मैं हसीना गज़ब की

लेखिका: शहनाज़ खान


भाग - १४


उसके जाने के बाद मैं दरवाज़ा बंद करने लगी तो वहीं मुझे एक एन्वलोप मिला। उसमें ससुरजी का पैगाम था कि अचानक उन्हें हैमिलटन के साथ एक दिन के लिये फ्रेंकफर्ट जाना पड़ रहा है और वो अगले दिन दोपहर तक लौट आयेंगे। मुझे कॉन्फ्रेंस में कुछ जरूरी सेमीनार अटेंड करने के लिये भी हिदायत दी थी और साथ ही लिखा था कि मैं सशा के साथ इंजॉय करूँ।

घंटे भर बाद ही एक सेमीनार था जो ससुर जी ने मुझे अटेंड करने को कहा था। मेरा मूड तो नहीं था पर सेमीनार में जाना भी जरूरी था। मैं एक बार फिर से नहायी और ट्राऊज़र और शर्ट और हाई हील के सैंडल की दूसरी जोड़ी पहन कर सेमिनार में पहुँच गयी। मेरे कदमों में अभी भी लड़खड़ाहट सी थी क्योंकि मेरा नशा उतरा नहीं था। सेमिनार करीब दो घंटे चला। मेरा ध्यान सेमिनार में ज्यादा था नहीं। खुशकिस्मती से वहाँ स्नैक्स का इंतज़ाम था। पहले तो मैंने पेट भर कर स्नैक्स खाये क्योंकि रात से तो सिर्फ शराब और उन हब्शियों का वीर्य और पेशाब के अलवा कुछ भी पेट में गया नहीं था। ड्रिंक्स का भी इंतज़ाम था पर मैं अपने ऊपर काबू रखा और सिर्फ मिनरल वाटर ही पीया। सेमिनार के दौरान ससुर जी के लिये थोड़े बहुत नोट्स लिये। ज्यादा वक्त तो मैं ऊँघ ही रही थी और पिछली रात की चुदाई बारे में ही सोच रही थी।

सेमिनार के दौरान मुझे सशा कहीं नहीं दिखी तो मैंने अपने कमरे में जाकर आराम करने का फैसला किया। लेकिन लौटते हुए सेमिनार हॉल के बाहर ही मुझे सशा मिल गयी। वो ज़ोर देकर मुझे अपने कमरे में ले गयी। शेंपेन की चुस्कियाँ लेते हुए और सिगरेट स्मोक करते हुए हम गपशप करने लगे। सशा तो चेन स्मोकर थी और जब उसने मुझे सिगरेट पेश की तो मैंने भी मना नहीं किया। मैंने उसे पिछली रात की ऐयाशियों के बारे में तफसील से बताया। यू आर अ लक्की बिच! वो मेरी चुदाई की दास्तान सुन कर बोली। मेरी दास्तान सुनते-सुनाते पता ही नहीं चला कि कब हम दोनों बहक कर एक दूसरे को चूमने सहलाने लगीं और फिर करीब एक घंटे तक हम दोनों लेस्बियन चुदाई का मज़ा उठाया। पूरी रात बेरहमी से चुदने के बाद सशा के साथ नज़ाकत भरी लेस्बियन चुदाई में मज़ा आ गया। नरम मुलायम जिस्मों का आपस में रगड़ना और बहुत ही प्यार भरे और जोशीले चुम्मों की मस्ती तो सिर्फ दूसरी औरत के साथ लेस्बियन चुदाई में ही मुमकीन है। हम दोनों ने कईं बार एक दूसरी की चूत का पानी छुड़ाया। काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर लेटी रहीं।

शाम को सात बजे के आसपास हम दोनों ने उसी होटल में नीचे रेस्टोरेंट में डिनर किया। उसके बाद सशा ने पैरिस घूमने की पेशकश की। मैंने उसे बताया कि मैं पैरिस का टूर कर चुकी हूँ तो वो हंसने लगी। ओह नो डर्लिंग! ऑय डिड नॉट मीन साइट-सींग! लेट अस गो एंड सी नाइट-लाइफ ऑफ पैरिस! सैक्स डिस्ट्रिक्ट... हैव सम अडल्ट फन!

हम दोनों अपने-अपने कमरे में जा कर सैक्सी कपड़े और सैंडल पहन कर तैयार हुईं और अय्याशी करने निकल पड़ीं। हम मेट्रो में बैठ कर पिगाल डिस्ट्रिक्ट पहुँचे जहाँ हर तरफ बस सैक्स बूटीक और स्ट्रिप क्लब वगैरह थे। सबसे पहले हमने वहाँ का इरोटिक म्यूज़ीयम देखा। इस सात मंज़िला इमारत की हर मंज़िल पर चुदाई से ताल्लुक तरह-तरह के स्कल्प्चर, तसवीरें वगैरह थीं। पहली दो मंज़िलों पर तो बड़े-बड़े लौड़ों के बुत्त देख कर मेरा मन मचल उठा। सशा अपने डिजिटल कैमरा साथ लायी थी। हमने लौड़ों के बड़े-बड़े स्कल्प्चरों से चिपक-चिपक कर कईं फोटो खींची। उसके बाद हम एक बहुत ही बड़े सैक्स बूटिक में गये जहाँ हर तरह की अश्लील किताबें, हर किस्म की ब्लू-फिल्मों की डी-वी-डी और तरह-तरह के सैक्स टॉयज़ बिक्री के लिये सजे हुए थे। जावेद और मैं अक्सर ब्लू-फिल्मों का मज़ा लिया करते थे। इसलिये मैंने अलग-अलग कैटगोरी की ब्लू-फिल्मों कुछ डी-वी-डी खरीद लीं। सशा के जोर देने पर मैंने एक डिल्डो भी खरीद लिया। रबड़ का नौ इंच लंबा काला डिल्डो बिल्कुल असली लंड की तरह हकीकी लग रहा था। उसका हर हिस्सा जैसे कि नसें, मोटा फुला हुआ सुपाड़ा, गोटियों की झुर्रिदार थैली, सब बहुत ही तफसील से तराशा हुआ था। वो काला डिल्डो मुझे ओरिजी और माइक के लौड़ों की याद दिला रहा था, इसलिये उनके साथ बितायी मस्ती भरी रात की यादगार समझ कर मैंने वो खरीद लिया।

