने वैस ही किया। मुझे वाईन से भीगा उनका लंड बहुत ही टेस्टी लगा। मैं वापस उनके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। उन्होंने अब उस बोतल से बची हुई वाईन धीरे-धीरे अपने लंड पर उढ़ेलनी शुरू की। मैं उनके लंड और उनके टट्टों पर गिरती हुई वाईन को पी रही थी। कुछ देर बाद जब मैं पुरी वाईन पी चुकी तो उन्होंने मुझे लिटा दिया और मेरी टांगें अपने कंधों पर रख दीं। फिर उन्होंने मेरी कमर के नीचे एक तकिया लगा कर मेरी चूत की फाँकों को अलग किया। मैं उनके लंड के दाखिल होने का इंतज़ार करने लगी। उनके लंड को मैं अपनी चूत के ऊपर सटे हुए महसूस कर रही थी। अब तो मैं इतने नशे में थी कि मैंने आँखें बंद करके अपने आप को इस दुनिया से काट लिया था। नशे और वासना में चूर मैं दुनिया के सारे रिश्तों को और सारी मर्यादाओं को भूल कर बस अपने ससुर जी का, अपने बॉस का, अपने ताहिर जानू के लंड को अपनी चूत में घुसते हुए महसूस करना चाहती थी। अब वो सिर्फ, और सिर्फ मेरे आशिक थे। उनसे बस एक ही रिश्ता था; जो रिश्ता किसी मर्द और औरत के बीच जिस्मों के मिलन से बनता है। मैं उनके लंड से अपनी चूत की दीवारों को रगड़ना चाहती थी। सब कुछ एक जन्नती एहसास दे रहा था। उन्होंने मेरी चूत की फाँकों को अलग करके अपने लंड को मेरी चूत के छेद पर रखा। अब बता मेरी जान..... कितनी प्यास है तेरे अंदर? मेरे लंड को कितना चाहती है? ताहिर अज़ीज़ खान जी ने अपने लंड को चूत के ऊपर रगड़ते हुए पूछा।

आआऽऽऽहहऽऽऽ क्या करते हो.... ऊँममऽऽऽ अंदर घुसा दो इसे! मैंने अपने सूखे होंठों पर जीभ फ़ेरी।

मैं तो तुम्हारा ससुर हूँ...... क्या ये मुनासिब है?

ऊऊऽऽहहऽऽऽ राऽऽज!! ताऽऽऽहिर मेरी जाऽऽऽन मेराऽऽ इंतहान मत लोऽऽऽ। ऊँम्म डाल दो इसे..... अपने बेटे की बीवी की चूत फाड़ दो अपने लंड से..... कब से प्यासी हूँ तुम्हारे इस लंड के लिये.... ओ‍ओहहह कितने दिनों से ये आग जल रही थी। मैं तो शुरू से तुम्हारी बनना चाहती थी। ओऽऽऽहहऽऽऽ तुम कितने पत्थर दिल होऽऽऽऽ! कितना तरसया मुझे.... आज भी तरसा रहे हो! मैंने उनके लंड को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी चूत की ओर ठेला मगर उन्होंने मेरी कोशिश को नाकाम कर दिया। मेरी चूत का मुँह लंड के एहसास से लाल हो कर खुल गया था जिससे उनके लंड को किसी तरह की परेशानी ना हो। मेरी चूत से काम-रस झाग बनके निकल कर मेरे चूतड़ों के कटाव के बीच से बहता हुआ बिस्तर की ओर जा रहा था। मेरी चूत का मुँह पानी से उफ़न रहा था। अंदर कर दूँ???

हाँ ऊऊहह हाँऽऽऽ

मेरे लंड पर किसी तरह का कोई कंडोम नहीं है। मेरा वीर्य अपनी कोख में लेने की इच्छा है क्या?

हाँऽऽ ऊऊहह माँ... हाँऽऽ मेरी चूत को भर दो अपने वीर्य सेऽऽऽ! डाल दो अपना बीज मेरी कोख में! मैं तड़प रही थी। पूरा जिस्म पसीने से तरबतर हो रहा था। मेरी आँखें उत्तेजना से उलट गयी थीं और मेरे होंठ खुल गये थे। मैं अपने सूखे होंठों पर अपनी जीभ चला कर गीला कर रही थी।

फिर तुम्हारी कोख में मेरा बच्चा आ जायेगा!!

