तरक्की का सफर

लेखक: राज अग्रवाल


भाग-१६


आर्यन और सायरा एक दूसरे को चूमे जा रहे थे कि रूही कमरे में दाखिल हुई। “ये, यहाँ पर सब क्या हो रहा है रूही थोड़ा गुस्से में बोली।

“म..... मैडम.... मै... म....” सलमा घबराने का नाटक करते हुए बोली।

“हाय अल्लाह!!! ये तो मैडम हैं..... आर्यन बाबा! उठो मुझ पर से”, सायरा चिल्लाती हुई उसे अपने ऊपर से हटाने लगी।

“नहीं! मैं तुम्हें एक बार और चोदना चाहता हूँ!” आर्यन उसे जोर से अपनी बाँहों में भरते हुए बोला।

“पहले मुझ पर से उतरो...... फिर बताती हूँ!” कहकर सायरा उसे उठाने में अपना पूरा जोर लगने लगी।

“क्या कोई मुझे बतायेगा कि ये सब क्या हो रहा है रूही फिर से बोली। सलमा की समझ में नहीं आ रहा था कि रूही के दिमाग में क्या है, इसलिये वो चुप रही।

सायरा उठ कर पलंग पर बैठ गयी और रोने लगी।

“सायरा! मैंने तुम्हें यहाँ कपड़े धोने के लिये रखा है ना कि मेरे बेटे के साथ चुदाई करने के लिये!” रूही थोड़ा गुस्सा करते हुए बोली।

सुबकते और रोते हुए सायरा धीरे से इतना ही कह पायी, “म... म.... मुझे पता नहीं क्या हो गया था मैडम।”

“प्लीज़ मम्मी! मैं इसे एक बार और चोदना चाहता हूँ।” आर्यन बीच में बोला।

“अपना मुँह बंद रखो और चुपचाप बैठे रहो”, रूही ने उसे डाँटते हुए कहा।

आर्यन अपना मुँह खोल कर कुछ कहने जा रहा था कि सलमा ने खींच कर अपने पास किया और कान में फुसफुसायी, “आर्यन बाबा! प्लीज़ आप चुप रहिये।”

“तुम्हारे अम्मी-अब्बा क्या कहेंगे जब मैं उन्हें बताऊँगी कि कैसे तुमने मेरे बेटे की वासना को भड़का कर उससे चुदवाया है”, रूही उसे डराते हुए बोली। सायरा और जोर-जोर से रोने और सुबकने लगी।

तभी सलमा बीच में बोली, “सायरा! मैडम के पैरों पे पड़ कर अपनी गलतियों की माफी माँग लो, ये तुम्हें माफ़ कर देंगी।”

“मैडम! आप मुझे जो चाहे सज़ा दे दीजिये पर मेरे घर वालों को कुछ मत बताइयेगा”, सायरा रूही के पैरों को पकड़ते हुए बोली, “इसके लिये आप जो कहेंगी मैं करने को तैयार हूँ।”

“पहले उठकर खड़ी हो जाओ!” रूही ने धीमे से कहा, “और मुझे ये बताओ कि तुमने ऐसा किया क्यों इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“मैडम, मुझे सही पता नहीं कि मैंने ऐसा क्यों किया, सलमा तुम क्यों नहीं मैडम को बताती हो। आबिदा तुम तो बताओ..... ओहह मैं अपने आपको संभाल नहीं पायी। पता नहीं क्यों मेरी चूत में जोरों की खुजली हो रही थी”, सायरा अपनी चूत को रगड़ते हुए बोली।

“सलमा! इसे मेरे कमरे में लेकर आओ”, रूही ने हुक्म दिया, “फिर देखते हैं कि इसकी खुजलाती हुई चूत के साथ क्या कर सकते हैं।”

“चलो अपने कपड़े पहन लो”, सलमा ने सायरा से कहा। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“नहीं! इसे इसी हालत में लेकर आओ। और तुम दोनों भी जिस तरह हो..... उसी तरह इसके साथ आओरूही ने कहा। रूही अपने कमरे में दाखिल हुई और उसके पीछे तीनों लड़कियाँ और आर्यन।

“सायरा अब इन तगड़े और शानदार लंडों को देखो। इनमें से किस लंड से पहले तुम अपनी कसी चूत चुदवाना चाहोगी जिससे तुम्हारी चूत की खुजली मिट सके रूही ने पूछा।

“प.....प.... पर मैडम???” सायरा इतने सारे लंडों को निहारते हुए हकलायी।

“मैं कुछ भी नहीं सुनुँगी, तुमने वादा किया है कि जो मैं कहुँगी... तुम करोगी। अब लंड अपनी चूत में लेने को तैयार हो जाओ... विजय तुम पहले इसे चोदोगे”, रूही ने जैसे हुक्म दिया।

फिर जिस तरह हम सब ने टीना के जन्मदिन पर किया था वैसा ही किया। सब मिलकर सामुहिक चुदाई कर रहे थे। कोई चूत में लंड डाले हुए था तो कोई किसी की गाँड में। कोई चूत चाट रहा था तो कोई लंड चूस रही थी। इसी तरह शाम हो गयी।

“अब बताओ तुम्हारा दिन कैसा गया रूही ने सायरा से पूछा।

“मैडम! पहले तो मैं बहुत डरी हुई थी पर बाद में बहुत मज़ा आया”, सायरा ने मुसकराते हुए जवाब दिया।

“आज तुमने मुझे खुश कर दिया। ये लो तुम्हारा इनाम”, इतना कहकर रूही ने उसे एक हीरे का पेंडेंट दे दिया और साथ में पाँच हज़ार रुपये।