उसके बाद हम एक स्ट्रिप क्लब में गये जो खासतौर पर लेडीज़ के लिये था। हमने अपने लिये ड्रिंक ऑर्डर किया। स्टेज के अलावा पूरे हॉल में बहुत ही हल्की रोशनी थी। स्टेज पर कईं आदमी सैक्सी धुन पर नाचते हुए धीरे-धीरे अपने कपड़े उतार रहे थे। नशे और मस्ती में चूर औरतें हूटिंग कर रही थीं। ड्रिंक सर्व करने वाले वेटर भी करीब-करीब नंगे ही थे। जब एक वेटर हमारे ड्रिंक्स लेकर आया तो उसने बहुत ही छोटी सी फ्रेंच कट अंडरवीयर पहन रखी थी जिसमें उसका मोटा लौड़ा बहुत ही मुश्किल से कैद था। उसने हमारी टेबल पर ड्रिंक रखे तो सशा ने वेटर का अंडरवीयर नीचे खिसका कर उसका लौड़ा अपने हाथों में भर लिया और झुक कर उसके सुपाड़े पर अपने लाल-लाल होंठ रख दिये। कुछ सेकेन्ड उसका सुपाड़ा चूसने के बाद उसने मुझे भी वैसा ही करने का इशारा किया। मैं भी आगे झुक कर उसके लौड़े का सुपाड़ा अपने मुँह में ले कर चूसने लगी। अचानक उसने अपना लौड़ा बाहर खींच लिया तो मुझे बहुत गुस्सा आया। सशा ने इतने में एक-एक यूरो के दो नोट उसके अंडरवीयर में खिसका दिये। स्टेज पर नंगे हट्टे-कट्टे आदमियों को थिरकते हुए अश्लील हरकतें करते देख मेरी चूत गीली हो चुकी थी। पूरे हॉल में औरतों की आँहें, हुल्लड़ और अश्लील फिकरे गूँज रही थे। माहौल इतना सैक्सी था कि मेरा मन भी करने लगा कि अभी स्टेज पर चढ़ कर चुदवाने लगूँ। मैंने सशा से अपनी हालत बयान की तो उसकी हालत भी मेरे जैसी ही थी। हम दोनों तीन-तीन पैग पी चुकी थीं। वो बोली कि ड्रिंक खत्म करके थोड़ी देर में वहाँ से निकलते हैं। फिर वो मुझे ऐसी जगह ले जायेगी जहाँ हम दोनों जी भर कर लौड़े चूसने के साथ-साथ अपनी चूत की प्यास बुझा सकेंगी। मैंने देखा कि वो आँहें भरते हुए अपनी पैंटी नीचे खिसका कर अपने हाथों से अपनी चूत रगड़ रही है तो मुझसे भी रहा नहीं गया और मैं भी अपनी चूत रगड़ने लगी। इस तरह बस कुछ देर के लिये ही थोड़ी सी टेम्परेरी राहत मिली।

एक दूसरे की कमर में हाथ डाले ऊँची हील के सेंडलों में लड़खड़ाती हुई रात के करीब ग्यारह बजे जब हम दोनों उस स्ट्रिप क्लब से निकलीं तो काफी नशे में थीं और हमारी पैंटियाँ नदारद थीं। मैंने उसकी गर्दन चूमते हुए पूछा कि अब वो मुझे कहाँ ले जायेगी तो बोली, हैव यू एवर हर्ड ऑफ ग्लोरी होल?

नो! बट ऑय एम नॉट इंट्रस्टिड इफ इट इज़ द नेम ऑफ सम बार ओर क्लब? ऑय ओनली वांट सम बिग कॉक टू फक मी! लड़खड़ाती आवाज़ में मैं अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए बोली तो वो जोर-जोर से हंसने लगी। कम विद मी! यू कैन हैव मोर दैन वन कॉक इफ यू वांट!