हाँऽऽ हाँऽऽऽ मुझे बना दो प्रेगनेंट। अब बस करोऽऽऽ। मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ.... और मत सताओ! मत तड़पाओ मुझे! मैंने अपनी दोनों टाँगें बिस्तर पर जितना हो सकता था फैला लीं, देखो तुम्हारे बेटे की दुल्हन तुम्हारे सामने अपनी चूत खोल कर लेटी तुमसे गिड़गिड़ा रही है कि उसकी चूत को फाड़ डालो। रगड़ दो उसके नाज़ुक जिस्म को। मसल डालो मेरे इन मम्मों को.... जिन पर मुझे नाज़ है! ये सब आपके छूने.... आपकी मोहब्बत के लिये तड़प रहे हैं। मैं बहकने लगी थी। अब वो मेरी मिन्नतों पर पसीज गये और अपनी अँगुलियों से मेरी क्लिटोरिस को मसलते हुए अपने लंड को अंदर करने लगे। मैं अपने हाथों से उनकी छातियों को मसल रही थी और उनके लंड को अपने चूत की दीवारों को रगड़ते हुए अंदर दाखिल होते महसूस कर रही थी।

हाँऽऽ मेरे ताहिर! इस लुत्फ का मुझे जन्मों से इंतज़ार था। तुम इतने नासमझ क्यों हो! मेरे दिल को समझने में इतनी देर क्यों कर दी!

उन्होंने वापस मेरी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं। उनके दोनों हाथ अब मेरे दोनों बूब्स पर थे। दोनों हाथ मेरी छातियों को जोर-जोर से मसल रहे थे और वो मेरे निप्पलों को अँगुलियों से मसल रहे थे। मेरी चूत बुरी तरह से गीली हो रही थी इसलिये उनके लंड को दाखिल होने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। उनका लंड पूरी तरह मेरी चूत में समा गया था। फिर उन्होंने धीरे-धीरे अपने लंड को पूरी तरह से बाहर खींच कर वापस एक धक्के में अंदर कर दिया। अब उन्होंने मेरी टाँगें अपने कंधों से उतार दीं और मेरे ऊपर लेट गये और मुझे अपनी बाँहों में भर कर मेरे होंठों को चूमने लगे। सिर्फ उनकी कमर ऊपर-नीचे हो रही थी। मेरी टाँगें दोनों ओर फ़ैली हुई थीं। कुछ ही देर में मैं उत्तेजित होकर उनके हर धक्के का अपनी कमर को उनकी तरफ़ उठा कर और उछाल कर वेलकम करने लगी। मैं भी नीचे की ओर से पूरे जोश में धक्के लगा रही थी। एयर कंडिशनर की ठंडक में भी हम दोनों पसीने-पसीने हो रहे थे। कमरे में सिर्फ एयर कंडिशनर की हमिंग के अलावा हमारी ऊऊऽऽहहऽऽ ओ‍ओऽऽहहऽऽ की आवाज गूँज रही थी। साथ में हर धक्के पर फ़च फ़च की आवाज आती थी। हमारे होंठ एक दूसरे से सिले हुए थे। हमारी जीभ एक दूसरे के मुँह में घूम रही थी। मैंने अपने पाँव उठा कर उनकी कमर को चारों ओर से जकड़ लिया। काफी देर तक इसी तरह चोदने के बाद वो उठे और मुझे बिस्तर के किनारे खींच कर आधी-लेटी हालत में लिटा कर मेरी टाँगों के बीच खड़े होकर मुझे चोदने लगे। उनके हर धक्के के साथ पूरा बिस्तर हिलने लगता था। मेरी चूत से दो बार पानी की बौंछार हो चुकी थी। कुछ देर तक और चोदने के बाद उन्होंने अपने लंड को पूरी जड़ तक मेरी चूत के अंदर डाल कर मेरे दोनों मम्मों को अपनी मुठ्ठी में भर कर इतनी बुरी तरह मसला कि मेरी तो जान ही निकल गयी। ले! ले मेरा बीज..... मेरा वीर्य अपने पेट में भर ले। ले-ले मेरे बच्चे को अपने पेट में। अब नौ महीने बाद मुझसे शिकायत नहीं करना। उन्होंने मेरे होंठों के पास बड़बड़ाते हुए मेरी चूत में अपना वीर्य डाल दिया। मैंने उनके नितंबों में अपने नाखून गड़ा कर अपनी चूत को जितना हो सकता ऊपर उठा दिया और मेरा भी रस उनके लंड को भिगोते हुए निकल पड़ा। दोनों खल्लास होकर एक दूसरे की बगल में लेट गये। हम कुछ देर तक यूँ ही लंबी-लंबी साँसें लेते रहे। फिर उन्होंने करवट लेकर अपना एक पैर मेरे जिस्म के ऊपर चढ़ा दिया और मेरे मम्मों से खेलते हुए बोले, ओ‍ओऽऽफफऽऽ शहनाज़ तुम भी गजब की चीज़ हो। मुझे पूरी तरह थका दिया मुझे।

अच्छा?