“मैडम ये क्या मेरा कुँवारापन खोने की कीमत है? मैं कोई वेश्या नहीं हूँ!” सायरा उदास होते हुए बोली।

“तुम वेश्या नहीं हो..... मैं जानती हूँ”, रूही ने नम्रता से कहा, “ये पेंडेंट मैं तुम्हें इसलिये दे रही हूँ कि आज मेरे बेटे ने पहली कुँवारी चूत की चुदाई की है। तुमने उसे लड़के से मर्द बना दिया..... और ये रुपये इसलिये हैं ताकि तुम कुछ अच्छे कपड़े, सैंडल और मेक-अप वगैरह का सामान खरीद सको..... आबिदा और सलमा इसमें तुम्हारी मदद कर देंगी.... अब से इस घर में आओ तो तुम भी इन दोनों की तरह ही टिप-टॉप बन कर आओ।”

“शुक्रिया मैडम! पर ये पेंडेंट तो बहुत कीमती लगता है”, सायरा पेंडेंट को ऊपर से नीचे देखते हुए बोली, “अगर मेरे घर वाले इसे देखेंगे तो समझेंगे कि मैं इसे चुरा के लायी हूँ।”

“तुम इसकी चिंता मत करो! ऐसा नहीं होगा”, रूही हँसते हुए बोली, “आबिदा तुम्हें घर तक छोड़ आयेगी और तुम्हारे घर वालों को बता देगी कि ये रुपये और पेंडेंट मैंने तुम्हें दिया है।”

“चलो सायरा! अब घर चलते हैं”, आबिदा दरवाजे की ओर बढ़ते हुए बोली।

जैसे ही सायरा जाने के लिये मुड़ी, आर्यन ने पूछा, “सायरा! अब हम फिर चुदाई कब करेंगे

“शुक्रवार को!” उसने शरमाते हुए कहा और आबिदा के पीछे भाग गयी। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

जब आबिदा वापस लौटी तो रूही ने उससे पूछा, “उसके अम्मी-अब्बा से तुमने क्या कहा

“यही कि ये आपने उसे आर्यन बाबा के जन्मदिन पर इनाम दिया है”, आबिदा ने जवाब दिया।

“क्या उन्होंने तुम्हारी बात पर विश्वास कर लिया रूही ने पूछा।

“हाँ कर लिया... और मुझसे ये भी पूछा कि क्या मुझे भी कोई तोहफ़ा मिला है”, आबिदा हँसी।

“तो तुमने क्या जवाब दिया रूही बोली।

“मैंने कहा कि मुझे तो मेरा तोहफ़ा दो दिन पहले ही मिल गया था, है ना आर्यन बाबा आबिदा आर्यन की ओर देखते हुए बोली।

दूसरे दिन आयेशा ने प्रीती से वही स्पेशल दवाई माँगी। “तुम्हें क्यों चाहिये प्रीती ने पूछा।

“मैं इसे पीकर इसका असर देखना चाहती हूँ”, आयेशा ने जवाब दिया।

“नहीं इसे मत देना! इसकी चूत पहले से ही इतनी भूखी है और अगर इसने ये दवाई पी ली तो ये तो हमारे लंड से चुदवा चुदवाकर हमें मार डालेगी!” सब लड़के चिल्लाये।

“आयेशा! मुझे लगता है कि ये लड़के सही कह रहे हैं। ये दवाई तो लड़की की चूत को गरमाने के लिये है। अल्लाह ने तो तुम्हारी चूत को पहले से ही इतना गरमा रखा है कि तुम्हें इस दवाई की जरूरत नहीं है”, प्रीती ने उसे समझाया।

“तुम लोगों में कोई नहीं चाहता कि मैं भी थोड़ा मज़ा लूँ!” आयेशा ने हँसते हुए शिकायत की।

हमारे अगले दो दिन खूब मौज मस्ती में गुजरे, बल्कि ये कहो कि चुदाई में गुजरे। जब हम सब रूही से विदाई ले रहे थे तो मैंने रूही को हमारे यहाँ आने की दावत दी। “शुक्रिया, मुझे जैसे ही टाईम मिलेगा मैं जरूर आऊँगी”, रूही ने जवाब दिया।

“रूही इस शनिवार को क्यों नहीं आ जाती हो? हम भी सोमवार को अपने घर वापस जाने वाले हैं। अगर आ जाओगी तो आखिरी बार हमारा मिलना हो जायेगा”, जय ने कहा।

“हाँ ये अच्छा रहेगा। फातिमा और आर्यन को भी अपने साथ ले आना”, मैंने कहा।

रूही कुछ देर तक सोचती रही। “ठीक है! रवि भी दो दिन बाद चला जायेगा फिर मैं फ़्री हूँ”, रूही बोली, “ठीक है हम शनिवार कि शाम तक पहुँच जायेंगे।”

जब हमारा सामान गाड़ी की डिक्की में रखा जा रहा था तो मैंने देखा कि आयेशा हम सब के बीच नहीं थी। “ज़ुबैदा! तुम्हें पता है कि आयेशा कहाँ है मैंने पूछा।

“वो मुझसे बोली थी कि वो रवि और आर्यन को गुड-बॉय बोल कर आ रही है”, ज़ुबैदा ने जवाब दिया।

“गुड-बॉय करके तो मुझे आधा घंटा हो गया”, रवि ने कहा। इतने मैं आयेशा और आर्यन हँसते हुए आ गये। “हरामी साले, लगता है कि तेरा चुदाई से जी नहीं भरा अभी तक रूही ने आर्यन को धीरे से एक थप्पड़ लगाते हुए कहा। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“ओह मम्मी! मैं आयेशा को कुछ दे रहा था जिससे वो मुझे याद रखे”, आर्यन ने शर्माते हुए कहा।