चलते-चलते उसने मुझे बताया कि ग्लोरी-होल आमतौर पर पब्लिक टॉयलेट के स्टालों के बीच की दीवारों में पाये जाने वाले छेद होते हैं। अगर बगल-बगल के दो स्टालों में मौजूद शख्स आपसी रज़ामंदी से इन छेदों के ज़रिये एक दूसरे का चेहरा देखे बगैर चुदाई-हरकतों में शरीक हो सकते हैं। पब्लिक टॉयलेट के अलावा ग्लोरी-होल अक्सर एडल्ट वीडियो देखने के प्राइवेट बूथों की दिवारों में भी पाये जाते हैं। वैसे तो ग्लोरी-होल्स का इस्तेमाल ज्यादातर गे-मर्द अपनी पहचान गुप्त रखते हुए एक दूसरे का लौड़ा चूसने या एक दूसरे की मुठ मारने के लिये करते हैं लेकिन औरतें भी अक्सर इन ग्लोरी छेदों के ज़रिये अपनी पहचान छिपा कर किसी अंजान शख्स का लौड़ा चूसने-सहलाने के लिये करती हैं। अगर लौड़े का साइज़ बड़ा हो तो इन छेदों के ज़रिये चुदाई भी हो सकती है।

सशा ने बताया कि इस तरह के ग्लोरी-होल अक्सर गंदे होते हैं और जरूरी नहीं कि ग्लोरी-होल के दूसरी तरफ कोई मर्द हर वक्त मौजूद ही हो या फिर उस मर्द की काबिलियत की भी कोई गारंटी नहीं होती। इसलिये वो मुझे एक महंगे अप-स्केल जगह पर ले जा रही थी जहाँ हम एक शानदार केबिन किराये पर ले सकेंगी और दीवार के दूसरी तरफ कोई ऐरा गैरा नहीं होगा बल्कि हमारी पसंद का कोई प्रोफेशनल जिगोलो होगा।

थोड़ा दूर चलने के बाद हम एक सैक्स शॉप के बाहर रुकीं। खिड़की में कईं तरह के अश्लील पोस्टर लगे थे और बेस्ट ग्लोरी होल प्राइवेट केबिन! सैटिसफैक्शन गारेंटिड जैसे कईं निआन साइन लग थे। हम अंदर गये तो रिसेप्शन पर एक औरत मौजूद थी जिसने जरूरत से ज्यादा मेक-अप कर रखा था। सशा ने उससे प्राइवेट डिलक्स केबिन विद टू होल्स का रेट पूछा तो उस औरत ने टूटी-फूटी इंगलिश में कहा कि मनी डिपेंड ऑन व्हॉट टाइप सर्विस यू वाँट!

वी वांट टू हायर अनलिमिटेड फोर वन आ‍उर विद द बिगेस्ट एंड थिकेस्ट यू हैव!

दैट विल बी एइट हंड्रड यूरो फोर डिलक्स केबिन फोर वन आ‍उर एंड थ्री हंड्रड फोर एवरी एडिशनल थरटी मिनट्स! वो औरत मुस्कुराते हुए बोली, ड्रिंक्स एंड वीडियो ऑफ योर चॉइस इज़ फ्री विद दिस पैकेज! फिर फोटो एल्बम खोल कर हमें दिखाते हुए बोली, दीज़ एइट स्टड्स आर द बेस्ट वी हैव! एलबम के उस पेज पर आठ आदमियों के छाती से घुटनों तक की नंगी तसवीरें थीं। हर तसवीर के नीचे लौड़े के साइज़, रंग, उम्र वगैरह की डीटेल थी। मैंने देखा कि वो आठों लौड़े नौ से बारह इंच लंबे और अच्छे खासे मोटे थे। हमने जो पैकेज चुना था उसके मुताबिक वो आठ लौड़े बदल-बदल कर हमारे लिये हाज़िर रहेंगे ताकि एक घंटे तक एक वक्त में बिना रुकावट उनमें से कोई भी दो लौड़े हमारी खिदमत में मौजूद हों।

हम दोनों ने खुशी-खुशी चार सौ - चार सौ यूरो निकाल कर उसे दे दिये। मेरी हालत ऐसी थी कि इस वक्त चार सौ की जगह हज़ार यूरो भी देने पड़ते तो भी मैं सोचती नहीं। वैसे भी ससुर जी ने पैरिस आते ही मुझे शॉपिंग वगैरह के लिये चार हज़ार यूरो दे दिये थे और अब तक मैंने सिर्फ बारह सौ यूरो ही खर्च किये थे।

योर केबिन इज़ ऑन सेकेंड फ्लोर! योर चॉइस ऑफ ड्रिंक्स विल बी इन द केबिन एंड इफ यू हैव एनी प्रॉब्लम... यू कैन कॉल मी फ्रॉम द फोन इन द केबिन! इंजॉय! कहते हुए उस औरत ने हमें चाबी पकड़ा दी।