इसी तरह अगर अक्सर चलता रहा तो बहुत जल्दी ही मुझे दवाई लेनी पड़ेगी.... ताकत की।

मजाक मत करो! अगर दवाई की किसी को जरूरत है तो मुझे, जिससे कहीं प्रेगमेंट ना हो जाऊँ।

हम दोनों वापस एक दूसरे से लिपट गये और उस दिन सारी रात एक दूसरे से खेलते हुए गुजर गयी। उन्होंने उस दिन मुझे रात में कईं बार अलग-अलग तरीके से चोदा।

सुबह उठने की इच्छा नहीं हो रही थी। पूरा जिस्म टूट रहा था। आज हैमिल्टन और साशा भी हमारे साथ मिल गये। हैमिल्टन मौका खोज रहा था मेरे साथ चुदाई का। लेकिन अब मैं ताहिर अज़ीज़ खान जी के ही रंगों में रंग चुकी थी। मेरा रोमरोम अब इस नये साथ को तरस रहा था। उस दिन भी वैसी ही चुहल बाजी चलती रही। मैंने स्विमिंग पूल पर अपनी सबसे छोटी बिकिनी पहनी थी। मेरा आशिक तो उसे देखते ही अपने होश खो बैठा। हैमिल्टन के होंठ फ़ड़क उठे थे। हैमिल्टन ने पूल के अंदर ही मेरे जिस्म को मसला। शाम को हम डाँस फ़्लोर पर गये तो मैं नशे में झूम सी रही थी। उस दिन शाम को भी हैमिल्टन के उकसाने पर मैंने काफी ड्रिंक कर रखी थी। डाँस फ़्लोर पर कुछ देर हैमिल्टन के साथ रहने के बाद ताहिर अज़ीज़ खान जी ने मुझे अपने पास खींच लिया। साशा भी उनके जिस्म से चिपकी हुई थी। हम दोनों को अपनी दोनों बाजुओं में कैद करके ताहिर अज़ीज़ खान जी थिरक रहे थे। हैमिल्टन टेबल पर बैठा हम तीनों को देखते हुए मुस्कुराता हुआ अपनी कॉकटेल सिप कर रहा था। हम दोनों ने ताहिर अज़ीज़ खान जी की हालत सैंडविच जैसी कर दी थी। मैं उनके सामने सटी हुई थी तो साशा उनकी पीठ से चिपकी हुई थी। हम दोनों ने उनके जिस्म से शर्ट नोच कर फ़ेंक दी थी। ऊन्होंने भी हम दोनों को टॉपलेस कर दिया था। हम अपने मम्मों और अपने सख्त निप्पलों को उनके जिस्म पर रगड़ रही थीं। कुछ देर बाद हैमिल्टन भी स्टेज पर आ गया। उसके साथ कोई और लड़की थी। ये देख कर साशा हम से अलग होकर हैमिल्टन के पास चली गयी। जैसे ही हम दोनों अकेले हुए, ताहिर अज़ीज़ खान जी ने अपने तपते होंठ मेरे होंठों पर रख कर एक गहरा चुंब्बन लिया। आज तो तुम स्विमिंग पूल पर गजब ढा रही थीं।

अच्छा? मिस्टर ताहिर अज़ीज़ खान - एक स्टड ऐसा कह रहा है! जिसपर यहाँ कईं लड़कियों की आँखें गड़ी हुई हैं। जनाब ..जवानी में तो आपका घर से निकलना मुश्किल रहता होगा?

शैतान मेरी खिंचायी कर रही है! ताहिर अज़ीज़ खान जी मुझे अपनी बाँहों में लिये-लिये स्टेज के साईड में चले गये। चलो यहाँ बहुत भीड़ है। स्विमिंग पूल पर चलते हैं.... अभी पूल खाली होगा।

लेकिन पहले बिकिनी की ब्रा तो ले लूँ।

उसकी क्या जरूरत? वो बोले। मैंने उनकी तरफ़ देखा तो वो बोले, आज मूनलाईट में न्यूड स्विमिंग करेंगे। बस तुम और मैं।