“कहीं देने के चक्कर में इसे प्रेगनेंट तो नहीं कर दिया..... जिससे ये तुम्हें ज़िंदगी भर याद रखे रूही हँसते हुए बोली।

“आर्यन डरो मत! मैं प्रेगनेंट नहीं होऊँगी पर हाँ मैं तुम्हें हर वक्त हर पल याद रखुँगी”, आयेशा ने उसे कहा।

जब हम घर पहुँचे तो मैंने जय से पूछा, “अच्छा बताओ जब रूही यहाँ आयेगी तो तुम किस तरह की पार्टी करना चाहोगे।”

जय कुछ कहता उससे पहले विजय बोल उठा, “मुझे तो कुँवारी चूत चोदने में मज़ा आता है।”

“विजय तुम चुप बैठो। पिछली बार हम तुम्हारी बात मान चुके हैं। अब जय की बारी है।” मैंने जवाब दिया।

“और हमारा क्या, तुम हमसे नहीं जानना चाहोगे कि हमें क्या पसंद हैराम और श्याम साथ-साथ बोले।

“नहीं! मैं जरूरी नहीं समझता!” मैंने थोड़ा गुस्से में कहा।

“दीदी! तुम ही जीजाजी को समझाओ ना।”

प्रीती हँसते हुए बोली, “तुम लोग राज का बुरा मत मानो। ये मज़ाक कर रहा है। आखिर जय और विजय इस घर के दामाद हैं, इसलिये उनका स्थान पहले है।”

“तो क्या हुआ? हम भी तो इनके साले हैं।” वो कहावत भूल गयी क्या, “सारी खुदाई एक तरफ जोरू का भाई एक तरफ राम ने कहा।

“हाँ तुम दोनों ठीक कह रहे हो। मैं तो मज़ाक कर रहा था। ऐसा है पहले जय की पसंद देख लेते हैं, फिर तुम दोनों की”, मैंने कहा।

“मेरा तो सपना है कि एक माँ की चुदाई उसकी बेटी के साथ करूँ!” जय ने कहा।

“अच्छा सपना है.... मैं भी यही ख्वाहिश रखता हूँ”, राम ने कहा।

“और मैं तो विजय की तरह किसी कुँवारी चूत को चोदना चाहुँगा।”

थोड़ी देर सोचने के बाद मैं बोला, “ठीक है! मैं सब इंतज़ाम कर लूँगा। मैं एक जोड़ी माँ बेटी की भी ले आऊँगा जिसे तुम लोगों ने नहीं चोदा होगा।”

आगले दो दिन मैं अपने बचे हुए काम पूरा करने में लगा हुआ था। तीसरे दिन आयेशा ने मुझसे कहा, “सर मैंने सुना ही कि शनिवार की रात को आपके यहाँ एक पार्टी है

“हाँ है!” मैंने जवाब दिया, “किसने बताया तुम्हें।” इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“विजय ने!” आयेशा ने कहा, “क्या मुझे नहीं बुलायेंगे

“नहीं मैं तुम्हें नहीं बुला सकता क्योंकि ये सिर्फ़ माँ-बेटी की पार्टी है”, मैंने जवाब दिया।

मेरी बात सुनकर वो उदास हो गयी। मैंने उसे अपने पास खींचा और कहा, “आयेशा समझने की कोशिश करो..... वैसे भी तुम्हारी चुदाई तो होती रहती है।”

“कहाँ होती है.... देखिये ना”, कहकर उसने मेरा हाथ अपनी चूत पे रख दिया। मैंने देखा कि उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।

“आयेशा, मेरी जान! पार्टी के अलावा जो तुम कहो मैं करने को तैयार हूँ”, मैंने उसे बाँहों में भरते हुए कहा।

“आप सच कह रहे हैं? मुकर तो नहीं जायेंगे उसने मेरे होंठों को अपने होंठों के बीच लेते हुए कहा।

“ना नहीं कहुँगा, तुम कह कर तो देखो।”

“तो आज पूरा दिन मुझे इस सोफ़े पर चोदते रहिये!” आयेशा ने कहा।

“मेरा बहुत काम पेंडिंग पड़ा है..... इसलिये पूरा दिन तो नहीं, हाँ! दो बार तुम्हारी चुदाई करूँगा और फिर तुम छुट्टी लेकर विजय और दूसरों से चुदवाने जा सकती हो”, मैंने कहा।

“ठीक है, जब आपकी यही मरज़ी है तो......” उसने थोड़ा निराश होते हुए कहा।

जब मैं दूसरी बार उसकी चूत में अपना लंड डाल रहा था उसी वक्त फोन कि घंटी बजी। मैं फोन उठाना चाहता था पर आयेशा ने मुझे रोक दिया।

“डार्लिंग! जरूरी फोन भी हो सकता है”, मैंने कहा।

“इस समय मेरी चूत से जरूरी कोई काम नहीं है! बस मुझे इसी तरह चोदते जाइये”, आयेशा ने अपने कुल्हे उछालते हुए कहा, “हाँ सर! इसी तरह जोर से अपना लंड घुसाते रहिये।” फोन दो चार बार बज कर बंद हो गया।

ऑफिस के दरवाजे पर हल्की सी दस्तक हुई और नसरीन ऑफिस में आ गयी। “सर! आपको डिस्टर्ब करने के लिये माफी चाहती हूँ पर एम-डी आपको अर्जेंटली बुला रहे हैं।”