इंडियन रेलवे के फर्स्ट-क्लास कूपे जितना केबिन था। अंदर दो कुर्सियाँ और एक टेबल थी और दीवार पर बड़ा सा टीवी भी लगा था। नीचे रिसेप्शन पर सशा ने जो पसंद की थी वो स्कॉच की बोतल और चार ग्लास भी टेबल पर पहले से मौजूद थे। टेबल पर ही एक डब्बे में कंडोम के पैकेट भी रखे थे। सशा ने उन कंडोम के पैकेटों की तरफ इशारा करेते हुए कहा कि ग्लोरी-होल में से पेशेवर ज़िगोलो-मर्दों के लौड़ों को चूसते वक्त चाहे ना सही पर उनसे चुदवाते वक्त मैं कंडोम इस्तेमाल करना ना भूलूँ। साइड की दोनों दीवारों में अलग-अलग ऊँचाई पर कईं छेद थे। सभी छेद अभी बंद थे और हर छेद के पास एक बटन था। अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से हम जिस छेद का बटन दबायें, उसी छेद में से लौड़ा निकल कर हमारी खिदमद में हाज़िर हो जायेगा। पहला बटन दबाने के बाद ही हमारा एक घंटे का वक्त शुरू होना था इसलिये केबिन का दरवाज़ा लॉक करने के बाद सशा ने दो पैग बनाये और दो सिगरेट सुलगा कर केबिन की रोश्‍नी थोड़ी मद्दिम करके ब्लू-फिल्म ऑन कर दी।

हम दोनों स्मोक करते हुए अगल-बगल बैठ कर स्कॉच के पैग पीते हुए सामने स्क्रीन पर ब्लू-फिल्म देखने लगीं। मैं नहीं जानती कि ये इत्तेफक था या फिर सशा ने जानबूझ कर ये फिल्म चुनी थी क्योंकि इस ब्लू फिल्म में दो गोरी औरतों का दस-बारह काले हब्शियों से गैंग-बैंग दिखाया गया था। उन गोरी औरतों को मोटे-मोटे काले लौड़े चूसते देख कर मुझे ओरिजी और उसके दोस्तों की याद आ गयी। मेरे मुँह और चूत दोनों से लार टपकने लगी। तभी सशा मेरी गोद में आ कर बैठ गयी और मेरे होंठ चूमते हुए फुसफुसायी, फिनिश अप योर ड्रिंक फास्ट! जैसे ही मैंने अपना पैग दो घूँट में खत्म किया तो उसने हाथ से ग्लास लेकर सामने टेबल पर रख दिया। फिर से मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसेड़ दी। हम दोनों ने ऐसे ही एक दूसरे के जिस्म सहलाए और होंठ चूमते हुए एक दूसरे के कपड़े उतार दिये। हाई हील सेंडलों को छोड़कर हम दोनों ही अब बिल्कुल नंगी थीं। वो मेरी तरफ मुँह करके मेरी गोद में बैठी थी और हम दोनों चिपक कर चूमते हुए एक दूसरे के मम्मों से मम्मे रगड़ते हुए आँहें भरने लगीं। केबिन में गूँज रही ब्लू-फिल्म की चुदाई की मस्ती भरी आवाज़ें हमें और ज्यादा भड़का रही थीं।

करीब दस मिनट बाद जब वो मेरी गोद में से उठ कर खड़ी हुई तो हम दोनों बेहद गरम हो चुकी थीं। मेरा हाथ पकड़ कर सशा मुझे अपने साथ खींचते हुए ज़मीन पर अपने घुटने मोड़ कर बैठ गयी और हम दोनों ने एक ही दीवार में अगल-बगल के ग्लोरी-होल के बटन दबा दिये। बटन दबाते ही उन छेदों के पीछे के शटर खुल गये और कुछ ही पलों बाद दोनों छेदों में से दो मोटे-मोटे लौड़े निकल कर लहराने लगे। बस फिर क्या था, हम दोनों एक-एक लौड़े पर भूखी शेरनियों की तरह टूट पड़ीं और उन्हें मुठिया-मुठिया कर चूसने लगीं। स्कॉच की बोतल हम दोनों ने अपने बीच में रख ली ताकि लौड़े चूसते हुए बीच-बीच में एक-दो घूँट पी सकें। जब पहला लौड़ा झड़ा तो मैं भौंचक्की रह गयी। झड़ते हुए लौड़ों में से सैलाब की तरह इस कदर वीर्य उमड़ा कर मेरे मुँह में भरने लगा कि उतनी तेज़ी से उसे निगलते हुए लौड़ा मुँह में रख पाना मेरे बस में नहीं था। हार कर मैंने लौड़ा अपने मुँह से बाहर निकाला तो भी वो लगातार वीर्य की पिचकरियाँ मेरे चेहरे, गले और चूचियों पर दागता रहा। जब उसका झड़ना बंद हुआ तो वो लौड़ा पीछे खींच लिया गया और कुछ ही पलों में एक नया लौड़ा उस ग्लोरी-होल में से निकल कर हाज़िर हो गया। इसी बीच में सशा अपना वाला लौड़ा मुठियाते हुए मेरे पास खिसक कर वीर्य से सना हुआ मेरा चेहरे चाट कर साफ करने लगी।

ब्लू-फिल्म अभी भी चल रही थी लेकिन हमारा ध्यान उसमें बिल्कुल भी नहीं था। हब्शियों से चुद रही औरतों की आँहें और चींखें जरूर हमारी मस्ती में इज़ाफा कर रही थीं। जब सशा वाला लौड़ा झड़ा तो उसकी हालत भी मेरे जैसी ही थी। उसका चेहरा, बाल, मम्मे वगैरह सभी वीर्य से बुरी तरह सन गये थे। मैं भी पीछे नहीं रही और उसके पास खिसक कर उसके चेहरे से वीर्य चाटने लगी। तभी मैंने महसूस किया कि सशा अपने मुँह में भरे वीर्य का जैसे कुल्ला सा कर रही है और अगले ही पल उसने अपने होंठ मेरे होठों से चिपकते हुए अपने मुँह का वीर्य मेरे मुँह में ट्रांसफर कर दिया।