उनकी प्लैनिंग सुनते ही उत्तेजना में मेरा रोम-रोम थिरक उठा। मैंने कुछ कहा नहीं बस चुपचाप ताहिर अज़ीज़ खान जी का सहारा लेकर उनकी कमर में हाथ डाले मैं नशे में लड़खड़ाती हुई उनके साथ हो ली। हम लोगों से बचते हुए कमरे से बाहर आ गये। स्विमिंग पूल का नज़ारा बहुत ही दिलखुश था। हल्की रोशनी में पानी का रंग नीला लग रहा था। तब शाम के नौ बज रहे थे, इसलिये स्विमिंग पूल पर कोई नहीं था और शायद इसलिये रोशनी कम कर दी गयी थी। ऊपर पूरा चाँद ठंडी रोशनी बिखेर रहा था। हम दोनों वहाँ पूल के नज़दीक पहुँच कर कुछ देर तक एक दूसरे को निहारते रहे फिर हम दोनोंने एक दूसरे के कपड़े उतारने शुरू किये। मैंने ड्रेस कोड के मुताबिक पैंटी नहीं पहन रखी थी। इसलिये जैसे ही वो मेरी स्कर्ट को खींचने लगे मैंने उन्हें रोका। प्लीऽऽऽज़! इसे नहीं। किसी ने देख लिया तो?

यहाँ कोई नहीं आयेगा और किसे परवाह है? देखा नहीं हॉल में सब नंगे नाच रहे थे। कहते हुए उन्होंने मेरी स्कर्ट खींच दी और मेरे सैंडलों के अलावा मुझे बिल्कुल नंगी कर दिया और खुद भी बिल्कुल नंगे हो गये। सबसे पहले ताहिर अज़ीज़ खान जी पूल में दाखिल हुए। मैं वो हाई-हील के सैंडल पहने नशे में किनारे खड़ी झूम सी रही थी तो उन्होंने मुझे हाथ पकड़ कर अंदर खींच लिया। मैं खिलखिला कर हँस पड़ी। मैंने अपनी हाथों में पानी भर कर उनके चेहरे पर फ़ेंका। तो वो मुझे पकड़ने के लिये मेरे पीछे तैरने लगे। हम दोनों काफी देर तक चुहल बाजी करते रहे और एक दूसरे के जिस्म से खेलते रहे। हम दोनों कसके एक दूसरे से लिपट जाते और एक दूसरे के जिस्म को चूमने लगते। ताहिर अज़ीज़ खान जी ने मेरे जिस्म का कोई हिस्सा नहीं छोड़ा जहाँ उनके होंठों ने छुआ ना हुआ हो। मैंने स्विमिंग पूल के किनारे को पकड़ कर अपने आप को स्टैडी किया। ताहिर अज़ीज़ खान जी पीछे से मेरे जिस्म से लिपट कर मेरे गीले मम्मों को मसल रहे थे। मैं अपनी गर्दन पीछे घूमा कर उनके होंठों को अपने दाँतों से काट रही थी। उनका लंड मेरे दोनों चूतड़ों के बीच सटा हुआ था। मैंने अपने एक हाथ से उनके लंड को थाम कर देखा। लंड पूरी तरह तना हुआ था। आ जाओ जान! पानी भी मेरे जिस्म की आग को बुझा नहीं पा रहा है। जब तक तुम मेरे जिस्म को शांत नहीं करोगे, मैं ऐसे ही फुँकती रहुँगी। मैंने उनके बालों को अपनी मुठ्ठी में भर कर अपनी तरफ़ मोड़ा और उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया।

तुम बहुत ही गरम हो और शराब पी कर नशे में तुम और भी नशीली हो जाती हो!

उस जगह पर पानी कम था। उन्होंने पानी में खड़े होकर मुझे उठा कर स्विमिंग पूल के ऊपर बिठा दिया। मेरी टाँगें पूल के किनारे पर झूल रही थीं। वो अपने दोनों हाथों से मेरी टाँगों को फैला कर मेरी टाँगों के बीच आ गये। मैंने अपनी टाँगें उठा कर उनके कंधों पर रख दी। इससे मेरी चूत ऊपर उठकर उनके चेहरे के सामने हो गयी। उन्होंने मेरी चूत पर अपने होंठ टिका दिये और अपनी जीभ को चूत के ऊपर फिराने लगे।