“कह दो कि ये नहीं आ सकते”, आयेशा ने झल्लाते हुए कहा, “तुम देख नहीं सकती कि ये बीज़ी हैं।”

“नहीं नसरीन! तुम ये मत कहना। कहना कि जैसे ही मुझे काम से फ़ुर्सत मिलेगी मैं आ जाऊँगा”, मैंने कहा। फिर मैंने आयेशा से कहा, “क्या तुम चाहती हो कि मैं अपनी नौकरी से हाथ धो बैठूँ बदले में वो शरारत से मुस्कुरा पड़ी। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

थोड़ी देर में एम-डी मेरे केबिन में आया। “मुझे पहले ही समझ जाना चाहिये था कि तुम चुदाई में व्यस्त हो, इसलिये समय नहीं मिल रहा”, एम-डी हँसा, “राज! मुझे मिस्टर खोसला के साथ हुई तुम्हारी मीटिंग की डिटेल्स चाहिये।”

“क्या आपने वो रिपोर्ट देखी नहीं मैं चौंक पड़ा था। फिर आयेशा की ओर देखते हुए मैंने पूछा, “मैंने तुम्हें मिस्टर खोसला की रिपोर्ट डिकटेट करायी थी, वो कहाँ है

“अगर आपने डिकटेट करायी होती तो मैं उसे टाईप ना कर देती। मैं अपने काम में पूरी तरह पाबंद हूँ”, आयेशा अपनी बात पे जोर देती हुई बोली।

करीब दस मिनट के बाद एम-डी ने कहा, “नसरीन इसकी डेस्क पूरी तरह देख चुकी है..... वो वहाँ नहीं है।”

“आयेशा! ये तुमने क्या किया, जरा अपने दिमाग पे जोर दो”, मैंने फिर कहा।

“मैं कैसे सोचूँ.... जब एक लंड मेरी चूत को इतनी जोर से चोदे जा रहा है”, आयेशा ने शिकायत की।

“आयेशा या तो अपने दिमाग पे जोर दो नहीं तो मैं तुम्हारी चूत को चोदना बंद कर दूँगा”, मैंने उसे धमकाते हुए कहा।

“नहीं सर! ऐसा मत करना, मुझे याद आ रहा है..... मैंने वो रिपोर्ट मीना मैडम को दी थी”, आयेशा ने कहा।

“सर आपको तकलीफ हुई..... उसके लिये माफी चाहता हूँ”, मैंने एम-डी से कहा।

“मिस्टर खोसला दो बजे ऑफिस आने वाले हैं, कांट्रैक्ट साइन करने कि लिये, मैं चाहता हूँ कि उस समय तुम भी वहाँ मौजूद रहो”, एम-डी ने कहा और केबिन के बाहर चले गये।

शनिवार कि सुबह ही रूही, फातिमा और आर्यन के साथ मेरे घर पहुँच गयी। एक दूसरे को नमस्ते करने के बाद आर्यन ने लड़कियों को अपनी बाँहों में ले लिया, “आओ मैं तुम्हें बताता हूँ कि तुम लोग पूरे हफ़्ते क्या मिस करती रही हो।” हँसते और खिलखिलाते हुए वो लड़कियाँ आर्यन को बेडरूम में घसीट के ले गयीं।

लड़के भी पीछे नहीं थे। “फ़ातिमा खाने से पहले क्या तुम एक स्पेशल कॉकटेल पीना पसंद करोगी जिसमें हमारे लंड का पानी मिला हो उन्होंने दूसरे बेडरूम की ओर इशारा करते हुए कहा। “हाँ फिर तो मज़ा आ जायेगा”, फातिमा चहकते हुए बोली।

“आर्यन को तो अब एक ही शौक रह गया है, चोदना, चोदना और सिर्फ़ चोदना। जबसे तुम लोग गये हो, आबिदा और सलमा, दोनों रात में उसके साथ सोती हैं। वो रात को तो उनको चोदता ही है पर दिन में जब भी मौका मिलता है अपना लंड उनकी चूत में पेल देता है”, रूही ने आर्यन की ओर देखते हुए कहा।

“मज़े करने दो उसे! क्या शुक्रवार को सायरा आयी थी प्रीती ने पूछा।

“हाँ आयी थी। आर्यन उसका इंतज़ार कर रहा था और जैसे ही वो आयी उसे अपने कमरे में ले गया। वो शाम को घर जाने के समय ही बाहर आयी”, रूही ने हँसते हुए जवाब दिया।

“फिर उसके काम का क्या हुआ प्रीती ने पूछा।

“मैं ये बर्दाश्त नहीं करती कि काम बाकी पड़ा रहे। उसका काम आबिदा और सलमा को करना पड़ा”, रूही ने जवाब दिया।

“क्या उन्हें बुरा नहीं लगा प्रीती ने पूछा।

“नहीं... वो दोनों आर्यन से बहुत मोहब्बत करती हैं। आबिदा से तो मुझे ये भी पता चला कि सायरा की तीन छोटी बहनें हैं। और जब वो बड़ी हो जायेंगी तो सायरा पहली बार आर्यन से ही उनकी चुदाई करवायेगी”, रूही ने जवाब दिया।

“क्यों ना खाने के पहले ड्रिंक्स और थोड़ी चुदाई कर ली जाये मैंने रूही से पूछा।

“मुझे तो लग रहा था कि तुम पूछोगे ही नहीं”, रूही हँसते हुए बोली।

जब हम रूही की चुदाई कर चुके थे तो रूही ने पूछा, “क्या तुम्हारे एम-डी आ रहे हैं

“हाँ! वो आ रहे हैं। मैंने उन्हें तुम्हारे बारे में बताया था। वो तुम्हें चोदने की फ़िराक में है”, मैंने जवाब दिया।