अगले करीब आधे घंटे में इसी तरह तीन-तीन लौड़ों से वीर्य छुड़ा कर हम दोनों चुदैल औरतों ने जी भर कर वीर्य पीने के साथ-साथ वीर्य की गंदी होली खेली। जैसे ही एक लौड़े का झड़ना पूरा होता तो वो छेद में पीछे खींच लिया जाता और उसकी जगह नया लौड़ा हाज़िर हो जाता।

उसके बाद मैंने देखा कि सशा ने बटन दबा कर वो छेद बंद कर दिया और खड़ी होकर पीछे वाली दीवार में थोड़ा ऊँचे वाले ग्लोरी-होल का बटन दबा दिया। कुछ ही पलों में उस ग्लोरी-होल में से नया एक फुट लंबा और काला लौड़ा निकल आया। मैं समझ गयी कि सशा का इरादा उसे अपनी चूत में लेकर चोदने का था। सशा उस लौड़े पर थूक-थूक कर उसे मुठियाने लगी। मैं भी अब चुदने के लिये बेकरार थी। मैंने भी अपनी दीवार में उँचे वाले ग्लोरी-होल का शटर खोल दिया और मेरे लिये भी करीब एक फुट लंबा लौड़ा हाज़िर हो गया लेकिन ये बिल्कुल गोरा-चिट्टा लौड़ा था। सशा की तरह मैं भी उसे मुठियाने लगी।

इस दौरान सशा घूम कर दीवार से अपनी पिठ सटा कर खड़ी हो चुकी थी। उसने अपने आगे एक कुर्सी खींच ली थी और एक टाँग उठा कर अपना पैर उस पर रख कर अपने सेंडल की पेंसिल हील कुर्सी की गद्दी में गड़ा रखी थी। अपना वाला लौड़ा मुठियाते हुए मैं पीछे गर्दन घुमा कर देख रही थी कि सशा किस तरह लौड़ा अपनी चूत में ले रही है। दीवार से अपनी कमर और कुल्हे सटाते हुए वो थोड़ी आगे झुकी और अपनी टाँगों के बीच में हाथ डाल कर उस लौड़े को पकड़ कर उसका सुपाडा अपनी चूत पर टिकाते हुए अंदर घुसेड़ लिया। अपने सामने कुर्सी की बैक पर अपने दोनों हाथ टिका कर वो अपने चूतड़ दीवार पर पीछे ठोंकने लगी और वो लौड़ा उसकी चूत में अंदर बाहर खिसकने लगा। दीवार के पीछे मौजूद अन्जान आदमी भी धक्के मारते हुए सशा की मदद कर रह था। सशा सिसकते हुए मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी।

मेरे ग्लोरी-होल वाला लौड़ा भी मेरे थूक से बुरी तरह भीग कर चीकना और मुठियाने से बेहद कड़क हो चुका था। मैंने भी दीवार से अपनी कमर टिका कर वो लौड़ा अपनी चूत में ले लिया। इतना बड़ा लौड़ा अपनी चूत में लेने में मुझे कुछ खास दिक्कत नहीं हुई। मेरी दीवार के पीछे वाला अंजान आदमी भी दनादन मेरी चूत में लौड़ा पेलने लगा। अब सशा और मैं बिल्कुल आमने-सामने खड़ी अपने चूतड़ पीछे दीवारों पर ठोंक-ठोंक कर ग्लोरी-होल में निकले हुए लौड़ों से चुदवा रही थीं। इसलिये सहारे के लिये मैंने भी आगे झुक कर सशा वाली कुर्सी की बैक पर ही उसके हाथों के पास अपने दोनों हाथ टिका दिये। केबिन इतना संकरा था कि सशा ने बड़े आराम से अपनी एक बाँह मेरी गर्दन में डाल दी और हम दोनों चुदते हुए एक-दूसरे को चूमने लगीं। मेरी सहुलियत के लिये सशा ने कुर्सी थोड़ी घुमा ली जिससे कि मैं भी एक टाँग उठ कर अपना पैर उस पर रख सकूँ।

जब हमारा एक घंटे का वक्त पूरा हुआ तो हम दोनों की चूतों में दो-दो लौड़े अपना वीर्य भर चूके थे। इस दौरान मैं कईं मर्तबा झड़ी और मेरी चूत ने हर बार इस कदर पानी छोड़ा कि मेरी दोनों टाँगें बुरी तरह भीग गयी थीं। सशा की भी करीब-करीब यही हालत थी। हम दोनों ही हाँफती हुई ज़मीन पर टाँगें पसारे दिवारों से पीठ टिका कर बैठ गयी। ब्लू-फिल्म कब पूरी होकर रुक गयी थी पता ही नहीं चला।