आआऽऽहहहऽऽऽ ममऽऽआआआ ऊँऊँऽऽऽऽऽ आआऽऽऽ मैंने उनके सिर को अपने एक हाथ से पकड़ा और दूसरे हाथ को जमीन पर रखते हुए उनके सिर को अपनी चूत पर दबा दिया। वो अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर डाल कर उसे आगे पीछे करने लगे। मैंने उत्तेजना में अपने दोनों हाथों से ताहिर अज़ीज़ खान जी को पकड़ लिया और अपनी कमर को उनके मुँह की तरफ़ ठेलने लगी। उन्होंने मेरे दोनों चूतड़ों पर अपनी अँगुलियाँ गड़ा दीं और मेरी क्लिटोरिस को अपने दाँतों के बीच दबा कर हल्के-हल्के से कुतरने लगे। वो इस हालत में पीछे हटे तो मैं उनको पकड़े-पकड़े ही वापस स्विमिंग पूल में उतर गयी। मैंने अपनी टाँगों को कैंची की तरह उनके जिस्म को चारों ओर से जकड़ लिया था। फिर उनके सिर को थामे हुए अपनी टाँगों को हल्का सा लूज़ करते हुए उनके जिस्म पर फ़िसलती हुई नीचे की ओर खिसकी। जैसे ही मैंने अपने जिस्म पर उनके लंड की रगड़ महसूस की तो अपने हाथों से उनके लंड को अपनी चूत पर सेट करके वापस अपने जिस्म को कुछ नीचे गिराया। उनका लंड मेरी चूत के दरवाजे को खोलता हुआ अंदर घुसता चला गया। उन्होंने मेरी पीठ को स्विमिंग पूल के किनारे से सटा दिया मैंने अपने हाथों से पीछे की ओर स्विमिंग पूल के किनारे का सहारा लेकर अपने जिस्म को सहारा दिया। वैसे मुझे सहारे की ज्यादा जरूरत नहीं थी क्योंकि मेरी टाँगों ने उनके जिस्म को इस तरह जकड़ रखा था कि वो मेरी इच्छा के बिना हिल भी नहीं पा रहे थे। उन्होंने जोर-जोर से धक्के देना शुरू किया।

आआऽऽहहऽऽऽ आआऽऽहहऽऽऽ ताहिर.... ताऽऽहिर..... हाँआँऽऽऽऽ हाँआँऽऽ और जोर सेऽऽऽऽ ममऽऽऽ मज़ाऽऽऽऽ आ गयाऽऽऽ ऊऊफफऽऽऽ जोरों सेऽऽऽ ऊँऊँऽऽआआऽऽऽ.... मैंने अपनी बाँहों का हार उनके गले में डाल दिया और उनके होंठों से अपने होंठ चिपका दिये। मैं उनके होंठों को कुतर रही थी।

ले! ले ले! अंदर लेले अंदर! पूरा..... आआऽऽहहऽऽऽ क्याऽऽऽ चीज़ है ऊँऽऽ, कहते हुए उन्होंने मुझे सख्ती से अपनी बाँहों में जकड़ लिया और अपने रस की धार मेरी चूत में बहाना शुरू किया। मैंने इस मामले में भी उनसे हार नहीं मानी। मेरा रस भी उनके रस से मिलने निकल पड़ा। हम दोनों अपने जिस्म को दूसरे के जिस्म में समा देने के लिये जी तोड़ कोशिश करने लगे। दोनों एक दूसरे से इस तरह लिपट रहे थे कि पानी से भाप उठना ही बाकी रह गया था। हम दोनों झड़ कर स्विमिंग पूल में कुछ देर तक मछलियों की तरह अठखेलियाँ करते रहे। उसके बाद हमने पानी से निकल कर एक दूसरे के जिस्म को साथ के बाथरूम में जाकर पोंछा और फिर हम अपने कमरे में वापस लौट गये। खाना कमरे में ही मंगा कर खाया। ताहिर अज़ीज़ खान जी कुछ ज्यादा ही रोमैंटिक हो रहे थे। उन्होंने मुझे अपनी गोद में बिठा कर अपने हाथों से खिलाया।

अगले दिन हैमिल्टन और साशा पीछे ही पड़ गये और हम दोनों को अलग नहीं छोड़ा। हमने उनके साथ ही ग्रुप सैक्स का मज़ा लिया। हम जितने भी दिन वहाँ ठहरे, हमने खूब इंजॉय किया। ससुर जी से छिपा कर अगर मौका मिलता तो मैं कॉनफ्रेंस में मौजूद दूसरे मर्दों से चुदवाने से नहीं चूकती थी। मैं भी क्या करती। माहौल ही ऐसा था। दिन भर शराब और हर तरफ नंगापन और चुदाई.... मैं खुद को रोक नहीं पाती थी। अलग- अलग देशों के मर्दों के तरह-तरह के छोटे, लंबे, मोटे लंड, हर तरफ दिखायी देते थे।

!!! क्रमशः !!!


भाग-१ भाग-२ भाग-३ भाग-४ भाग-५ भाग-६ भाग-७ भाग-८ भाग-९ भाग-११ भाग-१२ भाग-१३ भाग-१४

मुख्य पृष्ठ (हिंदी की कामुक कहानियों का संग्रह)


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