“अगर वो तुम्हें चोदे तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा प्रीती ने पूछा।

“नहीं! बुरा क्यों लगेगा? मैं तुम्हारे एम-डी को बरसों से जानती हूँ। वो कई सालों से मेरे पीछे पड़ा हुआ है। जब भी मैं अपने शौहर के साथ क्लब में उससे मिलती तो वो मुझे छेड़ने से बाज़ नहीं आता था। पर अब जब कि मैं बेवा हो चुकी हूँ तो मैं भी उससे चुदवाना चाहुँगी”, रूही ने जवाब दिया।

“उससे चुदवाकर तुम्हें पछतावा नहीं होगा। एम-डी जानता है कि औरतों को खुश कैसे किया जाता है”, प्रीती ने हँसते हुए कहा।

“उम्मीद है ऐसा ही होगा! उसे चुदाई की काफी प्रैक्टिस है”, रूही बोली।

पार्टी रात को सात बजे शुरू होने वाली थी। साढ़े छः बजे दरवाजे की घंटी बजी। “इस समय कौन हो सकता है प्रीती ने पूछा।

“आयेशा ही होगी!” मैंने जवाब दिया। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“मैंने तो सोचा था कि तुम उसे नहीं बुलाने वाले हो!” प्रीती ने कहा।

“पहले मैं उसे नहीं बुलाना चाहता था। पर जो खेल आज की रात के लिये मेरे दिमाग में है, उसके लिये एक लड़की कम पड़ रही थी..... सो मैंने उसे बुला लिया”, मैंने प्रीती को समझाया।

“कैसा खेल रूही ने उत्सुक्त में पूछा।

“उसके लिये तुम्हें थोड़ा इंतज़ार करना होगा”, मैंने आयेशा को अंदर लेते हुए कहा।

हमेशा की तरह आयेशा बहुत ही सुंदर लग रही थी। उसने बहुत ही अच्छा मेक-अप किया हुआ था और आसमानी नीले रंग का बहुत ही सैक्सी सलवार-कमीज़ और उससे मैचिंग सफ़ेद रंग के हाई-हील के सैंडल पहन रखे थे। “आओ आयेशा! तुम्हारा स्वागत है”, प्रीती ने कहा। “मेरे करीब तो आओ जरा ताकि मैं तुम्हें अच्छी तरह निहार सकूँ।”

एक प्यारी मुस्कान के साथ आयेशा प्रीती के सामने एक मॉडल की तरह खड़ी हो गयी। “बहुत सुंदर लग रही हो...... एक दम किसी अप्सरा की तरह”, प्रीती ने उसे गले लगाते हुए कहा, “लेकिन तुम्हारी आँखें सुर्ख क्यों हैं, क्या तुम रोती रही हो

उसकी आँखों में तुरंत ही आँसू आ गये और उसने गर्दन हिला दी, “हाँ!”

“क्या हुआ.....? बताओ मुझे”, प्रीती ने पूछा।

“उन्हें सब मालूम पड़ गया है! ऑफिस में क्या होता है और आपके घर पर क्या-क्या होता है”, उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।

“ओह गॉड! फिर तो तुम्हारे अब्बा ने जमकर डाँट लगायी होगी तुम्हें मैंने कहा।

“हाँ! उन्होंने जरूर मेरी ठुकाई की होती अगर अम्मी ने उन्हें रोक ना दिया होता”, आयेशा ने नज़रें झुकाते हुए कहा।

“तुम्हारी अम्मी ने उन्हें रोका???” मैं आगे कहना चाहता था कि आयेशा हँस पड़ी, “सर! ये मगरमछी आँसू थे। पर ये सच है कि उन्हें सब पता चल गया है।”

“आयेशा थोड़ा सीरियस होकर सब सच-सच बताओ”, मैं थोड़ा जोर से बोला।

“सर! जब मैंने अब्बा से आज की रात को आने के लिये उनकी इजाज़त चाही तो वो मुझ पर बरस पड़े। कहने लगे कि वो सब जानते हैं कि वहाँ ऑफिस में और आपके घर पर क्या होता है।”

“वो इतना गुस्से में थे कि फिर अम्मी को बीच में आना पड़ा और उन्होंने सब उन्हें शुरू से बता दिया।”

“पर तुम्हारी अम्मी को कैसे पता चला प्रीती ने पूछा।

“जब एक महीने मुझे महावारी नहीं हुई थी तो उन्हें शक हो गया था। तब मैंने अम्मी से कहा था कि वो सच कह रही हैं, और मैंने उन्हें बताया कि कैसे प्रीती जी ने मेरा खयाल रखा था। तब अम्मी ने मुझसे कहा कि जो हो चुका है वो वापस नहीं आ सकता..... बस मैं एक बात का खयाल रखूँ कि घर की बदनामी ना हो।”

“बस फ़िर क्या था...... मैं तुरंत तैयार हुई और यहाँ चली आयी। सॉरी मैं थोड़ा जल्दी ही आ गयी।” आयेशा ने अपनी कहानी पूरी करते हुए कहा।

हम लोग बातों को और आगे बढ़ाते कि दरवाजे की घंटी बजी। “रुको मैं देखता हूँ”, कहकर मैं दरवाजे की ओर बढ़ा।

जैसे ही मैंने दरवाजा खोला मैंने रूही को प्रीती से कहते सुना, “मैं अभी दो मिनट में आती हूँ।”