वॉव! दैट वाज़ सो गुड! कहते हुए सशा स्कॉच की बोतल मुँह से लगाकर सिप लेने लगी। उसमें अभी भी आधे से थोड़ी ज्यादा स्कॉच बाकी थी। दो-तीन सिप लेकर उसने बोतल मेरी तरफ बढ़ा दी और हम दोनों के लिये सिगरेट जलाने लगी। येस... रियली ग्रेट! थैंक यू सशा फोर ब्रिंगिंग मी हेयर! मैं बोतल में से सिप लेते हुए बोली। हम दोनों इसी तरह ज़मीन पर बैठे-बैठे बातें करती हुई सिगरेट और स्कॉच पीने लगीं। ज़िंदगी में कभी मैंने एक सिगरेट भी स्मोक नहीं की थी लेकिन पिछले चौबीस घंटों में ही मैं करीब दो दर्जन सिगरेट स्मोक कर चुकी थी। चेन स्मोकर सशा की सोहबत में मैं भी शाम से उसके साथ-साथ लगातार सिगरेट स्मोक कर रही थी। ओह शिट! वी डिड नॉट यूज़ कंडोंस व्हाइल फकिंग दोज़ ज्यूसी कॉक्स! टेबल पर रखे कंडोम के पैकेट देखकर सशा को ख्याल आया। ओह कम ऑन सशा... वी वर हैविंग सो मच फन सकिंग एंड फकिंग दोज़ कॉक्स.... हॉव कुड वी केयर अबॉउट यूज़िंग कंडोम्स ओर एनिथिंग एल्स! मैं सिगरेट का धुँआ छोड़ते हुए बे-परवाही से बोली।

पंद्रह मिनट बाद उठ कर बड़ी-मुश्किल से जैसे-तैसे हमने अपने कपड़े पहने क्योंकि नशे में कुछ सूझ नहीं रहा था। पहले से ही हम नशे में लड़खड़ाती यहाँ आयी थीं और अब तो हम दोनों मिलकर स्कॉच की आधी बोतल गटक चुकी थीं। कंधों पर अपने पर्स लटकाये और बाँहों में बाँहें डाले हम दोनों झूमती हुई नीचे आयीं। सशा के हाथ में करीब आधी भरी स्कॉच की बोतल भी थी। रिसेफ्शन पर वही औरत मौजूद थी। डिड यू हैव अ गुड टाइम? उसने मुस्कुराते हुए पूछा।

येस द बेस्ट टाइम! हम दोनों नशे में खिलखिलाती हुई बुलंद आवाज़ में बोलीं और बाहर सड़क पर आ गयीं। रात के करीब एक बज रहे थे लेकिन पिगाल डिस्ट्रिक्ट इलाके में इस वक्त भी पुरी रौनक थी। जगह-जगह नशे में झूमते आधे नंगे लोगों के झुँड या खुले आम चुमाचाटी करते लोग दिख जाते। ग्राहकों को उकसाती रंडियाँ और ज़िगोलो भी हर जगह मौजूद थे।

हमें मेट्रो स्टेशन जाना था लेकिन नशे में कुछ होश नहीं था कि हम जा कहाँ रही हैं। सिगरेट स्मोक करती हुई और बोतल से स्कॉच के सिप लेती हुई हम दोनों नशे में चूर और मस्ती में झूमती लड़खड़ाती और एक दूसरे को सहारा देती हुई पिगाल डिस्ट्रिक्ट की मेन रोड पर चली जा रही थीं। नशे में चूर हम दोनों बहकी- बहकी बातें करती हुई जोर-जोर से बे-वजह ही हंस रही थीं। ऐसे ही बीच-बीच में रुक कर एक दूसरे के होंठ चूम लेतीं या फिर खुलेआम दूसरे टॉप में हाथ डाल कर मम्मे भींच देती। इसी बीच में अचानक मुझे ज़ोर से पेशाब लगी तो सशा खिलखिला कर हंसते हुए बोली की पेशाब करना है तो वहीं खड़े-खड़े पेशाब कर लूँ। मुझसे भी रहा नहीं गया। पैंटी तो वैसे ही स्ट्रिप क्लब से ही नदारद थी। बेशर्मी से हंसते हुए एक दुकान के सामने ही खड़े-खड़े ही मैंने अपनी स्कर्ट उठा कर पेशाब की धार छोड़ दी। मेरी दोनों टाँगें, पैर और सैंडल बुरी तरह पेशाब में भीग गये और पेवमेंट पर नीचे मेरे पैरों के पास पेशाब फैल गया। सच कहूँ तो इस टुच्ची हरकत में भी मुझे बहद रोमाँच आया। मेरे बाद सशा ने भी अपनी स्कर्ट उठा कर पेशाब करना शुरू कर दिया। वो बिल्कुल मेरे समने खड़ी थी और जानबूझ कर उसने पेशाब की धार मेरी टाँगों और मेरे पैरों पर भी छोड़ी।

धीरे-धीरे हम दोनों ने मिलकर वो स्कॉच की वो पूरी बोतल गटक डाली और हम इस कदर नशे में चूर हो गयीं कि चार-पाँच कदम भी चल पाना मुश्किल हो गया। कभी सशा लुढ़क जाती तो मैं उसे किसी तरह उठाती और तो कभी मैं लुढ़क जाती और वो मुझे सहारे देकर उठने की कोशिश करती। सशा ने तो उल्टी करनी शुरू कर दी और नशे में धुत्त होकर पेवमेंट पर ही आँखें बंद करके पसर गयी। मेरी खुद की हालत उससे ज्यादा बेहतर नहीं थी। मैं भी लुढ़कते हुए उसके पास बैठ गयी। नसीब से एक टैक्सी हमारे पास आकर रुकी। टैक्सी वाले ने फ्रेंच में और टूटी फूटी सी इंगलिश में कुछ कहा लेकिन मैं तो नशे में बुरी तरह धुत्त थी और उसकी कोई बात मेरे पल्ले नहीं पड़ी। वो उतर कर मेरे पास आया तो मैंने बड़बड़ाते हुए अपने होटल का नाम दो तीन बार बताया। उसने ही सशा को और मुझे सहारा दे कर टैक्सी में बिठाया और फिर हमें होटल पहुँचाया।

होटल पहुँच कर होटल स्टॉफ किसी बंदे ने सहारा दे कर हम दोनों को मेरे रूम में पहूँचाया। सुबह दस बजे मेरी आँख खुली तो सशा को भी अपने ही बिस्तर में पाया। वो भी मेरी तरह सिर्फ सैंडिल पहने बिल्कुल नंगी बेखबर होकर सो रही थी। मुझे बिल्कुल होश नहीं कि हम कब, कहाँ और कैसी नंगी हुईं। मुमकिन है कि टैक्सी वाले ने या फिर हमें कमरे तक पहुँचाने वाले बेल-बॉय्ज़ ने हमारी बेहोशी का फायदा उठाया हो।

शाम तक ससुर जी और हैमिल्टन भी टूर से लौट आये। कॉन्फ्रेंस दो दिन और चली। ज़हिर सी बात है कि इन दो दिनों में भी मैं ससुर जी और हैमिल्टन से चुदी और सशा के साथ लेस्बियन चुदाइ का लुत्फ भी उठाया। इनके अलावा ससुरजी से छिपा कर मैंने होटल में और भी कईं लोगों के साथ जम कर अय्याशी की।

कॉन्फ्रेंस से वापस लौटते हुए मुझे बहुत दुख हुआ।

वापस आने के बाद मेरा तो काया पलट ही चुका था। हर वक्त दिमाग में बस चुदाई का ख्याल रहता। हर जगह हर मर्द को मैं बूरी नज़र से ही देखने लगी। ससुर जी तो मेरे दिवाने हो ही चुके थे और हमारे बीच अब कोई शरम या रिश्ते का लिहाज बाकी नहीं रह गया था। इसलिये सासू जी की नजरें बचा कर कभी रात को तो कभी घर से बाहर, किसी होटल में तो कभी उनके केबिन में मिलते थे। सासूजी को हमारे जिस्मानी ताल्लुकात की भनक नहीं लगी। चुदाई के अलावा मुझे दूसरी बुरी आदतें भी लग गयी थीं। शराब पीने की तो मैं पहले से ही शौकीन थी लेकिन रोज़ाना पीने की आदत नहीं थी। अब तो हर रोज़ सिगरेट-शराब की तलब होने लगी। ससुरजी को फुसला बहका कर शराब का इंतज़ाम तो हो जाता लेकिन सिगरेट तो मुझे बहुत छुपछुपा कर कभी-कभी ही स्मोक करने को मिलती। ससुर जी के साथ चुदाई में मज़ा तो बहुत आता था पर वो हर वक्त तो मेरे साथ हो नहीं सकते थे। वैसे भी मैं तो इतनी बिगड़ गयी थी कि अक्सर मेरा मन करता कि दो या तीन मर्दों से एक साथ चुदवा‍ऊँ। लेकिन ये मुमकीन नहीं था। जब ससुर जी के साथ मौका नहीं मिलता तो अपने कमरे में ब्लू-फिल्मों की डी-वी-डी चला कर या फिर पैरिस की अय्याशियाँ याद करते-करते अपने नये डिल्डो से अपनी प्यास बुझाती। हालत ये थी कि घर के नौकरों तक को मैं गंदी निगाह से देखती लेकिन सास-ससुर की वजह से कुछ भी करने की हिम्मत नहीं होती थी।

अभी जावेद की वापसी में काफी वक्त बाकी था। इसी बीच में जेठ जी भी मुझे लेने आ गये। काफी दिनों से उनके पास आकर ठहरने के लिये ज़िद कर रहे थे, लेकिन मैं ही टालती रही। मगर इस बार ना कहा नहीं गया। मैं उनके साथ उनके घर हफ़्ते भर रही। हम दोनों औरतें उनकी दो बीवियों की तरह उनके अगल-बगल सोती थीं। रात को फिरोज़ भाई जान हम दोनों को ही खुश कर देते। उनमें अच्छा स्टैमिना था। नसरीन भाभी जान तो मुझ पर जान छिड़कने लगी थी। हमारे बीच अब कुछ भी राज़ नहीं रहा। मेरा डिल्डो देख कर तो वो बहुत उत्तेजित हुईं। फिरोज़ जब ऑफिस में होते तो हम दोनों शराब पी कर दिन भर लेस्बियन सैक्स इंजॉय करतीं। नसरीन भाभी जान को भी मैंने सिगरेट शुरू करवा दी। फिरोज़ जब ऑफिस से लौटते तो उसके पहले वो खुद बन संवर कर तैयार होती और फिर मुझे भी सजाती संवारती। हम दोनों उनके आने के बाद छोटे-छोटे सैक्सी कपड़ों में उनसे लिपट जातीं और उनके साथ चुदाई का खेल शुरू हो जाता।