मैं एम-डी और उनके परिवार को अंदर लेकर आ गया। साथ ही अनिता और मीना भी आ गये। इस तरह सभी मेहमान आ चुके थे। आपस में परिचय और स्वागत के बाद एम-डी ने मुझसे पूछा, “राज! रूही कहाँ है

“हाय राजू! मैं तुम्हारे पीछे खड़ी हूँ”, रूही ने कहा। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“हाय रूही मेरी जान!” एम-डी ने उसे गले लगाते हुए कह।, “तुम पहले से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत और जवान लग रही हो।”

“तुम पहले से जरूर थोड़े उम्र में बड़े लग रहे हो पर आज भी कोई भी औरत तुम्हारी ख्वाहिश कर सकती है”, रूही ने जवाब दिया।

“दोस्तों! इससे पहले कि हम बातचीत का दौर आगे बढ़ायें, क्यों ना हम सब अपने कपड़े उतार कर एक दूसरे से घुल मिल जायें”, मैंने घोषणा करते हुए कहा।

सब लोग अपने कपड़े उतार कर नंगे हो गये और ड्रिंक्स पीते हुए आपस में बातें करने लगे। औरतों ने सिर्फ अपने ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने हुए थे।

रूही के नंगे बदन को अपनी गिरफ़्त में लेकर एम-डी ने उसके मम्मों को मसल दिया। “रूही! आज मैं तुम्हें दिल भर के चोदूँगा। याद है मैंने तुमसे कहा था कि एक दिन मैं तुम्हें जरूर चोदूँगा।”

“उन दिनों का तो मुझे पता नहीं कि तुम मुझे चोद पाते कि नहीं....... हाँ! आज जब मैं बेवा हो गयी हूँ तो जिससे मेरा मन करे उससे चुदवा सकती हूँ”, कहकर रूही ने जोर से एम-डी के खड़े लंड को भींच दिया, “आज मैं तुम्हारे लंड से एक-एक बूँद निचोड़ लूँगी।”

“राज कह रहा था कि तुम्हारी चूत काफी कसी हुई और गरम है!” एम-डी ने उसके मम्मों को मसलते हुए कहा।

“चोद कर खुद देख लो!” रूही हँसते हुए उसके लंड को और रगड़ने लगी।

“रूही! क्या तुम उस लड़की को जानती हो जो आयेशा से बात कर रही हैएम-डी ने पूछा।

“वो मेरी बेटी फातिमा है”, रूही ने जवाब दिया।

“क्या उसकी भी चूत तुम्हारी चूत की तरह गरम हैएम-डी ने पूछा।

“उसकी भी चूत को चोद के देख लो.....” रूही ने हँसते हुए जवाब दिया।

“हाँ! मैं चोद के जरूर देखूँगा। लेकिन पहले तुम्हारी चूत को और फिर तुम्हारी बेटी की चूत को”, एम-डी जोर-जोर से उसकी चूचियों को मसलते हुए कहा।

“फातिमा! जरा यहाँ तो आना”, रूही ने आवाज़ लगायी। फातिमा अब तक काफी शराब पी चुकी थी और ऊँची ऐड़ी के सैंडलों में लड़खड़ाती उनके पास आयी। रूही ने उसका परिचय कराया, “इनसे मिलो! ये हमारे परिवार के पुराने जान पहचान वालों में से हैं और तुम्हारी सहेली रजनी के अंकल भी..... मिस्टर राजू।”

“सलाम सर!” फातिमा ने थोड़ा सा सर झुका कर उसे सलाम किया।

“मेरे पास आओ!” एम-डी ने कहा, “जरा तुम्हारे बदन की गरमाहट को महसूस करने दो।” फिर एम-डी ने फातिमा की चूचियों को जोर से मसलते हुए कहा, “तुम्हारी चूचियाँ कितनी भरी भरी हैं। लगता है कि तुम्हें चोद कर मुझे काफी आनंद आयेगा।”

“उम्मीद करती हूँ कि आपके लंड में इतना पानी हो कि वो हम दोनों की चूत कि प्यास बुझा सके”, कहकर फातिमा ने एम-डी के लंड को जोर से मसल दिया।

“प्लीज़ सब लोग मेरी बात पर ध्यान दें......” मैंने जोर से चिल्लाते हुए कहा, “आज की पार्टी का थीम है माँ-बेटी। पहले मैं आप सबसे उन चूतों का परिचय करा दूँ जो आज की रात माँ-बेटी की जोड़ी बन कर आयी हैं। पहली जोड़ी है मिली और टीना की!” कमरे में जोर की ताली बजने लगी।

“दूसरी जोड़ी है योगिता और रजनी की, तीसरी है अनिता और मीना की, और आखिरी है रूही और फातिमा की। उसके बाद हमारे बीच हैं, दो सगी बहनें, अंजू और मंजू और उनका साथ दे रही हैं मेरे सालों की बीवियाँ सिमरन और साक्षी। और आखिर में है मेरी बीवी प्रीती और और सुंदर आयेशा। प्लीज़ सब इनका जोर से ताली बजा कर स्वागत करें।”

कमरे में जोर की तालियों की गड़गड़ाहट गूँज पड़ी। शराब पानी की तरह पी जा रही थी और सब नशे और मस्ती में चूर थे। “आज की रात हम एक खेल खेलेंगे। हर मर्द अपने पसंद की जोड़ी चुनेगा। वो जोड़ी को अदल-बदल नहीं कर सकता”, मैंने कहा।