जावेद के लौट आने के बाद हम वापस मथुरा शिफ़्ट हो गये। ताहिर अज़ीज़ खान जी ने मुझे चोदने का एक रास्ता खुला रखा। उन्होंने जावेद को कह दिया, शहनाज़ एक बहुत अच्छी सेक्रेटरी है। अभी जो सेक्रेटरी है वो इतनी एफ़िश्येंट नहीं है। इसलिये कम से कम हफ़्ते-दो-हफ़्ते में इसे भेज देना दिल्ली। मेरे जरूरी काम निबटा कर चली जायेगी।

जावेद राज़ी हो गया कि मैं हर दूसरे हफ़्ते में एक दो दिन के लिये ससुर जी के ऑफिस चली जाया करुँगी और सारे पेंडिंग काम निबटा कर आ जाया करुँगी। लेकिन असल में मैंने कभी भी ऑफिस में कदम नहीं रखा। ताहिर अज़ीज़ खान जी ने एक फ़ाईव स्टार होटल में सुईट ले रखा था जहाँ मैं सीधी चली जाती और हम दोनों एक दूसरे के जिस्म से अपनी प्यास बुझाते।

मथुरा में तो मेरी अय्याशियों पर कोई रोक-टोक नहीं थी। शुरू-शुरू में जावेद थोड़ा हैरान हुए और उन्होंने थोड़ा एतराज़ भी जताया पर धीरे-धीरे मेरी स्मोकिंग और रोज़-रोज़ शराब पीने की आदत को उन्होंने चुपचाप कुबूल कर लिया। चुदाई के लिये मेरे नये जोश और खुल्लेपन से तो उन्हें बेहद खुशी हुई। सैक्स के मामले में तो जावेद भी काफी ओपन नज़रिये वाले हैं। अब तो सोसायटी पार्टियों में मैं पहले से भी ज्यादा बढ़चढ़ कर इंजॉय करती और हम लोग अब वाइफ स्वैपिंग में भी शरीक होने लगे। जावेद कईं बार बिज़नेस टूर या और मसरूफियत की वजह से इन पर्टियों में नहीं जा पाते तो भी मैं इन पार्टियों में जाने का मौका नहीं छोड़ती। जब भी मौका मिलता मैं उनकी गैरहाज़री में भी अकेली ही क्लबों में और दूसरी पर्टियों में शरीक होती। इस तरह मुझे कईं बार ग्रूप सैक्स का भी मौका मिल जाता। जावेद को दूसरे मर्दों से मेरे तल्लुकातों से बिल्कुल एतराज़ नहीं था। उनके बिज़नेस रिलेशन्स के लिये भी अच्छा था क्योंकि शायद ही उनका कोई क्लायंट या कॉन्ट्रक्टर होगा जिसके साथ मैंने अय्याशी ना की हो।

दो तीन महीने में हालत ये हो गयी कि मैं अक्सर दिन में भी माली, दूधवाले, सब्ज़ीवाले से भी चुदवाने लगी। यहाँ तक कि कोरियर वाले या किसी सेल्समैन से चुदवाने से भी बाज़ नहीं आती। मेरे इन ताल्लुकातों के बारे में जावेद अंजान नहीं थे लेकिन हमने कभी इस बारे में बात नहीं की। इस दौरान हम लोग कईं बार फिरोज़ भाई जान और नसरीन भाभी जान के यहाँ भी गये या वो दोनों भी अक्सर हमारे यहाँ आ जाते और हम चारों खूब ऐश करते।

साल भर बाद की बात है कि एक दिन मुझे जोर की उबकायी आयी। मैंने डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने प्रेगनेंसी कनफर्म कर दी। मैं खुशी से उछल पड़ी। लेकिन इसका असली बाप कौन? ये क्याल दिमाग में घूमता रहा। मैंने फैमिली में अपने तीनों सैक्स पार्टनर्स जिनसे मैं चुदती थी, ये न्यूज़ दी। तीनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तीनों को मैंने कहा कि वो बाप बनने वाला है।

पहले के लिये: इस उम्र में बाप बनने की खुशी। दूसरे के लिये: उसकी मर्दानगी का सबूत और तीसरे के लिये: उसके घर की पहली खुशी थी।

तीनों ने मुझे प्यार से भर दिया। पूरे घर में हर शख्स खुशी में झूम रहा था। सास, नसरीन भाभी, सभी बिज़ी थे घर के नये मेम्बर के आने की खुशी में। हमारा पूरा खानदान दिल्ली में ताहिर अज़ीज़ खान जी के बंगले पर सिमट आया था। बस मुझे एक अजीब सी उलझन कचोट रही थी कि मेरे होने वाले बच्‍चे का अब्बा कौन है। मैं तो बस यही दुआ कर रही थी कि चाहे वो जिसका भी हो, अल्लाह करे हो वो इसी घर का खून। देखने बोलने में इसी परिवार का ही नज़र आये। वरना मैंने जितने लोगों के साथ सैक्स किया था, उनमें से किसी और का हुआ तो लोगों को समझा पाना मुश्किल होगा।

!!! समाप्त !!!


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मुख्य पृष्ठ (हिंदी की कामुक कहानियों का संग्रह)


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