“मैं रूही और फातिमा को चुनता हूँ!” एम-डी थोड़े उतावले स्वर में बोला। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“सर! आप थोड़ा सब्र कीजिये। आपकी बारी बाद में आयेगी। पहली बारी जय की है। माँ -बेटी की जोड़ी को इस पार्टी में बुलाया जाये, ये सुझाव उसका था और इसलिये पहला हक उसका बनता है। जय के चुनने के बाद उम्र को महत्व दिया जायेगा। जय तुम किसे चुनना चाहोगे मैंने कहा।

“एम-डी को अपनी पसंद लेने दो! मैं अनिता और मीना को चुनता हूँ”, जय ने उन दोनों को अपनी बाँहों में भरते हुए कहा।

एम-डी के बाद मैं ही उम्र में बड़ा था। सो मैंने मिली और टीना को अपनी बाँहों में भर लिया। उसके बाद पसंद चलती रही और परिणाम ये था कि राम ने योगिता और रजनी को चुना। श्याम ने अंजू और मंजू दोनों बहनों को। विजय ने अपने आपको सिमरन और साक्षी के साथ कर लिया। आर्यन अपनी पुरानी दो प्रेमिकाओं, प्रीती और आयेशा को पाकर खुश था।

“राज तुमने ये नहीं बताया कि खेल क्या है अनिता ने जय के लंड को अपने ग्लास में डालकर शराब में नहलाते हुए पूछा।

मेरे लिविंग रूम के कोने में बने बार की तरफ इशारा कर मैंने कहा, “जो भी चाहे बार से ड्रिंक ले सकता है। जी भर कर पीजिये और मैं खेल और उसके नियम आप सबको १५ मिनट बाद बताऊँगा। सो प्लीज़ आप सब इंजॉय करें और १५ मिनट का इंतज़ार।”

!!! क्रमशः !!!


भाग-१ भाग-२ भाग-३ भाग-४ भाग-५ भाग-६ भाग-७ भाग-८ भाग-९ भाग-१० भाग-११ भाग-१२ भाग-१३ भाग-१४ भाग-१५ भाग-१७

मुख्य पृष्ठ (हिंदी की कामुक कहानियों का संग्रह)

Keyword: Seduction, Adultery, Big-cock, Masturbation (F), Hindi Story, Hindi Font Sexy Story, High Heels, Highheels, Sandal, Salwar Kameez, Saree, India, Indian, Chut, Choot, Chutmarani, Gaand, Hindi Chudai Kahani, Kahaniya, Maa-Beti Ki Chudai, Muslim Sluts, व्याभिचार (गैर-मर्द), विशाल लण्ड, हस्तमैथुन (स्त्री), कुत्ते का लण्ड, कुत्ते से चुदाई, शराब, नशे में चुदाई, ऊँची हील के सैंडल, ऊँची ऐड़ी, सेंडल, सैंडिल, सेंडिल, साड़ी, सलवार कमीज़, हिंदी, भारत, इंडिया, हिंदी कहानियाँ, हिन्दी, चूतमरानी, मुसलमान Tarakki Ka Safar, Tarakki ka Safar
Seduction, Adultery, Big-cock, Masturbation (F), Hindi Story, Hindi Font Sexy Story, High Heels, Highheels, Sandal, Salwar Kameez, Saree, India, Indian, Chut, Choot, Chutmarani, Gaand, Hindi Chudai Kahani, Kahaniya, Maa-Beti Ki Chudai, Muslim Sluts, व्याभिचार (गैर-मर्द), विशाल लण्ड, हस्तमैथुन (स्त्री), कुत्ते का लण्ड, कुत्ते से चुदाई, शराब, नशे में चुदाई, ऊँची हील के सैंडल, ऊँची ऐड़ी, सेंडल, सैंडिल, सेंडिल, साड़ी, सलवार कमीज़, हिंदी, भारत, इंडिया, हिंदी कहानियाँ, हिन्दी, चूतमरानी, मुसलमान Tarakki Ka Safar, Tarakki ka Safar

Seduction, Adultery, Big-cock, Masturbation (F), Hindi Story, Hindi Font Sexy Story, High Heels, Highheels, Sandal, Salwar Kameez, Saree, India, Indian, Chut, Choot, Chutmarani, Gaand, Hindi Chudai Kahani, Kahaniya, Maa-Beti Ki Chudai, Muslim Sluts, व्याभिचार (गैर-मर्द), विशाल लण्ड, हस्तमैथुन (स्त्री), कुत्ते का लण्ड, कुत्ते से चुदाई, शराब, नशे में चुदाई, ऊँची हील के सैंडल, ऊँची ऐड़ी, सेंडल, सैंडिल, सेंडिल, साड़ी, सलवार कमीज़, हिंदी, भारत, इंडिया, हिंदी कहानियाँ, हिन्दी, चूतमरानी, मुसलमान Tarakki Ka Safar, Tarakki ka Safar

Seduction, Adultery, Big-cock, Masturbation (F), Hindi Story, Hindi Font Sexy Story, High Heels, Highheels, Sandal, Salwar Kameez, Saree, India, Indian, Chut, Choot, Chutmarani, Gaand, Hindi Chudai Kahani, Kahaniya, Maa-Beti Ki Chudai, Muslim Sluts, व्याभिचार (गैर-मर्द), विशाल लण्ड, हस्तमैथुन (स्त्री), कुत्ते का लण्ड, कुत्ते से चुदाई, शराब, नशे में चुदाई, ऊँची हील के सैंडल, ऊँची ऐड़ी, सेंडल, सैंडिल, सेंडिल, साड़ी, सलवार कमीज़, हिंदी, भारत, इंडिया, हिंदी कहानियाँ, हिन्दी, चूतमरानी, मुसलमान Tarakki Ka Safar, Tarakki ka Safar


Online porn video at mobile phone


cache:Cqo0EcB0YaUJ:http://awe-kyle.ru/~Passinby/stories.html+Mg, inc, rom, cons,cache:VG1NHEWMk3YJ:awe-kyle.ru/~LS/stories/roger5261.html Kleine Fötzchen perverse geschichten extremNeaspron sex movie videoकुत्ते से साथ सेक्स की कहानीcache:h7M7C874DLkJ:awe-kyle.ru/~Alvo_Torelli/Stories/Viral/viralpageantpart1.html पेशाब पीना कहानीferkelchen lina und muttersau sex story asstrdesi girls likes butthole play aur ashwhole fuckferkelchen lina und muttersau sex story asstrmahesh ki gay chudaycache:iqGaPzzwrjYJ:http://awe-kyle.ru/~Dandy_Tago/TheDollhouse/Part_14.html "the dollhouse" dandy tagomein schwanz spritzte gesicht klein engsex stories -sex stories-xxx.comtochter fickt familienhund storiesमुसलमानों के मोटे लंड से सेक्स किया मां बहन भाई कोfaster than the pace increased rachael renpetचूच मै लंडporn stories by fairyboiplaying doctor asstrasstr.com norihajostorys.comजानु के संग चुदवाऊन्गीमुझे ब्लैकमेल करके गैर मर्द ने चोदाLittle sister nasty babysitter cumdump storiescunt chewed and sucked at his cock. The dark curls of her pussy parted, revealing her slippery cunt lips and her clit as they scraped along the throbbing hardness of his cock.Fötzchen eng jung geschichten streng perversनंगा रहना से अंडकोश बढता हैRape-she tried to push my chest but unsuccessfully my dick move deeper into her pussyKleine ärschchen geschichtenasstr.org Black masterCOMBI PEDANAL ki videoFötzchen eng jung geschichten streng perversRenpet incest sories mom-son getting intimateऐसी चुदायी ना होगी दुबाराbhuralundi saw my sister in bras and sucked her huge titts hardननद को उसके आशिक से चुदवाने में मदद की हिनदी सैकसी कहानियाँcache:c9AR2UHUerYJ:awe-kyle.ru/~sevispac/girlsluts/handbook/index.html cache:gPYaVK_VuIsJ:awe-kyle.ru/~SirSnuffHorrid/SirSnuff/SGFM/SGFM13.html cache:owz_AvCaRAEJ:awe-kyle.ru/~LS/stories/baracuda1921.html Anorectic Fötzchen klein geschichtencache:JXuDK0Yhv9cJ:awe-kyle.ru/files/Authors/Lance_Vargas/www/restarea.html [email protected] authorsewe asstrFotze klein schmal geschichten perversimpregnorium no condoms archive incest storiesHindi khani chudae kimeinen hengstschwanz in sein maul gestopftcache:Ge8qsg569ZkJ:awe-kyle.ru/~mcstories/HellNeedsLibrarians/index.html cache:XypYOJqvnYAJ:awe-kyle.ru/~LS/stories/baracuda1967.html hajostorys.comALurker8192 porno stories -t-s-s-a.com -c-s-s-a.com anais ninja stories awe-kyle.rua white boy enslaved by sailor boycache:01g7wrMYukIJ:awe-kyle.ru/~pza/lists/boyslave_hist_stories.html?s=8 aadhi umr ke bad mja liyaस्कर्ट उठाकर चूत दिखायीcache:s4Pmq84gkKwJ:awe-kyle.ru/~LS/stories/silvertouch4644.html औरत ने गधे का लँड सहलाया सेकसी काहनिया हिँदीferkelchen lina und muttersau sex story asstrपोरनहिन्दी बीडिओJung fötzchen eng perverse geschichtener wichste die haarlose Fotze seiner Muttertraining husband with sloppy second asstrcache:U3yLtWvuYkkJ:awe-kyle.ru/~pervman/oldsite/stories/K001/KristentheCruiser/KristentheCruiser_Part3.htm Kleine Ärschchen dünne Fötzchen geschichten perversbrother uses baby sister's mouth for his cum dumpster stories Mgबाप और बेटे ने मिलकर दादी और माँ को एक साथ चोदाcache:lMRp6bw38iQJ:awe-kyle.ru/~LS/stories/badman1313.html "grow inside me" clit cumकुत्ता के लण्ड से चुदवाने की आदतgirl ped rape geschichtekarnataki nude womenstarakki ka safar poori chudai kahani long sex storyचूदे चिल्ला कर video hindinaked high school programcache:srlpVmIFf58J:awe-kyle.ru/~SirSnuffHorrid/SirSnuff/OneShots/FirstPregnancyTest.html bongoras porni did not intend to cum in her mouthJaryar pornärschchen geschichten perversread the hood by Nphillydogg in nifty archive mobilemin trÃ¥nga dotters fitta sprutadesexy hindi kahaniyo k lekhakporn story kristen archives blackmail couldn'tcache:_HvVGyGX2TcJ:https://awe-kyle.ru/~FUCKTOR/mytranslations/pokorenietari.html ASSTR.ORG/FILES/AUTHORS/DAVE SEXMADNifty.org boy in tight shortsj'ai ete dépucelé en colo asstrKleine fötzchen geschichten strengchipkam chipkacobillard terrific girls site:awe-kyle.rucache:http://https://www.asstr.org/files/Authors/eskimo1958/pregnant.htmlferkelchen lina und muttersau sex story asstrगंदी गालियाँ देकर माँ की चूदाईmein enkel hat immer einen steifen pimmel